ना घोड़ी, ना लग्जरी कार…, 20 टुकटुक में निकली बारात, 150 बरातियों के साथ दुल्हन लेने पहुंच
लखीमपुर खीरी: भारतीय शादियों में शानो-शौकत, महंगी लग्जरी गाड़ियां, भारी-भरकम तामझाम और लाखों रुपयों की फिजूलखर्ची अब एक आम बात हो चुकी है. लेकिन उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सादगी और समझदारी की एक ऐसी अनोखी मिसाल सामने आई है, जिसे देखकर हर कोई हैरान भी है. जहां आजकल लोग अपनी बारात में बड़ी-बड़ी गाड़ियों का काफिला निकालना स्टेटस सिंबल मानते हैं, वहीं लखीमपुर खीरी में एक दूल्हा बेहद अनोखे अंदाज में अपनी दुल्हन को लेने पहुंचा. यह दूल्हा किसी मर्सिडीज या ऑडी कार में नहीं, बल्कि फूलों से सजे 20 ई-रिक्शों (E-Rickshaws) के काफिले के साथ गाजे-बाजे के साथ निकला. इस अनोखी बारात ने न केवल लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि समाज को बढ़ती महंगाई और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बहुत बड़ा और प्रभावी संदेश भी दिया है.
यह अनोखी बरात लखीमपुर खीरी जिले के बिजुआ ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले इटकुटी गांव के मजरा सरदार टांडा की है. यहां के रहने वाले किशन बहादुर सिंह के बेटे राजेश सिंह का विवाह आम टांडा के रहने वाले ओमप्रकाश की सुपुत्री ममता के साथ तय हुआ था. शादी की रस्में तो पारंपरिक तरीके से ही निभाई गईं, लेकिन इस शादी की जो चीज सबसे बड़ी हाइलाइट बनी, वो थी दूल्हे राजेश सिंह की अनूठी सोच.
दुल्हे ने महंगे कार बुक करने से मना किया
राजेश ने अपनी शादी को यादगार और समाज के लिए उपयोगी बनाने के लिए महंगी कारों या घोड़ों का इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया. उन्होंने बारात के लिए 20 ई-रिक्शे बुक किए. इन सभी ई-रिक्शों को बेहद खूबसूरत और आकर्षक रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया था. इस अनोखे और पर्यावरण-अनुकूल काफिले में दूल्हे के साथ करीब 150 बाराती सवार होकर दुल्हन के घर के लिए रवाना हुए.
नजारा देख थम गईं हाईवे की रफ्तार
फूलों से लदे और कतार में चलते 20 ई-रिक्शों के इस अद्भुत नजारे को जिसने भी देखा, वह देखता ही रह गया. जैसे ही यह अनोखी बारात मुख्य रास्तों से होते हुए आम टांडा में दुल्हन ममता के दरवाजे पर पहुंची, वहां मौजूद घराती और स्थानीय ग्रामीण पूरी तरह हैरान रह गए.
दूल्हे को ई-रिक्शे से उतरता देख लड़की पक्ष के लोगों ने तालियां बजाकर इस पहल का स्वागत किया. इस अनोखे नजारे को देखने के लिए सड़क पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई. बारात के स्वागत के लिए खड़े लोगों और राहगीरों ने तुरंत अपने मोबाइल फोन निकाल लिए और इस ऐतिहासिक पल का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. देखते ही देखते यह बारात पूरे लखीमपुर खीरी और आसपास के इलाकों में सबसे बड़ी चर्चा का विषय बन गई है. स्थानीय जानकारों का कहना है कि राजेश की इस सादगी और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी ने साबित कर दिया है कि शादियां बिना फिजूलखर्ची और बिना प्रदूषण फैलाए भी उतनी ही धूमधाम से की जा सकती हैं.
लखीमपुर खीरी की इस अनोखी बारात में दूल्हे ने लग्जरी कारों की जगह किस वाहन का इस्तेमाल किया?
दूल्हे ने अपनी बारात के लिए फूलों से सजे 20 ई-रिक्शों (E-Rickshaws) के काफिले का इस्तेमाल किया.
इस अनोखी ई-रिक्शा बारात को निकालने वाले दूल्हे और उनके पिता का क्या नाम है?
दूल्हे का नाम राजेश सिंह है और उनके पिता का नाम किशन बहादुर सिंह है.
यह अनोखी शादी लखीमपुर खीरी के किस ब्लॉक और गांव से जुड़ी हुई है?
यह घटना बिजुआ ब्लॉक के इटकुटी गांव के मजरा सरदार टांडा की है.
दूल्हा राजेश सिंह कितने बारातियों को लेकर दुल्हन ममता के घर पहुंचे थे?
राजेश सिंह करीब 150 बारातियों को ई-रिक्शों पर बिठाकर आम टांडा निवासी ओमप्रकाश की बेटी ममता से ब्याह करने पहुंचे थे.
इस तरह की अनोखी बारात निकालने के पीछे दूल्हे का समाज को क्या मुख्य संदेश था?
इस सादगी भरी शादी के जरिए दूल्हे ने समाज को बढ़ती महंगाई और पर्यावरण संरक्षण (प्रदूषण मुक्ति) का एक बड़ा संदेश दिया.