सिर्फ भूख नहीं, ये हैं वो 5 वजहें जिनसे गर्मियों में कुत्ते हो जाते हैं खूंखार
गाजियाबाद: एक ओर जहां भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है, वहीं दूसरी ओर आवारा कुत्तों का आतंक शहरवासियों के लिए और बड़ी मुसीबत बन गया है. हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि जिला अस्पताल में रोजाना 300 से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं. इन पीड़ितों में छोटे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सभी शामिल हैं.
शहर के अलग-अलग इलाकों में सुबह और शाम के वक्त कुत्तों का झुंड देखा जा रहा है, जो राहगीरों पर अचानक हमला कर देता है. सबसे चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, कुत्तों का स्वभाव पहले से ज्यादा हिंसक और आक्रामक होता जा रहा है. अब आम सड़कों पर चलना भी लोगों को असुरक्षित महसूस होने लगा है.
गर्मी में क्यों उग्र हो जाते हैं कुत्ते?
जिला पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.पी. पांडेय के मुताबिक, गर्मियों में कुत्तों के स्वभाव में बदलाव आना आम बात है, लेकिन जब तापमान 45 डिग्री के पार चला जाता है, तो उनकी प्रतिक्रिया खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है.
लोगों की राय
स्थानीय निवासी ईशा और सुनीता देवी का कहना है कि, “गर्मियों में कुत्तों का व्यवहार बदल जाता है। वे अधिक आक्रामक हो जाते हैं, और इसी वजह से काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं. नगर निगम को इन जानवरों के लिए पानी और छांव की व्यवस्था करनी चाहिए.”
नगर निगम की ओर से भले ही कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. लोगों की मांग है कि निगम को इन कुत्तों की निगरानी और पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए ताकि आम लोग सुरक्षित महसूस कर सकें.
क्या करना चाहिए आम लोगों को?
पशु चिकित्सकों और प्रशासन की सलाह है कि लोग आवारा कुत्तों को बिल्कुल न छेड़ें, खासकर तब जब वे झुंड में हों. घर के बाहर बचा हुआ खाना फेंकने से बचें, क्योंकि इससे कुत्ते आसपास इकट्ठा हो सकते हैं. बच्चों को अकेले बाहर भेजने से पहले उन्हें सतर्क करें और कुत्तों से दूरी बनाए रखने की हिदायत दें. अगर किसी को कुत्ता काट ले, तो बिना देर किए तुरंत अस्पताल जाकर एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवाएं.