महराजगंज के इस क्षेत्र की गजब है कहानी, जंगलों को काटकर राजा ने बनाया अपना राज्य

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महराजगंज के इस क्षेत्र की गजब है कहानी, जंगलों को काटकर राजा ने बनाया अपना राज्य


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Maharajganj Latest News: महराजगंज जिले के सबसे प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों में से एक माना जाता है. जिले के चौक क्षेत्र में स्थित रामग्राम जो हमेशा चर्चा में बना रहता है. इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी बहुत सी दिलचस्प कहानियां आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहती हैं. इस प्राचीन ऐतिहासिक क्षेत्र से जुड़ी कहानियां इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं.

महराजगंज: उत्तर प्रदेश का महराजगंज जिला ऐतिहासिक रूप से बहुत ही समृद्धि जिला है. अपने ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ महराजगंज अपने खास भौगोलिक स्थिति के लिए भी जाना जाता है. पड़ोसी देश नेपाल के साथ सीमा साझा करने वाला यह जिला वन संपदा से भी समृद्ध है. जिले के अलग-अलग हिस्सों में बहुत से धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल मौजूद है. जिनकी अपनी खास मान्यताएं हैं.

महराजगंज जिले के सबसे प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों में से एक माना जाता है. जिले के चौक क्षेत्र में स्थित रामग्राम जो हमेशा चर्चा में बना रहता है. इस ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी बहुत सी दिलचस्प कहानियां आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय रहती हैं. इस प्राचीन ऐतिहासिक क्षेत्र से जुड़ी कहानियां इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं. जो कई पीढ़ियों से चलती चली आ रही हैं. इसे लेकर बहुत सी स्थानीय लोक कहानियां भी प्रचलित है जो इसे प्राचीन बौद्ध काल से जोड़ती हैं. वर्तमान समय में भी यह ऐतिहासिक स्थल जिले के चौक क्षेत्र के जंगलों के बीच मौजूद है. जिसको इतिहास की घटनाओं से संबंध माना जाता है.

कुष्ठ रोग के उपचार के लिए यहां आए थे राजा रामचंद्र
महराजगंज जिले के लोकप्रिय लेखक डॉ परशुराम गुप्त बताते हैं कि इस प्राचीन इतिहास इसके पीछे एक पुरानी कहानी है. भगवान गौतम बुद्ध के काल से भी पहले जो शाक्य राजकुमार और राजकुमारी थे उनका निर्वासन हुआ था. इसके साथ ही इसी समय काशी के जो राजा रामचंद्र थे उनको कुष्ठ रोग हुआ था. उस समय राजा रामचंद्र भी कुष्ठ (कोढ़ रोग) का उपचार कराने के लिए इस क्षेत्र में आए थे. शाक्यों के राजकुमार और राजकुमारी में जो बड़ी राजकुमारी थी वह भी कुष्ठ रोग से ग्रसित थी. ऐसे में दोनों ही लोगों का उपचार एक ही आश्रम में हुआ. बेहद खास बात है कि जिस समय कुष्ठ रोग का इलाज दोनों का हुआ, उस समय जो राजा राम थे उन्होंने कोल के वृक्षों को काटकर इस स्थान पर अपने नाम से एक राजधानी का निर्माण किया. जिसे रामग्राम के नाम से जाना जाता है. राजा राम की सोलह जुड़वा संतान पैदा हुई. इसके साथ ही उनके सोलह जुड़वा संतानों से ही कोलिय की उत्पत्ति हुई है.

इस क्षेत्र में कठजमुनिया के पेड़ो की संख्या बहुत थी
समय बीतता गया और राजा राम ने अपने सोलह जुड़वा संतानों में अपना पूरा क्षेत्र जो उनके राज्य का पूरा क्षेत्र था उसको बांट दिया था. इस तरह से राजा राम इतिहास में यहां आएं और यहां पर उन्होंने अपने नाम से एक राजधानी का निर्माण किया. जिसे रामग्राम के रूप में जाना जाता है. तत्कालीन समय में कोल के वृक्ष यानी कि जो कठजमुनिया है. वह काफी बड़ी मात्रा में यहां पर पहले थे. हालांकि आज के समय में भी काफी बड़ी मात्रा में कोल के वृक्ष इस क्षेत्र में पाए जाते हैं. तत्कालीन समय में यहां के लोगों को कोलिय कहा गया और वह लोग राजा राम के जो वंशज थे. आज के समय में महराजगंज जिले का यह क्षेत्र एक बड़ा ऐतिहासिक पर्यटन स्थल के रूप में जाना जाता है. इसके साथ ही इस क्षेत्र को विकसित करने के लिए भी स्थानीय प्रशासन भी लगातार कार्य कर रही है.

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Abhijeet Chauhan

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल और हरियाणा की पॉलिटिक्स और क्राइम खबरों में रुचि. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने मे…और पढ़ें



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