फर्जी डिग्री की फैक्ट्री, बिना पढ़े डॉक्टर! घर में छप रहीं PhD तक की मार्कशीट

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फर्जी डिग्री की फैक्ट्री, बिना पढ़े डॉक्टर! घर में छप रहीं PhD तक की मार्कशीट


Fake Degree Factory: उत्तर प्रदेश के कानपुर से शिक्षा जगत को हिलाकर रख देने वाली एक बेहद चौंकाने वाली एक्सक्लूसिव रिपोर्ट सामने आई है. पुलिस ने एक ऐसे ‘डिग्री सिंडिकेट’ का पर्दाफाश किया है, जो पैसे के दम पर किसी को भी रातों-रात डॉक्टर, इंजीनियर या ग्रेजुएट बना देता था. यह गिरोह बिना कॉलेज गए, बिना कोई परीक्षा दिए लोगों को हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, ग्रेजुएशन से लेकर पीएचडी तक की हूबहू असली जैसी दिखने वाली डिग्रियां बेच रहा था. पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 4 शातिरों को गिरफ्तार किया है, जबकि इस पूरे रैकेट में अब तक 10 आरोपी जेल की सलाखों के पीछे भेजे जा चुके हैं.

कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने बताया कि जब पुलिस टीम ने चमनगंज स्थित ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर खुद आला अधिकारी भी दंग रह गए. मास्टरमाइंड ने अपने घर के भीतर ही लाखों रुपये का हाईटेक कंप्यूटर सिस्टम, सीपीयू, एडवांस सॉफ्टवेयर और भारी-भरकम प्रिंटिंग मशीनें लगा रखी थीं. इस प्रेस से जो फर्जी डिग्रियां छपकर निकलती थीं, उनकी क्वालिटी इतनी बेहतरीन थी कि पहली नजर में यूनिवर्सिटी के बड़े-बड़े अधिकारी भी असली और नकली मार्कशीट में रत्ती भर का फर्क नहीं बता सके. गिरोह सिर्फ 10 हजार रुपये में ग्रेजुएशन की मार्कशीट और 20 हजार रुपये में पीएचडी के जाली दस्तावेज तैयार कर देता था.

लंदन से संचालित हो रहा था नेटवर्क

पकड़ा गया मुख्य अभियुक्त जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ बेहद शातिर दिमाग अपराधी है. पूछताछ में उसने कुबूल किया कि वह अपने भाई हसन आसिफ, हसन आमिर और साथी नूरुद्दीन के साथ मिलकर पिछले 13 सालों से लगातार इस फर्जी डिग्री के सिंडिकेट को चला रहा था. पुलिस जांच में इस गिरोह का एक बड़ा ‘लंदन कनेक्शन’ भी उजागर हुआ है. मास्टरमाइंड जियाउल हसन के पासपोर्ट खंगालने पर पता चला कि वह दो बार महीनों के लिए लंदन जा चुका है. मौजूदा समय में वह लंदन के ही एक इंटरनेशनल मोबाइल नंबर से भारत में बैठे अपने गुर्गों को ऑपरेट कर रहा था. वह फर्जी डिग्रियों की कमाई के दम पर बहुत जल्द अपने पूरे परिवार के साथ लंदन में हमेशा के लिए सेटल होने की फिराक में था, लेकिन उससे पहले ही कानपुर पुलिस ने उसकी किस्मत पर ताला लगा दिया.

कनाडा, ब्रिटेन और सऊदी अरब तक जाल

यह फर्जीवाड़ा सिर्फ उत्तर प्रदेश या भारत के अन्य राज्यों तक ही सीमित नहीं था. आतिफ ने ऑन-डिमांड कनाडा, ब्रिटेन (लंदन) और सऊदी अरब जैसे देशों में नौकरी पाने के इच्छुक युवाओं को मोटी रकम लेकर सैकड़ों फर्जी मार्कशीट बेची हैं. पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में रॉ मटेरियल बरामद किया है. आरोपियों के कब्जे से 62 तैयार फर्जी मार्कशीट, डिग्रियां, प्रोविजनल सर्टिफिकेट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट, 830 सादे स्पेशल प्रिंटिंग पेपर, पेपर पर सुरक्षा चक्र के लिए लगाए जाने वाले 80 फर्जी होलोग्राम, होलोग्राम बनाने की डाई और देश की विभिन्न नामी यूनिवर्सिटीज के 141 रबर स्टैम्प (मुहरें) बरामद किए गए हैं.

देश की इन बड़ी यूनिवर्सिटीज के नाम का दुरुपयोग

पुलिस कमिश्नर के मुताबिक, यह गिरोह देश के कई बड़े और प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों की साख को बट्टा लगा रहा था. बरामद की गई मार्कशीट और मुहरों में मुख्य रूप से:

  • अन्नामलाई यूनिवर्सिटी
  • उस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद
  • डॉ. डी.वाई. पाटिल विद्यापीठ पुणे
  • लिंगाया विद्यापीठ फरीदाबाद
  • कर्नाटक स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी
  • अलगप्पा यूनिवर्सिटी
  • आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय
  • छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी (CSJMU) कानपुर शामिल हैं. पुलिस अब उन लोगों की भी कुंडली खंगाल रही है जिन्होंने इस गिरोह से फर्जी डिग्री खरीदकर देश-विदेश में नौकरियां हासिल की हैं.

कानपुर में पकड़ी गई ‘डिग्री फैक्ट्री’ का मास्टरमाइंड कौन है और वह कहां का रहने वाला है?
इस फर्जी डिग्री सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड जियाउल हसन उर्फ समीर उर्फ आतिफ है. वह मूल रूप से हीरामन का पुरवा (कानपुर) का निवासी है और वर्तमान में चमनगंज के नाला रोड स्थित इकबाल बिल्डिंग में रह रहा था.

यह गिरोह फर्जी मार्कशीट और पीएचडी की डिग्रियां कितने रुपये में बेचता था?
यह गिरोह बिना कॉलेज गए और बिना पढ़ाई किए मात्र 10 हजार रुपये में ग्रेजुएशन की मार्कशीट और करीब 20 हजार रुपये में पीएचडी (PhD) तक के फर्जी दस्तावेज और डिग्रियां बेच देता था.

इस फर्जी डिग्री रैकेट का अंतरराष्ट्रीय और ‘लंदन कनेक्शन’ क्या है?
मास्टरमाइंड जियाउल हसन दो बार लंदन में महीनों रहकर आ चुका है और मौजूदा समय में वह लंदन के ही एक मोबाइल नंबर से इस पूरे सिंडिकेट को भारत में ऑपरेट कर रहा था. उसने लंदन, कनाडा और सऊदी अरब में भी फर्जी डिग्रियां बेची हैं.

पुलिस ने छापेमरी के दौरान मौके से क्या-क्या उपकरण और सामग्री बरामद की है?
पुलिस ने मौके से 62 फर्जी मार्कशीट, 830 सादे प्रिंटिंग पेपर (रॉ मटेरियल), 80 होलोग्राम, होलोग्राम बनाने की डाई, कंप्यूटर, सीपीयू, हाईटेक प्रिंटर और विभिन्न विश्वविद्यालयों की 141 रबर स्टैम्प (मुहरें) बरामद की हैं.



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