मथुरा के इस मंदिर में मगरमच्छ और हाथी का युद्ध देखने उमड़ा सैलाब, नहा रहे गजराज को खींचने लगा शैतान
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Mathura News : गरुण पर विराजमान भगवान रंगनाथ की जय जयकार से मंदिर परिसर गूंज उठा. रंगनाथ मंदिर में मगरमच्छ और हाथी का युद्ध देखने को मिला. इस युद्ध को देखने के लिए इस बार हजारों लोग जुटे.
मथुरा. वृंदावन मंदिरों की नगरी है. यहां मंदिरों में आयोजन लगातार होते रहते हैं. एक ऐसा ही विशालतम मंदिर दक्षिण भारत शैली का है, जो रंगनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. यह मंदिर अपनी संस्कृति और शैली के लिए विश्व विख्यात है. यहां आने वाले भक्त इसकी शैली के साथ-साथ इस पर की गई कलाकारी को देखकर इसकी ओर खिंचे चले आते हैं. पिछले दिनों रंगनाथ मंदिर में मगरमच्छ और हाथी का युद्ध देखने को मिला. इस युद्ध को देखने के लिए लोग उत्साहित नजर आए. रंगनाथ मंदिर में गज ग्राह लीला का भव्य मंचन किया गया.
सतयुग से कनेक्शन
मंचन के दौरान गरुण पर विराजमान भगवान रंगनाथ की जय जयकार से मंदिर परिसर गूंज उठा. गज ग्रह लीला से जुड़ी कई कहानियां हैं. मान्यता है कि सतयुग में एक बार जलाशय में स्नान कर रहे गज (हाथी) को ग्राह (मगरमच्छ) ने पकड़ लिया और अंदर खींचने लगा. काफी प्रयास के बाद भी गज ग्राह की पकड़ से मुक्त नहीं हो पाया तो आर्तस्वर से भगवान रंगनाथ को पुकारा. अपने भक्त की कातर ध्वनि सुनकर भगवान रंगनाथ बिना चरण पादुका धारण किए गरुण पर सवार होकर आए और सुदर्शन चक्र से ग्राह का वध कर उसे मोक्ष प्रदान किया. मंदिर प्रबंधन की ओर से भगवान और भक्त के इस संबंध की रक्षा का प्रदर्शन करने वाली इस लीला को हर साल मंचित किया जाता है. हाथी और मगरमच्छ के इस युद्ध को देखने के लिए इस बार हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए.
सदियों पुराना
रंगनाथ भगवान के मंदिर प्रांगण में बना हुआ तलाब उस लीला का साक्षी है. सरोवर में हाथी और मगरमच्छ के युद्ध को देखकर लोग आश्चर्यचकित थे. इस लीला का आयोजन प्रतिवर्ष भगवान रंगनाथ मंदिर में किया जाता है. सदियों पुरानी यह परंपरा दक्षिण भारत शैली के इस मंदिर में चली आ रही है. आज भी इस परंपरा का निर्वहन मंदिर से जुड़े हुए पुजारी और प्रशासन के लोग करते हैं. लोकल 18 से बातचीत में मंदिर के पदाधिकारी ने बताया कि इस लीला को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. हर वर्ष इस लीला का आयोजन किया जाता है.
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