पोल्ट्री फार्मिंग से कमाना चाहते हैं लाखों? जानिए लागत, सरकारी योजना-प्रोसेस
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अगर आप भी कम लागत में बेहतरीन कारोबार शुरू करना चाहते हैं, तो मुर्गी पालन आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. अंडे और चिकन की बढ़ती मांग ने इसे फायदे के सौदा वाला व्यवसाय बना दिया है. सरकारी योजनाओं की मदद से इसे शुरू करना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान भी हो गया है. आगे विस्तार से जानिए…
आज के दौर में पोल्ट्री फार्मिंग तेजी से बढ़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों सहित शहरों के लोग भी इसे स्वरोजगार का बड़ा आधार मान रहे हैं. अंडे और चिकन की मांग पूरे साल बनी रहती है. होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और घरेलू बाजार में इसकी लगातार खपत होती रहती है. यह व्यवसाय यदि सही योजना और प्रबंधन के साथ शुरू किया जाए, तो निश्चित रूप से कम निवेश में भी अच्छी कमाई की जा सकती है. इसी के चलते अब युवा भी इस क्षेत्र की ओर रुख कर रहे हैं.

मुर्गी पालन के लिए सबसे पहले सही स्थान का चयन करना चाहिए. ऐसी जगह जहां स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त हवा, साफ पानी और धूप की सही व्यवस्था हो. शुरुआती स्तर पर 200 से 500 चूजों के साथ कारोबार शुरू करना सुविधाजनक होता है. ध्यान रखें अच्छी नस्ल के स्वस्थ चूजे ही खरीदना चाहिए. यही नहीं, शेड का निर्माण इस तरह होना चाहिए कि गर्मी, सर्दी और बारिश के मौसम में भी मुर्गियों को सुरक्षित और स्वस्थ माहौल मिल सके.

राजकीय पशु चिकित्सालय नगर बलिया के उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ एस.डी द्विवेदी के अनुसार, न केवल चूजे खरीद लेना ही काफी है, बल्कि उनकी देखभाल बहुत जरूरी है. संतुलित और पौष्टिक आहार देने से मुर्गियों का विकास बेहतर और उत्पादन बढ़ता है. समय-समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई बनाए रखें. शेड का रोजाना निगरानी करना भी महत्वपूर्ण है. यदि शुरुआत से ही इन बातों का पालन किया जाए, तो मृत्यु दर कम रहती है.
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अगर आप छोटे स्तर पर पोल्ट्री फार्म शुरू करना चाहते हैं, तो लगभग डेढ़ लाख से तीन लाख रुपए तक की जरूरत पड़ सकती है. इस लागत में शेड तैयार करना, चूजों की खरीद, दाना, दवाइयां, पानी की व्यवस्था और अन्य जरूरी उपकरण शामिल हैं. यदि कोई व्यक्ति बड़े पैमाने पर व्यवसाय शुरू करना चाहता है, तो उसे अधिक पूंजी लगानी पड़ सकती हैं. हालांकि, कारोबार बढ़ने के साथ उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि की संभावना बहुत अधिक हो जाती हैं.

इसको बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें भी कई योजनाएं चला रही हैं. इन योजनाओं के तहत पात्र लोगों को बैंक के माध्यम से ऋण मिल जाता है. कई मामलों में सब्सिडी का भी लाभ मिलता है, जिससे शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है. सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को स्वरोजगार से जोड़ना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है. अतः आप भी इन योजनाओं का लाभ उठाकर खुद का रोजगार शुरू कर सकते हैं.

सरकारी मदद के लिए सबसे पहले पशुपालन विभाग बलिया से संपर्क करे, यहां आपको विस्तृत जानकारी मिलेगी. जहां पोल्ट्री फार्म की परियोजना तैयार कर आवेदन जमा करना होता है. आवेदन के साथ आधार कार्ड, पहचान पत्र, बैंक खाते की जानकारी, जमीन या शेड से जुड़े दस्तावेज आदि अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र देना पड़ सकता हैं. सभी शर्तें पूरी होने और दस्तावेज सही पाए जाने पर ऋण और सब्सिडी का लाभ लिया जा सकता हैं.

व्यवसाय अंडा उत्पादन या ब्रॉयलर मुर्गियों के पालन के लिए किया जाता है. यदि प्रबंधन बेहतर, बीमारी का खतरा कम और बाजार में अच्छी कीमत मिल जाए, तो हर शानदार मुनाफा कमाया जा सकता है. अनुभव बढ़ने के साथ कारोबार का विस्तार भी आसान हो जाता है, जिससे उत्पादन और आय दोनों लगातार बढ़ोतरी होती रहती हैं.

नियमित देखभाल मुर्गी के सफलता का राज है. मुर्गियों को स्वच्छ वातावरण, समय पर टीकाकरण और गुणवत्तापूर्ण दाना ही देना चाहिए. बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लेना चाहिए. बाजार की मांग और कीमतों पर नजर रखते हुए उत्पादन की योजना बनाना महत्वपूर्ण है. थोड़ी सी सावधानी बरतने पर मुर्गी पालन कमाई का मजबूत ज़रिया बन सकता हैं.