सीएम योगी ने 2 महीने में नाप डाली 100 विधानसभा, तो कहां हैं अखिलेश और मायावती
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UP Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर है. इधर इसे लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ गई है. जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मैदान में उतर चुके हैं, तो विपक्ष दूर-दूर तक दिखाई नहीं दे रहा है. ये बातें हवा में नहीं बल्कि आंकड़ों के आधार पर की जा रही है. उन्होंने बीते दो महीनों में 18 मंडलों का दौरा कर 100 से अधिक विधानसभा सीटों को कवर किया है. दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल मैदान में सुस्त नजर आ रहे हैं. सपा प्रमुख अखिलेश यादव की आखिरी रैली मार्च 2026 में हुई थी, जबकि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अक्टूबर 2025 के बाद कोई बड़ी जमीनी रैली नहीं की है.
सीएम योगी मैदान में दूर-दूर तक नहीं दिख रहा है विपक्ष. (फाइल फोटो)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इसे लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है. एक तरफ जहां विपक्ष सत्ता हासिल करने के लिए जोर लगा रहा है, तो दूसरी ओर अपनी सत्ता बरकरार रखने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व्यापक जनसंपर्क और रैलियों कर रहे हैं. आंकड़ों के लिहाज से देखें तो सीएम योगी महज दो महीने के भीतर प्रदेश की 100 से अधिक विधानसभा सीटों तक पहुंच चुके हैं, जबकि यूपी की गद्दी की चाह रखने वाले विपक्षी दल मैदान में काफी पीछे नजर आ रहे हैं.
सीएम योगी ने पिछले 45 दिनों में उत्तर प्रदेश के सभी 18 मंडलों को पूरी तरह से कवर कर लिया है. पूर्व से लेकर पश्चिम और बुंदेलखंड तक उनके ताबड़तोड़ दौरे जारी हैं. प्रमुख जिले जिसे सीएम योगी ने हाल के दिनों में कवर किया – बिजनौर, गाजियाबाद, आगरा, झांसी, मैनपुरी, वाराणसी से लेकर गोरखपुर तक शामिल हैं. हर दौरे पर उन्होंने विकास परियोजनाओं की धरातलीय समीक्षा की, नई कल्याणकारी योजनाओं की सौगात दी और जनसभाओं के माध्यम से जनता से सीधा संवाद स्थापित किया.
संगठन, सरकार और जनता: तीनों मोर्चों पर मुस्तैद सीएम योगी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह सक्रियता सिर्फ चुनावी रैलियों तक सीमित नहीं है. वह रोजाना सरकारी कामकाज के साथ-साथ कई मोर्चों पर एक साथ मुस्तैद दिख रहे हैं:
- कानून-व्यवस्था: प्रदेश की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर लगातार समीक्षा बैठकें.
- संगठनात्मक बैठकें: पार्टी कार्यक्रमों और विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों से लगातार मुलाकातें.
- जनता दर्शन: लखनऊ में नियमित रूप से ‘जनता दर्शन’ का आयोजन कर आम लोगों की समस्याओं का तुरंत निस्तारण.
मार्च में अखिलेश की आखिरी जनसभा
दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की जमीनी सक्रियता में कमी देखी जा रही है. अखिलेश यादव ने आखिरी बड़ी सार्वजनिक रैली मार्च 2026 में दादरी में की थी, जिसे सपा के चुनावी अभियान की शुरुआत माना गया था. इसके बाद बीते चार महीनों में उनकी कोई बड़ी जनसभा आयोजित नहीं हुई है. फिलहाल सपा प्रमुख प्रेस कॉन्फ्रेंस, सोशल मीडिया बयानों और नेताओं के निजी कार्यक्रमों तक ही अपनी मौजूदगी सीमित रखे हुए हैं.
अक्टूबर से मायावती का जमीनी प्रचार नहीं हुआ
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की स्थिति पर नजर डालें तो उनकी जमीनी सक्रियता भाजपा और सपा दोनों की तुलना में सबसे कम दिख रही है. बसपा सुप्रीमो मायावती की उत्तर प्रदेश में आखिरी बड़ी रैली 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ के कांशीराम स्मारक स्थल में हुई थी. चुनाव नजदीक होने के बावजूद मायावती मुख्य रूप से अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X/ट्विटर) के जरिए ही राजनीतिक संदेश जारी कर रही हैं.
100 और 1 का साफ अंतर
अगर रैलियों और जनसंपर्क के आंकड़ों की तुलना करें तो सीएम योगी और विपक्षी नेताओं के बीच ‘100 और एक’ का अंतर साफ दिखाई देता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दो कार्यकाल (10 साल) के शासन के बावजूद सीएम योगी की इस जमीनी सक्रियता का ही नतीजा है कि जनमानस में उनकी लोकप्रियता लगातार बरकरार है.
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सिविल सर्विसेज की तैयारी करते-करते कब 4 साल पहले पत्रकारिता की ओर झुकाव हो गया पता ही नहीं चला. नाम दीप राज दीपक है. वर्तमान में News18 हिंदी के साथ जुड़े हुए हैं. पद सब-एडिटर …
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