मेरठ में नगली गांव की महिलाएं मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग लेकर बन रहीं आत्मनिर्भर

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मेरठ में नगली गांव की महिलाएं मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग लेकर बन रहीं आत्मनिर्भर


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मेरठ के नगली गांव में 50 से ज्यादा महिलाएं मूर्ति बनाने की ट्रेनिंग लेकर स्टार्टअप शुरू कर रही हैं, लाखों का टर्नओवर, अक्ष एजुकेशन सोसाइटी छह माह मॉनीटरिंग करती है.मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण हासिल कर रही बबीता ने बताया की मूर्तियों का बिजनेस काफी बेहतर विकल्प है. उन्होंने बताया कि उनके ही गांव के पास की महिलाओं ने मूर्ति बनाने से संबंधित प्रशिक्षण हासिल करने की पश्चात अपने कारोबार की शुरुआत की. जिसमें कि आप उनके साथ 10 से अधिक महिलाएं कार्य कर रही है. जिनका सालाना लाखों रुपए का टर्नओवर है.

मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ में अब स्टार्टअप के प्रति महिलाओं में काफी रुझान देखने को मिल रहा है. इसलिए वह विभिन्न प्रकार की प्रशिक्षण हासिल करने के पश्चात बिजनेस की तरफ कदम बढ़ाते हुए दिखाई दे रही है. कुछ इसी तरह का नजारा मेरठ के नगली गांव में भी देखने को मिल रहा है. जहां महिलाएं विभिन्न प्रकार की मूर्तियां बनाते हुए अपने बेहतर भविष्य की तलाश कर रही है.

बिजनेस के लिए अच्छा आईडिया है मूर्तियां

लोकल 18 से बातचीत करते हुए मूर्तियां बनाने का प्रशिक्षण हासिल कर रही बबीता ने बताया की मूर्तियों का बिजनेस काफी बेहतर विकल्प है. उन्होंने बताया कि उनके ही गांव के पास की महिलाओं ने मूर्ति बनाने से संबंधित प्रशिक्षण हासिल करने की पश्चात अपने कारोबार की शुरुआत की. जिसमें कि आप उनके साथ 10 से अधिक महिलाएं कार्य कर रही है. जिनका सालाना लाखों रुपए का टर्नओवर है. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने भी अपने गांव की महिलाओं से बातचीत करते हुए मूर्ति बनाने के प्रशिक्षण हासिल करने के लिए निर्णय लिया. वर्तमान समय में 50 से अधिक महिलाएं प्रशिक्षण हासिल कर रही हैं.

घर का काम निपटा कर लेती है प्रशिक्षण

इसी तरह से संजना ने बताया कि अगर कहीं भी नौकरी करते हैं. तो लगभग 8 घंटे समय देना पड़ता है. लेकिन घर के दायित्व के कारण वह बाहर नौकरी नहीं कर पा रही है. ऐसे में उन्होंने भी यह प्रशिक्षण हासिल करने का निर्णय लिया. वह बताती है घर का सारा काम करने के पश्चात वह प्रशिक्षण हासिल कर रही है. साथ ही प्रशिक्षण हासिल करते-करते अब उन्हें अर्निंग भी होने लगी है. क्योंकि वह खुद विभिन्न प्रकार की मूर्तियां अच्छे से तैयार कर लेती है. जिनकी बाजार में काफी डिमांड है. उन्होंने कहा कि अगर इसी तरह से प्रत्येक महिला घर पर रहकर ही कुछ ना कुछ बिजनेस की शुरुआत करें. निश्चित तौर पर हम अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की तरफ ले जा सकते हैं. हिना ने बताया की मूर्ति को तैयार करने में मात्र 20 मिनट का समय लगता है.

6 महीने तक की जाती है मॉनीटरिंग

अक्ष एजुकेशन सोसाइटी के पदाधिकारी दीपक विकल्प ने बताया कि शासन के दिशा निर्देश अनुसार महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है. उन्होंने बताया कि इससे पहले भी महिलाओं को मूर्ति बनाने से संबंधित ट्रेनिंग उपलब्ध कराई गई थी. जिसमें कि सोनिया द्वारा समूह बनाकर एक बड़ा स्टार्टअप अपनाया है. जिसके माध्यम से वह सालाना लाखों रुपए का व्यापार कर रही है. उन्होंने बताया कि जो भी महिलाएं प्रशिक्षण हासिल करती है, उनकी 6 महीने तक मॉनिटरिंग की जाती है. साथ ही विभिन्न प्रकार के नेशनल, इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में स्टॉल भी लगवाए जाते हैं. ताकि बिजनेस की तरह कदम बढ़ा सके. बताते चलें कि घर के सजावट के लिए यह मूर्तियां काफी पसंद की जाती है. क्योंकि यह विभिन्न प्रकार की आकृतियों में बनी हुई होती है. जो घर की शोभा को बढ़ाते हैं.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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