ये जंबो मशीन खत्म कर देगी धान की पराली की टेंशन… खेत को बना देगी ‘खाद की फैक्ट्री’, बचेगा 100 KG पोटाश

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ये जंबो मशीन खत्म कर देगी धान की पराली की टेंशन… खेत को बना देगी ‘खाद की फैक्ट्री’, बचेगा 100 KG पोटाश


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Farming Tips : धान की पराली किसानों के लिए बड़ी समस्या बनती है, लेकिन अब मल्चर मशीन इस टेंशन को खत्म कर देगी. यह मशीन पराली को काटकर खेत में ही मिला देती है, जिससे खेत ‘खाद की फैक्ट्री’में बदल जाता है. इस जैविक खाद के कारण करीब 100 किलो पोटाश बचता है. इससे न सिर्फ मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, बल्कि खर्च भी कम होता है.

शाहजहांपुर : धान की कटाई के बाद पराली का निस्तारण एक बड़ी समस्या है, पराली को अगर खेतों में जलाया जाता है तो वातावरण को नुकसान होता है. इसके अलावा मिट्टी की उर्वरा शक्ति में भी गिरावट आती है, लेकिन किसान पराली निस्तारण के लिए मल्चर का इस्तेमाल कर सकते हैं. मल्चर से पराली को आसानी से खेत में ही निस्तारित किया जा सकता है, जो धीरे-धीरे सड़कर खाद में तब्दील हो जाएगी. किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी कम हो जाएगी.

मनकीरत एग्रो के मालिक और कृषि यंत्र एक्सपर्ट अवतार सिंह ने बताया कि मल्चर ट्रैक्टर-चलित कृषि यंत्र है, जिसे फसल के अवशेषों पराली, डंठल और ऊंची घास को बारीक टुकड़ों में काटने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. मल्चर को 45 हॉर्सपावर (HP) या उससे अधिक क्षमता वाले ट्रैक्टर से चलाया जा सकता सकता है. ट्रैक्टर के चलने पर, मल्चर के अंदर लगे तेज रोटर ब्लेड तेज़ी से घूमते हैं. जब ट्रैक्टर खेत में चलता है, तो ये घूमते हुए ब्लेड पराली और अन्य अवशेषों को बहुत छोटे टुकड़ों में काट देते हैं. कटे हुए ये बारीक टुकड़े खेत की मिट्टी की सतह पर समान रूप से फैल जाते हैं. उसके बाद किसान खेत की जुताई कर मिट्टी में मिला दें.

20 दिनों में बन जाएगी खाद
फसल अवशेष को मिट्टी में मिलने के बाद सिंचाई कर दें. खेत में पानी लगाने या नमी मिलने पर, ये अवशेष 15 से 20 दिनों में सड़कर खाद में तब्दील हो जाएंगे. इससे अगली फसल के लिए कम खाद और पानी की जरूरत होगी, जिससे किसानों की लागत भी कम होती है और मृदा स्वास्थ्य में सुधार आता है.

मल्चर चलाने के फायदे 
पराली जलाने से मिट्टी के मित्र कीट मर जाते हैं और ज़मीन की नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व भी नष्ट हो जाते हैं. मल्चर इसका सबसे प्रभावी समाधान है. मल्चर अवशेषों को मिट्टी की ऊपरी परत में बारीक रूप में मिला देता है, जो नमी मिलने पर जल्द ही खाद में बदल जाता है. 1 टन पराली से लगभग 60-100 किग्रा पोटाश और 20-30 किग्रा नाइट्रोजन मिलती है.

मृत्‍युंजय बघेल

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु…और पढ़ें

मीडिया फील्ड में 5 साल से अधिक समय से सक्रिय. वर्तमान में News-18 हिंदी में कार्यरत. 2020 के बिहार चुनाव से पत्रकारिता की शुरुआत की. फिर यूपी, उत्तराखंड, बिहार में रिपोर्टिंग के बाद अब डेस्क में काम करने का अनु… और पढ़ें

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ये जंबो मशीन खत्म कर देगी पराली की टेंशन… खेत को बना देगी ‘खाद की फैक्ट्री’



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