धान के खेत में हरियाली हो रही कम, किसान यूरिया नहीं माइक्रोन्यूट्रिएंट का करें छिड़काव
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कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि धान में अधिकतर किसान हरियाली लाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं. किसानों को यह सोचना होता है कि अगर यूरिया का हम धान में ज्यादा प्रयोग करेंगे तो हरियाली अच्छी आएगी, लेकिन किसान ऐसा बिल्कुल भी ना करें. इससे फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है.
सहारनपुर: जनपद में जहां पर किसान बासमती धान के साथ ही धान की कई वैरायटी को लगाना बेहद पसंद करते हैं. धान के पौधों में हरियाली आना जरूरी होता है क्योंकि हरियाली आने से ही धान के खेत का पता चलता है कि धान किस तरीके से तेजी से बढ़ेगा और उसको सही पोषक तत्व मिलने के साथ ही उसमें बीमारियां कम है. कुछ धान के खेतों में किसानों की लापरवाही के कारण और दूसरे पोषक तत्वों के ज्यादा इस्तेमाल के कारण धान में हरियाली कम हो जाती है. जिससे पौधे की बढवार भी रुक जाती है.
अक्सर धान में हरियाली बढ़ाने के लिए किसान यूरिया का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं जो की हरियाली तो बढ़ा देता है लेकिन कई तरह की समस्याएं धान में उत्पन्न हो जाती है. इसलिए हरियाली बढ़ाने के लिए किसान को यूरिया खाद से बचना चाहिए और हरियाली बढ़ाने के लिए आप कुछ और पोषक तत्वों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
इन चीजों से धान में बढ़ेगी हरियाली उत्पादन होगा जबरदस्त
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉक्टर आईके कुशवाहा ने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि धान में अधिकतर किसान हरियाली लाने के लिए यूरिया का इस्तेमाल करते हैं. किसानों को यह सोचना होता है कि अगर यूरिया का हम धान में ज्यादा प्रयोग करेंगे तो हरियाली अच्छी आएगी, लेकिन किसान ऐसा बिल्कुल भी ना करें. इससे फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है. मेरा किसान भाइयों से यह अनुरोध है कि जब भी आपको ऐसा लगता है कि धान का पौधा कमजोर है हरियाली कम आ रही है तो बाजार में इस समय बहुत से माइक्रोन्यूट्रिएंट जिनको सूक्ष्म तत्व भी कहा जाता है. माइक्रोन्यूट्रिएंट में पौधे के लिए पोषक तत्व मौजूद रहते हैं. अगर सूक्ष्म तत्वों का प्रयोग किसान भाई अपने खेत में छिड़काव के रूप में करते हैं तो निश्चित रूप से पौधा मजबूत होता है, खर्च कम आता है और पौधों में हरियाली बढ़ाने के साथ एक अच्छा उत्पादन मिलता है.
इसके छिड़काव से नजर नहीं आएंगे कीट
अगर धान के खेत में किसान भाइयों को छिड़काव करते हुए कोई भी कीट व बीमारी दिखाई देता है तो किसान उसी छिड़काव के साथ उस कीट और बीमारी को नियंत्रित करने के लिए जो कृषि रक्षक रसायन है उनका भी प्रयोग कर सकते हैं. हरियाली का मतलब होता है फोटोसिंथेसिस, पौधे को भोजन सूरज की रोशनी और पानी के द्वारा मिलता है. किसान अपने धन से अच्छा गहरा हरे रंग के साथ उत्पादन लेना चाहते हैं तो धान की बाली बूट में आने से पहले संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल करके अपने पौधे को मजबूत कर लें.
अन्यथा अगर आप यूरिया (नाइट्रोजन) का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे धान के खेत में पौधे की बढवार बढ़ जाती है, बाली कमजोर होती है और ऐसे खेतो में कीट और रोगों का प्रकोप ज्यादा होता है. तो इसलिए मेरा किसान भाइयों से अनुरोध है कि आप यूरिया के ज्यादा इस्तेमाल से बचे और जो पोषक तत्व और माइक्रोन्यूट्रिएंट आते हैं उनका इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा छिड़काव के रूप में धान के खेत में जरूर करें.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें