सुल्तानपुर में 250 साल पुराना कुआं, कभी लोगों की प्यास बुझाता था, आज खुद बूंद-बूंद को तरसा

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सुल्तानपुर में 250 साल पुराना कुआं, कभी लोगों की प्यास बुझाता था, आज खुद बूंद-बूंद को तरसा


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Sultanpur 250 year-old well: अच्छे लाल सिंह बताते हैं कि अब कुएं की उपयोगिता लगभग खत्म हो गई है इसके पीछे की वजह है कि अब लोगों के घर-घर तक टोटी से पानी सप्लाई हो रहासुल्तानपुर का यह कुआं भले ही आज पानी की जरूरतों को पूरा करने के मामले में लगभग भुला दिया गया हो. लेकिन एक समय यह लोहरामऊ गांव के लोगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत था. गांववासी पीने के साथ-साथ दैनिक जरूरतों के लिए भी इसी कुएं के पानी का उपयोग करते थे. कुएं से थोड़ी दूरी पर स्थित डीह माता मंदिर में पूजा के दौरान जल चढ़ाने के लिए भी इसी कुएं का पानी लिया जाता था. है और इसके साथ ही हर घर में नल और समरसेबल आदि आधुनिक यंत्रों के माध्यम से पानी की उपलब्धता हो रही है. ऐसे में यह कुआं अब खंडहर हो चुका है और इसके चारों पिलर भी टूट चुके हैं और इसमें कटीली और जहरीली झाड़ियां उगी ह

जो कुआं कभी गांव के लोगों की प्यास बुझाने में अहम भूमिका निभाता था, आज सिर्फ यादों तक सिमट कर रह गया है. स्थिति यह है कि अब उसकी देखभाल साफ-सफाई और संरक्षण करने वाला कोई नहीं बचा. इसी उपेक्षा के कारण लगभग 250 साल पुराने लोहरामऊ गांव के इस प्राचीन कुएं का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होता जा रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि यह कुआं कहां स्थित है और ऐतिहासिक दृष्टि से इसका महत्व क्या रहा है.

सुल्तानपुर शहर मुख्यालय से लगभग 4 किलोमीटर दूर लोहरामऊ गांव में स्थित यह प्राचीन कुआं कभी इस क्षेत्र की पहचान हुआ करता था. कुएं के संरक्षक अच्छे लाल सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यह कुआं उनके पूर्वजों ने करीब चार पीढ़ी पहले बनवाया था. उनका कहना है कि इस कुएं की आयु 250 वर्षों से भी अधिक है. इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई लखौरी ईंटें, जो पतली और चौड़ी होती है, आज भी मौजूद है. इस कुएं का निर्माण लोहरामऊ गांव के निवासी रामदयाल सिंह ने कराया था.

कभी था मुख्य जलस्रोत
सुल्तानपुर का यह कुआं भले ही आज पानी की जरूरतों को पूरा करने के मामले में लगभग भुला दिया गया हो. लेकिन एक समय यह लोहरामऊ गांव के लोगों के लिए जल का प्रमुख स्रोत था. गांववासी पीने के साथ-साथ दैनिक जरूरतों के लिए भी इसी कुएं के पानी का उपयोग करते थे. कुएं से थोड़ी दूरी पर स्थित डीह माता मंदिर में पूजा के दौरान जल चढ़ाने के लिए भी इसी कुएं का पानी लिया जाता था.

अब खंडहर में तब्दील
अच्छे लाल सिंह बताते है कि अब इस कुएं की उपयोगिता लगभग समाप्त हो चुकी है. वजह यह है कि घर-घर तक नल के माध्यम से पानी की सप्लाई पहुंच चुकी है और हर घर में नल, समरसेबल जैसे आधुनिक साधनों से पानी आसानी से उपलब्ध हो रहा है. परिणामस्वरूप यह कुआं उपेक्षा का शिकार होकर खंडहर में बदल गया है. इसके चारों स्तंभ टूट चुके है और भीतर कटीली व जहरीली झाड़ियां उग आई है. स्थानीय लोग मानते है कि यदि इस कुएं को सुरक्षित और संरक्षित किया जाए तो यह सुल्तानपुर की एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर के रूप में सामने आ सकता है.

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Manish Rai

काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें



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