हरी, लाल या पीली…कौन सी शिमला मिर्च सेहत के लिए ज्यादा अच्छी?

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हरी, लाल या पीली…कौन सी शिमला मिर्च सेहत के लिए ज्यादा अच्छी?


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Capsicum Benefits : हरी, लाल और पीली शिमला मिर्च सिर्फ रंग में ही नहीं, बल्कि स्वाद, पोषण और खेती के तरीके में भी अलग होती हैं. इनका रंग क्यों बदलता है, कौन-सी शिमला मिर्च में कौन से पोषक तत्व अधिक होते हैं और बाजार में इनकी कीमत अलग-अलग क्यों होती है, लोकल 18 ने इस बारे में गाजीपुर के रिटायर्ड हॉर्टिकल्चर प्रोफेसर वशिष्ठ यती और रिसर्चर शुभम तिवारी से बात की. प्रोफेसर वशिष्ठ यती का कहना है कि अलग-अलग रंग की शिमला मिर्च में पोषक तत्वों की मात्रा भी अलग हो सकती है. हरी शिमला मिर्च पूरी तरह पकने से पहले तोड़ी जाती है, इसलिए इसमें क्लोरोफिल की वजह से हरा रंग बना रहता है. जैसे-जैसे हरी शिमला मिर्च पौधे पर पकती है, उसमें मौजूद क्लोरोफिल कम होने लगता है और कैरोटिनॉयड पिगमेंट विकसित होते हैं. इससे लाल और पीला रंग उभरता है.

गाजीपुर के रिलायंस मार्ट के शेल्फ पर रखी ये मिर्चियां बदलती लाइफस्टाइल का प्रतीक हैं. अब छोटे शहरों में भी लोग रेड और येलो बेल पेपर्स को अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं. न्यूट्रिशन वैल्यू के लिहाज से लाल मिर्च सबसे ऊपर (विटामिन A, C, B6 से भरपूर), पीली मिर्च दूसरे स्थान पर (विटामिन C और पोटैशियम) और हरी मिर्च तीसरे स्थान पर आती है. तीनों मिलकर आपकी थाली को परफेक्ट एंटी-ऑक्सीडेंट और हेल्दी डाइट बनाते हैं. रिटायर्ड हॉर्टिकल्चर प्रोफेसर वशिष्ठ यती का कहना है कि अलग-अलग रंग की शिमला मिर्च में पोषक तत्वों की मात्रा भी अलग हो सकती है.

रिसर्चर शुभम तिवारी बताते हैं कि जैसे-जैसे हरी शिमला मिर्च पौधे पर पकती है, उसमें मौजूद क्लोरोफिल कम होने लगता है और कैरोटिनॉयड पिगमेंट विकसित होते हैं, जिससे लाल और पीला रंग उभरता है. लाल और पीली मिर्च (रंग-बिरंगी बेल पेपर्स) रिलायंस स्मार्ट में ₹280/किग्रा के प्रीमियम ब्रैकेट में मिलती हैं. रिलायंस स्मार्ट में ये प्रीमियम श्रेणी में उपलब्ध हैं.

शिमला मिर्च के पौधे की जड़ों के पास ‘प्लास्टिक मल्चिंग शीट’ का इस्तेमाल किया जाता है. शोधार्थी शुभम कुमार तिवारी बताते हैं  कि आधुनिक तकनीक मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवार को रोकने और जड़ों को फंगस से बचाने में मदद करती है. सही तापमान, ड्रिप इरिगेशन और इस मल्चिंग तकनीक से किसान एक ही पौधे से भारी मात्रा में चमकदार और स्वस्थ शिमला मिर्च हासिल करते हैं, जो सीधे मंडी और रिलायंस स्मार्ट जैसे स्टोर्स तक पहुंचती है.

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हरी शिमला मिर्च पूरी तरह पकने से पहले तोड़ी जाती है, इसलिए इसमें क्लोरोफिल की वजह से हरा रंग बना रहता है. रिटायर्ड हॉर्टिकल्चर प्रोफेसर वशिष्ठ यती बताते हैं कि इसी अवस्था में इसका स्वाद हल्का कड़वापन लिए होता है और यह रोजमर्रा की सब्जियों, चाइनीज डिश और सलाद में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाती है. यह फाइबर और विटामिन C का भी अच्छा स्रोत है.

लाल और पीली शिमला मिर्च की खेती सामान्यतः पॉलीहाउस या नियंत्रित वातावरण में की जाती है. प्रोफेसर वशिष्ठ यती बताते हैं कि इनकी अच्छी गुणवत्ता के लिए नियंत्रित तापमान, ड्रिप सिंचाई और संतुलित पोषण की जरूरत होती है. हरी मिर्च 60-70 दिनों में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है, जबकि लाल और पीली मिर्च को पकने में 90 से 110 दिन का समय लगता है, यही वजह है कि बाजार में इनका दाम हरी मिर्च से ज्यादा होता है. शुभम तिवारी बताते हैं कि लाल और पीली शिमला मिर्च को उगाने के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान और ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) की जरूरत होती है.

लाल शिमला मिर्च पौधे पर पूरी तरह पकने के बाद तैयार होती है. रिसर्चर शुभम तिवारी बताते हैं कि पकने की प्रक्रिया के दौरान इसमें बीटा-कैरोटीन और विटामिन C की मात्रा बढ़ जाती है. इसमें विटामिन B6 भी पाया जाता है, जो शरीर में कई सामान्य जैविक प्रक्रियाओं के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है. इसी कारण इसे पोषण की दृष्टि से सबसे समृद्ध बेल पेपर माना जाता है. इसमें हरी मिर्च की तुलना में 11 गुना ज्यादा बीटा-कैरोटीन और 1.5 गुना ज्यादा विटामिन C होता है. इसमें विटामिन B6 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो दिमाग के विकास, रेड ब्लड सेल्स के निर्माण और मूड को बेहतर बनाने वाले सेरोटोनिन हार्मोन को कंट्रोल करने में मदद करता है.

पीली शिमला मिर्च अपने चमकीले रंग और हल्के मीठे स्वाद के लिए जानी जाती है. प्रोफेसर वशिष्ठ यती के अनुसार, इसमें कैरोटिनॉयड पिगमेंट और विटामिन C अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसे सलाद, पास्ता और ग्रिल्ड डिश में खूब इस्तेमाल किया जाता है. इसमें फोलेट, पोटैशियम और फाइबर भी मौजूद होते हैं. पीली शिमला मिर्च में विटामिन C की मात्रा हरी मिर्च से काफी ज्यादा होती है. इसके पीले रंग का कारण इसमें मौजूद ‘वायोलाक्सैन्थिन’ और ‘कैरोटिनॉयड’ पिगमेंट्स हैं. न्यूट्रिशन की बात करें तो एक कप पीली शिमला मिर्च शरीर की दैनिक विटामिन C की जरूरत का 300% तक पूरा कर सकती है.

रिसर्चर शुभम तिवारी बताते हैं कि हरी शिमला मिर्च में कैलोरी कम और पानी की मात्रा अधिक होती है. इसके साथ ही इसमें विटामिन A, विटामिन K और फाइबर भी पाए जाते हैं. यही वजह है कि संतुलित आहार लेने वाले लोग इसे अपनी डाइट में शामिल करना पसंद करते हैं. 100 ग्राम हरी शिमला मिर्च में महज 20 कैलोरी होती है, जिससे यह वेट-लॉस (Diet) करने वालों की पहली पसंद है.

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