पत्ती झुलसा, लीफ ब्लाइट, तना सड़न…बारिश में मक्के पर ये 3 आफत, बचाव का सिर्फ 1 रास्ता

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पत्ती झुलसा, लीफ ब्लाइट, तना सड़न…बारिश में मक्के पर ये 3 आफत, बचाव का सिर्फ 1 रास्ता


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पत्ती झुलसा, लीफ ब्लाइट, तना सड़न…बारिश में मक्के पर ये 3 आफत, बचाव सिर्फ एक

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Maize Farming Rainy Season : बरसात का मौसम मक्का की फसल के लिए वरदान भी है और अभिशाप भी. लगातार नमी, खेत में जलभराव और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से फसल में फफूंद जनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं. रायबरेली के कृषि एक्सपर्ट शिव शंकर वर्मा लोकल 18 से बताते हैं कि बारिश के दौरान मक्के में पत्ती झुलसा, डाउनी मिल्ड्यू और तना सड़न का खतरा सबसे अधिक रहता है. फॉल आर्मीवर्म पौधे की नई पत्तियों और भुट्टों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि तना छेदक पौधे के अंदर घुसकर तने को खोखला कर देता है. खेत में खरपतवार न पनपने दें, क्योंकि कई कीट और रोग इन्हीं के जरिये फैलते हैं.

रायबरेली. बरसात का मौसम मक्का की फसल के लिए जितना लाभदायक माना जाता है, उतना ही यह कई तरह के रोगों और कीटों के प्रकोप को भी बढ़ा देता है. लगातार नमी, खेत में जलभराव और तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण फसल पर फफूंद जनित बीमारियां तेजी से फैलती हैं. तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म जैसे कीट भी किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकते हैं. ऐसे में समय रहते इनकी पहचान और सही प्रबंधन अपनाना जरूरी है. रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद) लोकल 18 से बताते हैं कि बारिश के दौरान पत्ती झुलसा (लीफ ब्लाइट), डाउनी मिल्ड्यू और तना सड़न जैसी बीमारियों का खतरा सबसे अधिक रहता है. इन रोगों के कारण पत्तियों पर भूरे या पीले धब्बे दिखाई देने लगते हैं, पौधों की बढ़वार रुक जाती है और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है. यदि खेत में लंबे समय तक पानी भरा रहे तो संक्रमण और तेजी से फैल सकता है.

तुरंत कर दें अलग 

शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि बारिश के मौसम में फॉल आर्मीवर्म (सैनिक इल्ली) और तना छेदक मक्का की फसल के सबसे खतरनाक दुश्मन माने जाते हैं. फॉल आर्मीवर्म पौधे की नई पत्तियों और भुट्टों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि तना छेदक पौधे के अंदर घुसकर तने को खोखला कर देता है. समय पर नियंत्रण नहीं होने पर पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है. शिव शंकर वर्मा के मुताबिक, खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि पानी जमा न हो. समय-समय पर फसल का निरीक्षण करें. अगर किसी पौधे पर रोग या कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत अलग कर दें. खेत में खरपतवार न पनपने दें, क्योंकि कई कीट और रोग इन्हीं के माध्यम से फैलते हैं.

ये तरीके भी आएंगे काम

शिव शंकर वर्मा के मुताबिक, संतुलित उर्वरकों का प्रयोग, समय पर सिंचाई, खेत की नियमित निगरानी और समेकित कीट प्रबंधन आईपीएम अपनाकर किसान मक्का की फसल को बारिश के मौसम में होने वाले रोगों और कीटों से काफी हद तक बचा सकते हैं. थोड़ी सी सतर्कता और सही समय पर उठाए गए कदम किसानों की पैदावार और आमदनी दोनों को सुरक्षित रखने में मदद करेंगे.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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