यूपी में बसपा विधायक का निधन, रसड़ा सीट पर उपचुनाव होगा या 2027 तक रहेगी खाली?
Last Updated:
BSP MLA Umashankar Singh Death: उत्तर प्रदेश की राजनीति से एक बड़ी खबर सामने आई है. जहां बसपा के विधायक उमाशंकर सिंह का लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया. उमाशंकर सिंह यूपी में बसपा के इकलौते विधायक थे. अब उनके निधन के बाद क्या रसड़ा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होगा या फिर 2027 तक यह सीट खाली रहेगी.
विधायक उमाशंकर का निधन.
बलिया: बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. आखिर अब बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट का क्या होगा? क्या यहां फिर से चुनाव होगा या यह सीट 2027 के विधानसभा चुनाव तक खाली रहेगी?
उमाशंकर सिंह 2022 के विधानसभा चुनाव में रसड़ा सीट से जीते थे. उस चुनाव में बसपा पूरे उत्तर प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत पाई थी और वही पार्टी के इकलौते विधायक थे. अब उनके निधन के बाद विधानसभा में बसपा का एक भी विधायक नहीं बचा है.
अब रसड़ा सीट पर क्या होगा?
किसी विधायक की मौत हो जाए, इस्तीफा दे दे या उसकी सदस्यता खत्म हो जाए, तो उसकी सीट खाली मानी जाती है. ऐसी स्थिति में आमतौर पर उस सीट पर उपचुनाव कराया जाता है, ताकि जनता नया विधायक चुन सके. हालांकि हर खाली सीट पर उपचुनाव हो, ऐसा जरूरी नहीं है. नियम कहता है कि अगर विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने में एक साल से कम समय बचा हो, तो चुनाव आयोग चाहे तो उपचुनाव नहीं भी करा सकता है.
2027 चुनाव को देखते हुए क्या संभावना है?
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव मार्च 2027 के आसपास होना है. ऐसे में अब यह देखना होगा कि रसड़ा सीट कब आधिकारिक तौर पर खाली घोषित होती है और उस समय विधानसभा का कितना कार्यकाल बचा होता है. अगर चुनाव आयोग को लगता है कि अभी पर्याप्त समय बचा है, तो रसड़ा सीट पर उपचुनाव कराया जा सकता है. लेकिन अगर कार्यकाल पूरा होने में एक साल से कम समय बचता है, तो आयोग उपचुनाव नहीं कराने का भी फैसला ले सकता है. अंतिम फैसला चुनाव आयोग ही करेगा.
आगे क्या होगा?
सबसे पहले विधानसभा सचिवालय रसड़ा सीट को खाली घोषित करेगा. इसके बाद चुनाव आयोग तय करेगा कि यहां उपचुनाव कराया जाए या फिर जनता सीधे 2027 के विधानसभा चुनाव में नया विधायक चुने. यानी अब सभी की नजर चुनाव आयोग के फैसले पर रहेगी.
बसपा के लिए क्यों बड़ा झटका?
उमाशंकर सिंह सिर्फ विधायक नहीं थे, बल्कि पूर्वांचल में बसपा का सबसे मजबूत चेहरा माने जाते थे. उन्होंने 2012, 2017 और 2022 में लगातार रसड़ा सीट जीती. 2022 में जब बसपा पूरे प्रदेश में सिर्फ एक सीट जीत पाई, तब भी उन्होंने पार्टी की साख बचाए रखी. अब उनके निधन के बाद विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं बचा है. ऐसे में यह सिर्फ एक सीट खाली होने का मामला नहीं, बल्कि बसपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका भी माना जा रहा है.
About the Author

अभिजीत चौहान, News18 Hindi के डिजिटल विंग में सब-एडिटर हैं. वर्तमान में अभिजीत उत्तर प्रदेश की राजनीति, सामाजिक मुद्दों, क्राइम, ब्रेकिंग न्यूज और वायरल ख़बरें कवरेज कर रहे हैं. AAFT कॉलेज से पत्रकारिता की मास्…
और पढ़ें