भीतर जिमीकंद, ऊपर करेला…गोंडा की ये महिला किसान 1 खेत से काट रही 2-2 फसलें, जानिए ट्रिक
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Intercropping Benefit : गोंडा की एक महिला किसान एक ही खेत में करेले के साथ जिमीकंद की खेती कर रही हैं. लोकल 18 से नेल्सा बताती हैं कि पहले वह सामान्य तरीके से खेती करती थीं, लेकिन बढ़ती लागत और कम आमदनी के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया. इसका उन्हें अच्छा नतीजा मिला. नेल्सा के मुताबिक, उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है. उसके बाद शादी हो गई. हाउसवाइफ बनने के बाद उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे पैसा भी आता रहे और घर का भी कामकाज होता रहे. इस समय उन्होंने मचान पर एक बीघे में करेला और जिमीकंद लगाया हुआ है.
गोंडा. जहां चाह, वहां राह. यूपी के गोंडा जिले के विकासखंड झंझरी की एक महिला किसान सहफसली खेती अपनाकर तगड़ी कमाई कर रही हैं. उन्होंने करेले के साथ जिमीकंद की खेती शुरू की है, जिससे उन्हें एक ही खेत से दो फसलों का लाभ मिल रहा है. इस नई खेती पद्धति से उनकी आय बढ़ी है और अब वह हर साल अच्छा मुनाफा कमा रही हैं. लोकल 18 से प्रगतिशील महिला किसान नेल्सा ने बताया कि पहले वह सामान्य तरीके से खेती करती थीं, लेकिन बढ़ती लागत और कम आमदनी के कारण उन्होंने कुछ नया करने का फैसला किया. कृषि विशेषज्ञ और पानी संस्थान की सलाह पर उन्होंने करेले के साथ जिमीकंद की सहफसली खेती शुरू की. इसका उन्हें अच्छा परिणाम मिला.
कहां से मिला आइडिया
नेल्सा बताती हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की. उसके बाद उनकी शादी हो गई और वह हाउसवाइफ थीं. फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न कुछ ऐसा किया जाए जिससे पैसा भी आता रहे और घर का भी कामकाज होता रहे. फिर उन्होंने खेती किसानी करना शुरू की. पहले वह पारंपरिक तरीके से खेती करती थीं. फिर उनको पानी संस्थान के कुछ लोगों ने आकर बताया कि यदि आप मचान विधि से सब्जी की खेती करेंगे तो आपको डबल फायदा होगा. आप नीचे भी खाली जमीन में दूसरी फसल कर सकती हैं, फिर उन्होंने मचान पर एक बीघे में करेला और जिमीकंद लगाया.
जल्दी जाती है तैयार
नेल्सा ने बताया कि करेले की फसल जल्दी तैयार होकर बाजार में बिक जाती है, जबकि जिमीकंद की फसल बाद में तैयार होती है. इससे पूरे सीजन में आय का स्रोत बना रहता है. दोनों फसलों की खेती एक ही खेत में होने से जमीन का बेहतर उपयोग होता है और अतिरिक्त खर्च भी कम लगता है. नेल्सा के अनुसार, करेले की बेलों को सहारा देकर उगाया जाता है, जबकि जिमीकंद जमीन के अंदर तैयार होता है. इसलिए दोनों फसलें एक-दूसरे की वृद्धि में बाधा नहीं बनतीं.
एक बीघा में कितनी लागत
नेल्सा बताती हैं कि एक बीघा में लगभग 5 से 6 हजार रुपये की लागत लगी है. अगर मार्केट का रेट अच्छा रहा और फसल उत्पादन अच्छी हुई तो अच्छी खासी इनकम होने की उम्मीद रहती है. बाजार में करेले और जिमीकंद दोनों की अच्छी मांग रहती है. सही देखभाल, समय पर सिंचाई और संतुलित खाद के उपयोग से बेहतर उत्पादन मिलता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…
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