यूट्यूब से मिला आइडिया! B.A पास किसान ने बदल दी सिंचाई की तकनीक… तगड़ी हो रही फसल, सरकार भी हुई फैन
Last Updated:
Benefits Of Drip Irrigation Method : गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान विनोद कुमार वर्मा पहले पारंपरिक विधि से सिंचाई करते थे. जिसमें खर्चा और पानी ज्यादा लगता था लेकिन एक दिन यूट्यूब देखते समय उन्हें सिंचाई की एक …और पढ़ें
हाइलाइट्स
- विनोद वर्मा ने यूट्यूब से टपक विधि सीखी.
- टपक विधि से गन्ने की खेती में बेहतर विकास हो रहा है.
- सरकार टपक विधि पर 80-90% सब्सिडी दे रही है.
गोंडा: उत्तर प्रदेश का गोंडा जिला गन्ने की खेती के लिए फेमस है. इस क्षेत्र में कई किसान गन्ने की खेती कर रहे हैं, लेकिन इनकी खेती की खास बात यह है कि वे टपक विधि से सिंचाई कर रहे हैं. इस विधि से सिंचाई करने से गन्ने का विकास काफी अच्छा होता है और खरपतवार भी नियंत्रित रहती हैं. पारंपरिक विधि से सिंचाई में पानी पूरे खेत में फैल जाता है, लेकिन टपक विधि में केवल गन्ने की जड़ों में पानी छोड़ा जाता है, जिससे गन्ने का विकास बेहतर होता है.
क्या है ड्रिप इरिगेशन?
ड्रिप इरिगेशन एक प्रकार की माईक्रो सिंचाई प्रणाली है, जिसमें पौधों की जड़ों तक पानी को धीरे-धीरे टपकाकर, या पाइप के सहारे मिट्टी की सतह के ऊपर से या सतह के नीचे दबाकर की जाती है.इस विधि से पानी और पैसे की बचत होती है. ड्रिप इरिगेशन प्रणाली का लक्ष्य पानी को सीधे जड़ क्षेत्र में डालना और वाष्पीकरण को कम करना है.
विनोद कुमार वर्मा बताते हैं कि उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की और उसके बाद खेती-किसानी शुरू की. इस समय वे गन्ने की खेती कर रहे हैं. टपक विधि सिंचाई का आइडिया उन्हें यूट्यूब पर देखकर आया. महाराष्ट्र में टपक विधि से खेती की जाती है और इससे पैदावार भी बढ़ती है. फिर उन्होंने सोचा कि क्यों न यहां भी टपक विधि अपनाई जाए. पानी संस्थान ने उन्हें उद्यान विभाग जाकर टपक विधि के बारे में जानकारी लेने की सलाह दी.
कैसे मिलेगी सब्सिडी?
विनोद कुमार वर्मा बताते हैं कि टपक विधि सिंचाई पर सरकार की तरफ से 80 से 90% तक की सब्सिडी दी जा रही है. सब्सिडी पाने के लिए उद्यान विभाग में संपर्क करें और अपनी खतौनी, बैंक पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड समेत सारे दस्तावेज लेकर जाएं. वहां से आपके खाते में 80 से 90% की सब्सिडी आ जाएगी.