मंदिर का प्रबंधन पारदर्शी बनाए रखना चुनौती, नृपेंद मिश्रा का बड़ा बयान
अयोध्या:
अयोध्या. राम मंदिर में कथित दान चोरी के मुद्दे पर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने News18 से विशेष बातचीत की. उन्होंने कहा कि मंदिर प्रबंधन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखना है. उन्होंने माना कि मंदिर से जुड़े किसी भी विवाद से उन सभी लोगों को दुख होता है, जो वर्षों से इसकी सेवा और निर्माण कार्य से जुड़े रहे हैं.
उन्होंने कहा कि राम मंदिर अब केवल अयोध्या या उत्तर प्रदेश का मंदिर नहीं रह गया है, बल्कि यह सनातन धर्म का अंतरराष्ट्रीय प्रतीक बन चुका है. ऐसे में यहां की व्यवस्थाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर की होनी चाहिए.
राम मंदिर में चढ़ावे को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ है, क्या इससे आपको दुख हुआ?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि स्वाभाविक रूप से दुख होता है. यदि किसी प्रकार का विवाद मंदिर के प्रबंधन से जुड़ जाता है तो मंदिर की सेवा से जुड़े सभी लोगों को पीड़ा होती है. सबसे बड़ी चुनौती यह है कि दर्शनार्थियों को विश्वास हो कि मंदिर का संचालन स्वस्थ परंपराओं और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है.
क्या इससे पहले भी ट्रस्ट के सामने ऐसी चुनौतियां आई हैं?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि लगभग दो वर्ष पहले भूमि खरीद को लेकर भी विवाद सामने आया था. उस समय ट्रस्ट की बैठकों में इस विषय पर चर्चा हुई और एक तीन सदस्यीय समिति बनाई गई थी. समिति का उद्देश्य भविष्य में भूमि खरीद की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाना था. वह घटना हमारे लिए एक चेतावनी की तरह थी कि यदि समय रहते श्रद्धालुओं को सही जानकारी नहीं दी गई तो भविष्य में कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं.
मौजूदा मामले की जांच एसआईटी कर रही है, इस पर आपका क्या कहना है?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि एसआईटी गठित हो चुकी है और वह अपनी जांच कर रही है. मुझे विश्वास है कि जांच एजेंसी निष्पक्ष रिपोर्ट देगी. इस समय मैं किसी प्रकार का सुझाव देकर जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करना चाहता. सोशल मीडिया पर यह सवाल उठ रहा है कि एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई, लेकिन एसआईटी के पास प्रारंभिक जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है. इसलिए जांच पूरी होने का इंतजार किया जाना चाहिए.
आपके मन में क्या ऐसे सुझाव हैं, जिनसे भविष्य में विवादों की संभावना कम हो सकती है?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि कुछ सुझाव मेरे मन में हैं, लेकिन अभी मैं केवल एक महत्वपूर्ण सुझाव साझा करना चाहूंगा. राम मंदिर अब केवल अयोध्या, पूर्वी उत्तर प्रदेश या बिहार क्षेत्र तक सीमित नहीं है. यह आज दुनिया भर के सनातन श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बन चुका है. इसलिए यहां का प्रबंधन देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों से भी बेहतर और अधिक व्यवस्थित होना चाहिए.
अंतरराष्ट्रीय स्तर के मंदिर के अनुरूप प्रबंधन के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं?
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मेरे विचार से सबसे पहले एक अनुभवी और पेशेवर अधिकारी की नियुक्ति होनी चाहिए, जो मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कार्य करे. वह ट्रस्ट के समग्र नियंत्रण में रहे, लेकिन दैनिक प्रबंधन के लिए उसे पर्याप्त स्वतंत्रता भी मिले. बिना समय गंवाए ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए.
नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि आज 71 एकड़ के विशाल परिसर में प्रतिदिन लगभग एक लाख श्रद्धालु आते हैं. उनकी सुविधाएं, सुरक्षा, व्यवस्थाएं और अन्य आवश्यकताएं संभालना कोई छोटा काम नहीं है. यह किसी छोटे जिले के प्रशासन के संचालन जैसा बड़ा दायित्व है. इसलिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार को भी इस दिशा में आवश्यक निर्णय लेने चाहिए.