न लाइन लगानी होगी, न लौटना पड़ेगा खाली हाथ…48 घंटे में मिलेगी खाद, जानिए ट्रिक

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न लाइन लगानी होगी, न लौटना पड़ेगा खाली हाथ…48 घंटे में मिलेगी खाद, जानिए ट्रिक


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न लाइन लगानी, न लौटना पड़ेगा खाली हाथ…48 घंटे में मिलेगी खाद, जानिए कैसे?

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Rampur News : किसानों को अब खाद के दुकानों के चक्कर नहीं लगाने होंगे. न ही उन्हें लाइनों में खड़े होने की जरूरत है. सरकार ऐसी व्यवस्था लेकर आई है जिससे किसानों को घर बैठे खाद मिल जाएगा. रामपुर के किसानों के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे खाद लेने का तरीका पूरी तरह बदल गया है. जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा लोकल 18 से बताते हैं कि नई व्यवस्था में बुकिंग पूरी होने पर किसान को एक बुकिंग आईडी और बारकोड मिलेगा. यही बारकोड खाद लेने के समय काम आएगा. यह व्यवस्था रामपुर और सीतापुर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है.

रामपुर. खाद लेने के लिए दुकान पर पहुंचो और पता चले कि स्टॉक खत्म है या फिर घंटों लाइन में लगने के बाद नंबर आए. खेती करने वाले ज्यादातर किसानों ने कभी न कभी ऐसी परेशानी जरूर झेली होगी, लेकिन अब रामपुर के किसानों के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की गई है, जिससे खाद लेने का तरीका पूरी तरह बदल गया है. अब किसान पहले मोबाइल से खाद बुक करेंगे और फिर तय दुकान से जाकर उसे ले सकेंगे. रामपुर को इस नई व्यवस्था के लिए प्रदेश के पायलट जिलों में चुना गया है. जिले में उर्वरक बिक्री का नया सिस्टम लागू कर दिया गया है. इसके तहत किसान अपनी जरूरत के अनुसार पहले से खाद की बुकिंग कर सकेंगे. इससे किसानों को यह पता रहेगा कि उन्हें कितनी खाद मिल सकती है और किस दुकान से मिलेगी.

फार्मर आईडी वालों के लिए ज्यादा आसान

जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा ने लोकल 18 को बताया कि नई व्यवस्था में सबसे पहले किसान को मोबाइल एप्लीकेशन पर लॉगिन करना होगा. जिन किसानों की फार्मर आईडी बनी हुई है उन्हें ज्यादा परेशानी नहीं होगी. वे आधार नंबर या फार्मर आईडी के जरिए लॉगिन कर सकेंगे. लॉगिन करते ही उनकी जमीन का विवरण अपने आप दिखाई देगा. जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी नहीं बनी है उन्हें आधार के जरिए लॉगिन करके अपनी जमीन की जानकारी दर्ज करनी होगी. अगर कोई किसान बटाई, पट्टे या किसी अन्य व्यक्ति, मंदिर या समिति की जमीन पर खेती करता है तो उसे जमीन का विवरण और जमीन मालिक का नाम दर्ज करना होगा.

किसानों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने कौन सी फसल बोई है. जमीन और फसल की जानकारी दर्ज होने के बाद सिस्टम खुद बताएगा कि किसान कितनी अधिकतम मात्रा में खाद खरीद सकता है यानी जितनी पात्रता होगी उतनी ही मात्रा दिखाई देगी. इसके बाद किसान अपनी जरूरत के हिसाब से खाद की मात्रा चुनेंगे और अपने आसपास के किसी उर्वरक विक्रेता का चयन करेंगे. बुकिंग पूरी होने पर किसान को एक बुकिंग आईडी और बारकोड मिलेगा. यही बारकोड खाद लेने के समय काम आएगा. बुकिंग होने के बाद किसान को 48 घंटे के भीतर चुनी गई दुकान से खाद लेनी होगी. इससे पहले की तरह यह स्थिति नहीं बनेगी कि किसान कई दुकानों के चक्कर लगाता रहे या उसे यह पता ही न हो कि खाद कहां उपलब्ध है.

विक्रेताओं के लिए क्या बदला

उर्वरक विक्रेताओं के लिए भी प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. पहले आधार सत्यापन के बाद सीधे खाद की बिक्री की जाती थी लेकिन अब किसान के बारकोड को स्कैन करने के बाद ही खाद दी जाएगी यानी जिस किसान ने जितनी खाद बुक की होगी उसी के आधार पर वितरण होगा. कृषि विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड भी बेहतर तरीके से रखा जा सकेगा. जरूरतमंद किसानों तक समय पर खाद पहुंचाने में भी मदद मिलेगी. इससे अनावश्यक भीड़ कम होगी.

कोई दिक्कत आने पर…

जिला कृषि अधिकारी कुलदीप सिंह राणा के मुताबिक, नई व्यवस्था को सुचारू रूप से लागू करने के लिए कृषि विभाग और उर्वरक विक्रेताओं को जरूरी निर्देश दिए गए हैं. यदि किसी तरह की तकनीकी समस्या आती है तो उसका तुरंत समाधान करने की तैयारी भी की गई है. यह व्यवस्था रामपुर और सीतापुर में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू की गई है. यदि इसका परिणाम अच्छा रहा तो आने वाले समय में प्रदेश के दूसरे जिलों में भी इसे लागू किया जा सकता है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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