बूंद-बूंद सिंचाई से बढ़ेगी किसानों की आमदनी, सरकार भी दे रही है भारी सब्सिडी
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Drip Irrigation Benefits: खेती में पानी की बढ़ती किल्लत और गहराते जल संकट के बीच अब उत्तर प्रदेश के किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक तकनीकों को अपना रहे हैं. गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान अक्षैबर सिंह ने ‘लोकल 18’ से खास बातचीत में ड्रिप सिंचाई (बूंद-बूंद सिंचाई) तकनीक को आधुनिक खेती का भविष्य बताया है. उनका मानना है कि इस तकनीक से न सिर्फ 40 से 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, बल्कि फसल की गुणवत्ता और पैदावार में भी भारी इजाफा होता है. आइए जानते हैं कि यह तकनीक किस तरह किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है.
Drip Irrigation Benefits: खेती में पानी की बढ़ती जरूरत और जल संकट को देखते हुए किसान अब आधुनिक सिंचाई तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं. इनमें ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation) एक ऐसी तकनीक है, जो कम पानी में फसलों को बेहतर सिंचाई उपलब्ध कराती है. इस विधि को ‘बूंद-बूंद सिंचाई’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें पानी सीधे पौधों की जड़ों तक बूंदों के रूप में पहुंचाया जाता है.
कैसे काम करती है यह प्रणाली?
लोकल 18 से बातचीत के दौरान प्रगतिशील किसान अक्षैबर सिंह बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पाइप और छोटे-छोटे ड्रिपर लगाए जाते हैं. इनकी मदद से पानी धीरे-धीरे और नियंत्रित मात्रा में पौधों की जड़ों तक पहुंचता है. इससे पानी की बर्बादी नहीं होती और फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलती रहती है.
70 प्रतिशत तक पानी की बचत
अक्षैबर सिंह के अनुसार, ड्रिप सिंचाई का सबसे बड़ा फायदा पानी की बचत है. पारंपरिक सिंचाई की तुलना में इस तकनीक से 40 से 70 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है. यही कारण है कि कम पानी वाले क्षेत्रों में यह तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है.
बेहतर पैदावार और पोषक तत्वों की सीधी पहुंच
ड्रिप सिंचाई से फसल की पैदावार में भी सुधार देखने को मिलता है. क्योंकि पौधों को नियमित रूप से सही मात्रा में पानी मिलता है, जिससे उनकी वृद्धि अच्छी होती है. इसके साथ ही, पौधों को खाद भी पानी के साथ आसानी से दी जा सकती है, जिससे पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचते हैं.
खरपतवार से मुक्ति और लागत में कमी
इस तकनीक का एक और बड़ा लाभ यह है कि खेत में खरपतवार (अनावश्यक घास-फूस) कम उगते हैं. चूंकि पानी केवल पौधों की जड़ों के पास दिया जाता है, इसलिए पूरे खेत में नमी नहीं फैलती और अनावश्यक घास-फूस कम निकलती है. इसके अलावा, ड्रिप सिंचाई से किसानों का समय और श्रम भी बचता है. एक बार सिस्टम लगाने के बाद सिंचाई का काम काफी आसान हो जाता है. किसान कम मेहनत में अधिक क्षेत्र की सिंचाई कर सकते हैं.
इन फसलों के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी
फल, सब्जियां, गन्ना, बागवानी फसलें और फूलों की खेती में ड्रिप सिंचाई विशेष रूप से लाभकारी मानी जाती है. आम, अमरूद, पपीता, केला और टमाटर जैसी फसलों में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ
सरकार भी किसानों को ड्रिप सिंचाई अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. कई योजनाओं के तहत इस प्रणाली को लगाने पर अनुदान (सब्सिडी) की सुविधा दी जाती है, जिससे किसानों पर आर्थिक बोझ कम पड़ता है. अक्षैबर सिंह बताते हैं कि ड्रिप सिंचाई आधुनिक खेती की एक प्रभावी तकनीक है. यह पानी की बचत करने के साथ-साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करती है. ऐसे में किसान इस तकनीक को अपनाकर खेती को अधिक लाभदायक बना सकते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें