प्राकृतिक सिंदूर का पेड़! फल मसलते ही निकलता है कुमकुम, कीमत जानकर रह जाएंगे दंग

0
प्राकृतिक सिंदूर का पेड़! फल मसलते ही निकलता है कुमकुम, कीमत जानकर रह जाएंगे दंग


होमताजा खबरकृषि

फल के अंदर छिपा सिंदूर, दुर्लभ पेड़ जिसकी खुशबू देती है सुकून, जाने खासियत

Last Updated:

बलिया में एक अनोखा सिंदूर का पेड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. इसके फलों को मसलते ही प्राकृतिक कुमकुम जैसा रंग निकलता है और सुगंध मन को सुकून देती है. बगीचे के मालिक के अनुसार, यह केमिकल वाले सिंदूर का प्राकृतिक विकल्प है, जिसकी बाजार में कीमत करीब ₹5000 प्रति किलो तक बताई जाती है. धार्मिक ही नहीं, इसका वैज्ञानिक महत्व भी माना जा रहा है.

बलिया. बाजार में विभिन्न प्रकार के सिंदूर देखने को मिल जाते हैं, हालांकि, केमिकल से बनने वाले यह सिंदूर स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सही नहीं माने जाते हैं, फिर भी लोग इस्तेमाल करते हैं. लेकिन एक प्राकृतिक सिंदूर के पेड़ के बारे में कभी आपने नहीं सुना होगा, जिसकी गुणवत्ता भी काफी शानदार होती है. यह बाजार में मिलने वाले सिंदूर से बिल्कुल अलग होती है. इसके फलों के अंदर कच्चे दानों को मसलने पर सिंदूर की झलक साफ दिखाई देती है और सुगंध तो मानो हर टेंशन को खत्म कर दे, सभी को सुकून देती है. इसकी कीमत इतनी है, शायद आप भी हैरान हो जाए. लोकल 18 से बात करते हुए बगीचे के मालिक इतिहासकार डॉ. शिव कुमार सिंह कोशिकेय ने बताया की, उन्होंने अपने स्वतंत्रता सेनानी पिता स्व. रामाशीष की यादों में इसका नाम रामाशीष वाटिका रखा है. इसमें विविध और दुर्लभ प्रकार के पेड़ पौधें देखने को मिल जाते हैं. इसी कड़ी में यहां एक सिंदूर का पेड़ दिखाई दिया, जिसके बारे में उक्त बगीचे के मालिक ने कहा कि, कई महिलाओं के मांग (सिर के बीच में सिंदूर लगाने की जगह) में तमाम समस्याएं हो जाती हैं. उसका मुख्य कारण बाजार में मिलने वाली केमिकल से बने सिंदूर हैं, जिसमें कई हानिकारक तत्वों का उपयोग किया जाता है.

बाजार में लगभग 5 हजार रुपए किलो तक

एक बार फिर लोग प्राकृतिक चीजों की ओर हार मानकर आकर्षित हो रहे हैं. इसको सिंदूर या कुमकुम के नाम से जाना जाता है. इसके फल के ऊपर रोआ होता हैं, इसके फल के अंदर दाने भरे होते हैं, जिन्हें मसलने पर सिंदूर का रंग साफ दिखाई देता है और सूंघने पर इसका सुगंध सुकून देता है. यह बाजार में लगभग 5 हजार रुपए किलो तक का बिकता है. इसको मस्तक पर लगाने से बहुत शीतलता मिलती हैं. इसका केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है. इसके पेड़ को लगाकर छोड़ देना है, यह खुद ग्रोथ करता है. बस आवश्यकता अनुसार इसकी सिंचाई करते रहना चाहिए.

About the Author

Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *