सुपर सिल्की से PR-126 तक…धान की इन 6 वैरायटी का तोड़ नहीं, 4 महीने में तैयार
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Paddy Top Varieties : इस समय धान की पौध तैयार की जा रही है. बदलते समय के साथ अब किसान पारंपरिक किस्मों के बजाय उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली वैरायटी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. आज हम आपको धान की कुछ ऐसी उन्नत किस्मों के बारे में बता रहे हैं जिनकी खेती लखीमपुर खीरी सहित पूरे उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रही है. लखीमपुर खीरी के कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन बताते हैं कि इनमें सुपर सिल्की, सरजू-52, इंद्रासन, PR-113, PR-126 और नन्दी PR-113 शामिल हैं. सरजू-52 की फसल 135 से 145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इंद्रासन धान प्रति हेक्टेयर से 70 से 80 कुंतल तक उत्पादन आराम से हो जाता है. यह धान 120 दिन से लेकर 135 दिन के बीच में पककर तैयार हो जाता है.
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में किसान धान की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं. कम लागत में अधिक मुनाफा धान की खेती से कमाया जा सकता है. इस समय धान की पौध तैयार की जा रही है. बदलते समय के साथ अब किसान पारंपरिक किस्मों के बजाय उन्नत और अधिक उत्पादन देने वाली वैरायटी की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. कम लागत, कम समय और अधिक पैदावार देने वाली किस्में किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रही हैं. ऐसे में किसान काफी चिंतित रहते हैं कि किस वैरायटी के धान की बुवाई करें जिससे अच्छा उत्पादन मिले.

यदि किसान सही समय पर अच्छी किस्म का चयन करें और तो धान की फसल से बेहतर उत्पादन के साथ अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. आज हम आपको धान की कुछ ऐसी उन्नत किस्मों के बारे में बता रहे हैं जिनकी खेती लखीमपुर खीरी सहित पूरे उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रही है. इनमें सुपर सिल्की, सरजू-52, इंद्रासन, PR-113, PR-126 और नन्दी PR-113 शामिल हैं.

लखीमपुर खीरी के कृषि एक्सपर्ट प्रदीप बिसेन बताते हैं कि धान की सुपर सिल्की वैरायटी इस समय किसानों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म खासतौर पर अपने बेहतर दाने, चमकदार चावल और अच्छी गुणवत्ता के कारण बाजार में अधिक मांग रखती है. सुपर सिल्की धान की फसल लगभग 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है.
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सरजू-52 धान की किस्म उत्तर प्रदेश में काफी पुरानी और भरोसेमंद वैरायटी मानी जाती है. यह किस्म अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. किसान इसे इसलिए पसंद करते हैं क्योंकि यह मौसम के उतार-चढ़ाव को काफी हद तक सहन कर लेती है. सरजू-52 की फसल करीब 135 से 145 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म में प्रति हेक्टेयर 28 से 35 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त होता है. इसका पौधा मजबूत होता है और गिरने की संभावना कम रहती है.

इंद्रासन धान की वैरायटी भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. इंद्रासन धान की खेती खासतौर पर उन किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है जो कम लागत में अच्छी आमदनी चाहते हैं . इंद्रासन धान प्रति हेक्टेयर में 70 से 80 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. यह धान 120 दिन से लेकर 135 दिन के बीच में पककर तैयार हो जाता है. इंद्रासन धान में रोगों का प्रकोप कम देखा जाता है.

PR-113 धान की वैरायटी पंजाब और उत्तर प्रदेश के किसानों के बीच काफी लोकप्रिय है. यह किस्म अधिक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. इसकी फसल लगभग 135 दिनों में तैयार हो जाती है और इसका पौधा मजबूत होता है. अगर उत्पादन की बात की जाए तो प्रति एकड़ में 26 से 28 कुंतल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. धान खरीद केंद्रों पर भी इस किस्म की अच्छी मांग रहती है.

PR-126 धान की किस्म को जल्दी तैयार होने वाली उन्नत वैरायटी माना जाता है. यह किस्म कम समय में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है. PR-126 की फसल 90 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. कम अवधि की होने के कारण इसमें पानी की खपत भी कम होती है. यही वजह है कि यह किस्म किसानों के लिए आर्थिक रूप से काफी फायदेमंद साबित हो रही है. अगर उत्पादन की बात की जाए तो प्रति एकड़ में करीब 30 से 34 कुंतल तक उत्पादन आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.

नन्दी PR-113 धान की किस्म भी किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है. यह किस्म बेहतर उत्पादन और मजबूत पौधों के लिए जानी जाती है. इसकी फसल में दानों की गुणवत्ता अच्छी होती है, जिससे बाजार में किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. इसका उत्पादन करीब 28 कुंतल प्रति एकड़ तक रहता है. यह किस्म 130 दिन से लेकर 142 दिन में तैयार हो जाती है.