‘बचाई जा सकती थी जान’, चंदौली के रेलवे इलेक्ट्रिक लोको शेड में कर्मचारी की मौत
चंदौली. यूपी के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय (मुगलसराय) रेलवे मंडल के इलेक्ट्रिक लोको शेड में ड्यूटी के दौरान हुए दर्दनाक हादसे में कर्मचारी प्रमोद यादव की मौत के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश देखने को मिला. घटना के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारी एकत्र होकर रेलवे प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करने लगे. कर्मचारियों का आरोप है कि लोको शेड में सुरक्षा उपकरणों की भारी कमी है, समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होती और प्रशासन लगातार कर्मचारियों की शिकायतों को नजर अंदाज करता रहा है. कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा और चिकित्सा व्यवस्था होती, तो प्रमोद यादव की जान बचाई जा सकती थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इलेक्ट्रिक लोको शेड में नियमित मरम्मत कार्य चल रहा था. कर्मचारी प्रमोद यादव अपने साथियों के साथ काम कर रहे थे. बताया गया कि ऊपर लगा भारी उपकरण या पुली अचानक टूटकर उनके सिर पर गिर गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. घटना के बाद मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें तत्काल बाहर निकाला और इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी. इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. हादसे के बाद पूरे शेड में कामकाज प्रभावित हो गया और कर्मचारियों ने घटना के लिए रेलवे प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया.
सिर्फ नाम की मेडिकल टीम
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि इलेक्ट्रिक लोको शेड में मेडिकल टीम तैनात होने का दावा तो किया जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कोई तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होती. उनका कहना है कि गंभीर स्थिति में कर्मचारियों को निजी अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है, जिससे इलाज में देरी होती है और कई बार जान तक चली जाती है. प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि रेलवे अस्पताल की व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित है. मौके पर एंबुलेंस और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की जाती, जिसका खामियाजा कर्मचारियों को भुगतना पड़ता है.
सुरक्षा किट नहीं मिलने का आरोप
रेलवे कर्मचारी अनिता देवी ने लोकल 18 से बताया कि इलेक्ट्रिक लोको शेड में काम करने वाले कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जाते. उन्होंने कहा कि कई बार अधिकारियों से सेफ्टी शू, हेलमेट और अन्य सुरक्षा सामग्री की मांग की गई, लेकिन आज तक व्यवस्था नहीं हो सकी. उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को केवल प्लास्टिक का हेलमेट दिया जाता है, जो बड़े हादसों में किसी काम का नहीं है. मजबूरी में कई कर्मचारी अपनी सुरक्षा के लिए अपने खर्च से जूते, फेस शील्ड और अन्य उपकरण खरीदते हैं. अनिता देवी ने कहा कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाते, तो इस तरह की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता था.
कोई मेडिकल टीम नहीं
प्रत्यक्षदर्शी भगवती देवी ने लोकल 18 से बताया कि प्रमोद यादव अपने काम में लगे हुए थे. इसी दौरान ऊपर लगा हिस्सा अचानक टूटकर उनके सिर पर गिर गया. गंभीर चोट लगने के बाद वहां मौजूद कर्मचारियों ने उन्हें तुरंत बाहर निकाला और मदद के लिए आवाज लगाई. उन्होंने आरोप लगाया कि घटना के समय मौके पर कोई मेडिकल टीम मौजूद नहीं थी. कर्मचारियों ने अपने स्तर पर घायल कर्मचारी को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की. उनका कहना था कि हादसे के समय संबंधित सुपरवाइजर भी मौके पर मौजूद नहीं थे और बाद में जानकारी मिली कि अधिकारी बैठक में व्यस्त थे.
इसका भी अभाव
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने लोको शेड की खराब व्यवस्थाओं की ओर भी ध्यान दिलाया. उनका कहना है कि कार्यस्थल पर कई स्थानों पर नालियां खुली हुई हैं, जिनके ऊपर लगे ढक्कन टूट चुके हैं. इससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है. कर्मचारियों का कहना है कि कई बार इन समस्याओं की शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया. उनका आरोप है कि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहते हैं और कर्मचारियों की सुरक्षा को गंभीरता से नहीं लेते.
कर्मचारी कुलजीत कौर ने आरोप लगाया कि लोको शेड में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ नहीं होने के कारण कई ऐसे कर्मचारियों से भी काम कराया जाता है जो उस कार्य के विशेषज्ञ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि लोको और उपकरणों के रखरखाव जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती आवश्यक है, लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है. इससे कर्मचारियों की जान जोखिम में पड़ रही है. उन्होंने मांग की कि मृतक प्रमोद यादव के परिवार को उचित आर्थिक सहायता, सरकारी सुविधाएं और न्याय दिलाया जाए.
नहीं आया कोई आधिकारिक बयान
घटना के बाद कर्मचारियों का आरोप रहा कि काफी देर तक कोई वरिष्ठ रेलवे अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा. प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी केवल बैठकों और कागजी प्रक्रियाओं तक सीमित रहते हैं, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था लगातार कमजोर बनी हुई है. हालांकि, खबर लिखे जाने तक रेलवे प्रशासन की ओर से इस पूरे मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था.
गंभीर सवाल
मुगलसराय इलेक्ट्रिक लोको शेड में कर्मचारी प्रमोद यादव की मौत ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. कर्मचारियों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद सुरक्षा उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया. अब कर्मचारियों की मांग है कि इस हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, मृतक के परिवार को न्याय मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं.