‘मॉडिफाइड स्क्रीन, ₹40000 दाम…’ SSC में जैमर की गच्चा देने का निंजा टेक्निक
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SSC Exam Hacker: एसएससी द्वारा आयोजित पैरामिलिट्री फोर्स ऑनलाइन परीक्षा में धांधली का भंडाफोड़ हो गया है. यूपी एसटीएफ ने एक फरार आरोपी को अलवर से गिरफ्तार किया है. आरोपी लोकेश के पास से 92 मॉडिफाइड टीएफटी (TFT) स्क्रीन बरामद हुई हैं, जिनका प्रयोग परीक्षा वाले स्क्रीनों पर लगाता था और हाईटेक वाई-फाई डोंगल के जरिए जैमर को चकमा देकर बाहर बैठे सॉल्वर से पेपर हल करवाता था.
एसएससी की परीक्षा में नकल कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़. टेक्निक के जरिए कराते थे चोरी.
SSC Exam Hacker: कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) द्वारा आयोजित पैरामिलिट्री फोर्स की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली वाले गिरोह पर यूपी एसटीएफ (STF) ने भंडाफोड़ किया है. एसटीएफ की टीम ने पहले भी जेल भेजे गए इस सॉल्वर गैंग के फरार आरोपी लोकेश को राजस्थान के अलवर से गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी के पास से ऐसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं, जिनका इस्तेमाल कर परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाई जा रही थी.
एसटीएफ ने आरोपी लोकेश के पास से परीक्षा में चोरी कराने वाले उपकरण मिले. पुलिस ने सभी जब्त उपकरणों की डिटेल शेयर की है. बताया जा रहा है इन टीएफटी की मदद से परीक्षा में इतनी सफाई से नकल कराते थे कि किसी को शक नहीं होता था. दरअसल, इनकी परीक्षा केंद्र से मिली भगत होती थी. पुलिस ने बताया कि आरोपी के पास से कुल 92 टीएफटी (TFT) स्क्रीन मिलीं हैं. यहां देखिए डिटेल-
- 63 स्क्रीन में रेसबेरी-पाई (Raspberry Pi) सॉफ्टवेयर और डिवाइस पूरी तरह से इंस्टॉल मिले.
- 20 टीएफटी स्क्रीन तैयार हालत में मिलीं.
- 9 स्क्रीन अधबनी (Semi-finished) स्थिति में बरामद हुई हैं.
कैसे होती थी डिजिटल नकल?
पूछताछ में इस गिरोह के काम करने का बेहद चौंकाने वाला और हाईटेक तरीका सामने आया है. परीक्षा केंद्रों के संचालकों से मिलीभगत करके वहां के असली कंप्यूटर मॉनिटर की जगह इन मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीनों को रख दिया जाता था. इसके बाद इन स्क्रीनों को वाई-फाई डोंगल के जरिए परीक्षा केंद्र के बाहर मौजूद किसी अन्य सिस्टम (कम्प्यूटर या लैपटॉप) पर लाइव स्ट्रीम कर लिया जाता था. बाहर सुरक्षित जगह पर बैठा ‘सॉल्वर’ आसानी से स्क्रीन देखकर पूरा प्रश्न पत्र हल कर देता था.
इसे एग्जाम सेंटर के कंप्यूटर पर लगा कर नकल कराते थे.
जैमर को ऐसे देते थे चकमा
आमतौर पर परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के लिए इंटरनेट और नेटवर्क जैमर लगाए जाते हैं. लेकिन यह गिरोह इतना शातिर था कि वे ऐसे हाईटेक राउटर और वाई-फाई डोंगल का इस्तेमाल करते थे, जो परीक्षा केंद्र पर लगे जैमर की बैंडविथ (Bandwidth) से बाहर काम करते थे. इसके चलते जैमर इन उपकरणों के सिग्नल को ब्लॉक नहीं कर पाते थे.
45 हजार रुपये में तैयार होती थी एक स्क्रीन
आरोपी लोकेश ने खुलासा किया कि वह नकल माफियाओं को एक मॉडिफाइड टीएफटी स्क्रीन 40 हज़ार रुपये में बेचता था. इसके अलावा, स्क्रीन के अंदर ‘रसबेरीपाई’ सिस्टम इंस्टॉल करने के लिए वह 5 हज़ार रुपये का अतिरिक्त चार्ज लेता था. लोकेश ही वह मुख्य शख्स था जो ग्रेटर नोएडा के परीक्षा सेंटर को ये स्क्रीन सप्लाई कर रहा था.
इस प्रयोग हाल ही में पैरामिलिट्री फोर्स की ऑनलाइन परीक्षा में धांधली कराने के लिए किया गया था.
मई में पकड़े गए थे 8 आरोपी
गौरतलब है कि एसटीएफ ने बीते 22 मई को इस बड़े नेक्सस का भंडाफोड़ किया था. ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क स्थित ‘बालाजी डिजिटल जोन’ में इस ऑनलाइन नकल के सेंटर को चलाया जा रहा था. एसटीएफ ने तब वहां छापेमारी कर गिरोह से जुड़े 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था. लोकेश उस समय से फरार चल रहा था, जिसे अब एसटीएफ ने धर दबोचा है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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