भदोही की कालीन के साथ अब बहराइच की हस्तनिर्मित दरी मशहूर, शकुंतला देवी ऐसे करती हैं तैयार
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शकुंतला देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और दरी बनाने का काम शुरू किया. तब इन्होंने देखा कि पहले व्यापारी को कपड़े और पैसे देने पड़ते थे. तब व्यापारी बन कर ला कर देते थे. इन्होंने जानकारी जुटा कर खुद से बनाने को सोचा और फिर ट्रेनिंग लेकर खुद से बनाना शुरू कर दिया. अब सीतापुर, लखनऊ या अन्य बड़ी-बड़ी जगह पर जहां पर कपड़े की फैक्ट्रियां लगी हुई है वहां से निकलने वाली कतरन वेस्टेज को यह कम कीमत पर खरीद लेती हैं और फिर अपने हाथों से धागे से बीनकर बड़ी-बड़ी दरी बनाकर तैयार करती हैं.
बहराइच: उत्तर प्रदेश के भदोही को भारत की कालीन नगरी कहा जाता है. यहां की कालीन की मांग भारत समेत कई देशों में है, लेकिन अब यूपी के बहराइच जिले की दरी भी धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रही है. जिसको बहराइच में महिलाएं बनाकर नई पहचान दिलाने का काम कर रही है. हस्त निर्मित यह दरिया, मजबूत और टिकाऊ होती है.
बहराइच जिले के रिसिया क्षेत्र के परसा खरगमा गांव की रहने वाली शकुंतला देवी एक वक्त ऐसा था जब भदोही की कालीन और दरी के बारे में यह सुना करती थी. तब इन्होंने सोचा क्यों ना समूह से जुड़ा जाए और समूह से जुड़कर दरी का काम किया जाए समूह से जुड़ी यूट्यूब पर वीडियो देखा और फिर शुरू कर दिया. दरी के काम से अब जिले में खूब डिमांड हो रही है.
हस्त निर्मित इन दरियो की खूब मांग
शकुंतला देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी और दरी बनाने का काम शुरू किया. तब इन्होंने देखा कि पहले व्यापारी को कपड़े और पैसे देने पड़ते थे. तब व्यापारी बन कर ला कर देते थे. इन्होंने जानकारी जुटा कर खुद से बनाने को सोचा और फिर ट्रेनिंग लेकर खुद से बनाना शुरू कर दिया. अब सीतापुर, लखनऊ या अन्य बड़ी-बड़ी जगह पर जहां पर कपड़े की फैक्ट्रियां लगी हुई है वहां से निकलने वाली कतरन वेस्टेज को यह कम कीमत पर खरीद लेती हैं और फिर अपने हाथों से धागे से बीनकर बड़ी-बड़ी दरी बनाकर तैयार करती हैं.
जिसमें बेड साइज की, सिंगल बेड और भी बहुत कुछ बनाती है. जिसकी शुरुआती कीमत ₹100 से लगाकर हजारों रुपए तक होती है और यह टिकाऊ भी होती हैं. इसके अलावा इनको बिछाने पर शरीर में कोई एलर्जी भी नहीं होती है. शकुंतला देवी का यह काम अब खूब फल फूल रहा है और बहराइच जिले समेत अन्य जिले में भी इनका खूब नाम हो रहा है. यहां तक की कई बार इनको सम्मानित भी किया जा चुका है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें