कुर्सी गई, SIT की आंच, अब कहां हैं चंपत राय? रामलला की शरण में ही कर रहे ये काम…
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Where Is Champat Rai: राम मंदिर दान चोरी के बाद से सबके निशाने पर रहे चंपत राय मुख्य धारा से गायब चल रहे हैं. चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी जांच की जांच और पद छोड़ने के बाद पूर्व महासचिव चंपत राय अब ‘कलंक मुक्ति’ की राह पर निकल पड़े हैं. विवादों में घिरने के बाद चंपत राय ने अयोध्या में ही रहकर अपने जीवन का पहला चातुर्मास करने जा रहे हैं. 25 जुलाई से 21 नवंबर तक वे रामलला की शरण में रहकर कठोर तपस्या, मंत्र जाप और रामचरितमानस का पाठ करेंगे. वह 23 जून से ही एकांतवास में चले गए हैं.
चंपत राय कहां हैं. (फाइल फोटो)
Champat Rai News: अयोध्या से राम भक्तों के लिए बीते कुछ दिन किसी झटके से कम नहीं रहे हैं. राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी के मामले ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया. जिन हाथों में रामलला के खजाने की देखरेख की जिम्मेदारी थी, जब उन पर ही गंभीर सवाल उठे तो बवाल मचना तय था. इस भयंकर विवाद के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की कुर्सी तो चली गई. कंलक लगे सो अलग. इस्तीफे और राम जन्मभूमि ट्रस्ट की 6 जुलाई वाली बैठक के बाद उनकी चर्चा कम हो गई है, क्योंकि वे इस्तीफा देकर खुद को मुख्य धारा से अलग कर लिया है. हालांकि, दान चोरी के बाद उनपर तमाम इल्जाम लगते रहे, उन्होंने भी स्वीकार किया कि गलती तो हुई है. मगर अब सवाल खड़ा होता है कि वे फिलहाल कहां हैं? क्या वे अयोध्या छोड़ दिए हैं, आखिर चंपत राय कर क्या रहे हैं? चलिए जानते हैं कि चंपत राय कहां हैं और क्या कर रहे हैं?
चंपत राय अब ‘कलंक मुक्ति’ की राह पर निकल पड़े हैं. खबर है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में बुरी तरह घिरने के बाद चंपत राय ने अपने जीवन का पहला ‘चातुर्मास’ अयोध्या में ही करने का अहम निर्णय लिया है. बताया जा रहा है कि वे 25 जुलाई से शुरू होकर 21 नवंबर (देवउठनी एकादशी) तक चलने वाले इस चार महीने के कालखंड (चातुर्मास) करेंगे. तब तक वह अयोध्या की सीमा नहीं छोड़ेंगे. अब वह पूरी तरह से रामलला की शरण में रहकर साधना, मंत्र जाप और रामचरितमानस का नियमित पाठ करेंगे. इसके साथ ही वे पूर्ण रूप से सात्विक जीवनचर्या का पालन करेंगे.
एकांतवास में बीत रहे दिन
जानकारी के मुताबिक, अपनी कुर्सी गंवाने और विवादों के बाद चंपत राय 23 जून से ही राम मंदिर से सटे रामकोट स्थित तीर्थ क्षेत्र भवन में एक तरह से एकांतवास में चले गए हैं. बताया जा रहा है कि वह प्रतिदिन लगभग चार घंटे तक कड़ी साधना करते हैं. सुबह-सुबह राम मंत्र का जाप और रामचरितमानस का पाठ उनकी नई दिनचर्या का मुख्य हिस्सा बन गया है. वहीं, शाम के वक्त वह बेहद सीमित और गिने-चुने लोगों से ही मुलाकात कर रहे हैं.
क्या यह ‘कलंक’ से मुक्ति का प्रयास है?
हिंदू धर्म में यह मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान एक ही स्थान पर रहकर जप, तप, दान, व्रत और भगवान की आराधना करने से व्यक्ति अपने दोषों का परिमार्जन करता है, उसे मानसिक शांति प्राप्त होती है और वह आध्यात्मिक उन्नति की ओर बढ़ता है. क्या यह एकांतवास और तपस्या उस कलंक से मुक्ति पाने की साधना है?
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें