सुल्तानपुर का यह ऐतिहासिक कुआं आज भी बयां करता है आजादी की अनसुनी कहानी
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Ancient Well of Sultanpur: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के लोहरामऊ गांव में एक ऐसा ऐतिहासिक कुआं है, जो भारत की आजादी की याद दिलाता है. साल 1947 में देश के आजाद होने की खुशी में इस कुएं का निर्माण कराया गया था, जो सालों तक पूरे गांव की प्यास बुझाता रहा. आज भले ही इसका पानी इस्तेमाल नहीं होता, लेकिन गांव वालों ने इस ऐतिहासिक धरोहर को अपनी पहचान मानकर आज भी सहेज रखा है.
सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में कई ऐसी पुरानी और ऐतिहासिक चीजें हैं, जो हमें देश की आजादी के दौर की याद दिलाती हैं. ऐसा ही एक अनोखा कुआं सुल्तानपुर के लोहरामऊ गांव में मौजूद है. इस कुएं को साल 1947 में भारत के आजाद होने की खुशी और याद में बनवाया गया था. एक समय था जब यह कुआं पूरे लोहरामऊ गांव के लिए पानी का सबसे बड़ा और मुख्य जरिया हुआ करता था. आज के समय में भले ही लोग इसका पानी इस्तेमाल नहीं करते हैं, लेकिन गांव के लोगों ने इसे एक ऐतिहासिक धरोहर के रूप में आज भी पूरी तरह सुरक्षित रखा है.
75 साल से भी पुराना है इस कुएं का इतिहास
इस ऐतिहासिक कुएं की देखरेख करने वाले और इसके संरक्षक शरद श्रीवास्तव ने बताया कि इसका इतिहास 75 साल से भी ज्यादा पुराना है. यह कुआं आज भी भारत की आजादी की एक जीती-जागती निशानी के तौर पर गांव में मौजूद है. इसका निर्माण गांव के ही रहने वाले हरिनंदन लाल श्रीवास्तव ने कराया था. साल 1947 में जब देश आजाद हुआ, तब इसकी याद को हमेशा के लिए संजोने के मकसद से इसे तैयार किया गया था. समय के साथ यह सुल्तानपुर की एक बहुत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पहचान बन गया.
कभी पूरे गांव की बुझाता था प्यास
आज के आधुनिक दौर में भले ही लोग इस कुएं को भूल गए हों और इसका पानी इस्तेमाल न होता हो, लेकिन पुराने समय में यह लोहरामऊ गांव के लोगों की जिंदगी का मुख्य हिस्सा था. गांव के सभी लोग यहीं से पीने का पानी ले जाते थे और अपने रोज के कामों में इसी जल का इस्तेमाल करते थे. इस कुएं से थोड़ी ही दूरी पर एक प्राचीन शिवाला (शिव मंदिर) भी स्थित है, जहां भगवान शिव पर जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालु इसी कुएं के पवित्र पानी का उपयोग करते थे.
आज भी लोग करते हैं इसकी देखरेख
गांव के बुजुर्ग कन्हैयालाल बताते हैं कि अब पानी के लिए इस कुएं का उपयोग भले ही बंद हो गया हो, लेकिन इसकी साफ-सफाई और देखरेख आज भी बराबर की जाती है. यही वजह है कि गांव वालों ने इसे आज तक बहुत अच्छे से संजो कर रखा है ताकि आने वाली पीढ़ियों को देश की आजादी के इस प्रतीक के बारे में पता चल सके. इस कुएं की खास बनावट और इस पर लगे कीमती पत्थर साफ गवाही देते हैं कि यह सुल्तानपुर की एक अनमोल विरासत है, जिसे आज भी लोग दिल से संभाल रहे हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें