हेलमेट नहीं, हिम्मत चाहिए…मऊ की इस सड़क पर 2 किमी का सफर बना अग्निपरीक्षा
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Mau Local News: मऊ जनपद की एक ऐसी सड़क, जहां लोग हेलमेट से ज्यादा अपनी हिम्मत बांधकर सफर करते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त प्रदेश के दावों के बीच, अतरारी ग्राम सभा की यह सड़क पिछले 10 वर्षों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है. यहां गड्ढों में सड़क है या सड़क में गड्ढे, यह पहचानना मुश्किल है. आलम यह है कि स्कूली बच्चे हों या गर्भवती महिलाएं, हर किसी के लिए यह 2 किलोमीटर का सफर किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है. बार-बार की शिकायतों और विरोध प्रदर्शनों के बावजूद प्रशासन की नींद नहीं टूटी है, जिससे अब ग्रामीणों का धैर्य जवाब देने लगा है.
मऊ: उत्तर प्रदेश सरकार भले ही पूरे प्रदेश को गड्ढा मुक्त करने के बड़े-बड़े दावे कर लें, लेकिन मऊ जनपद की एक मुख्य सड़क इन दावों की पोल खोल रही है. यहां धरातल पर हकीकत सरकार के वादों से कोसों दूर है. स्थिति इतनी भयावह है कि स्थानीय राहगीरों का कहना है कि इस सड़क पर चलते समय उन्हें सिर पर हेलमेट से ज्यादा दिल में हिम्मत बांधनी पड़ती है, क्योंकि उन्हें पता नहीं होता कि वे सही-सलामत घर पहुंचेंगे भी या नहीं.
अतरारी ग्राम सभा के प्रधान अबरार अहमद ने बताया कि मुहम्मदाबाद गोहना मुबारकपुर रोड से अतरारी होते हुए करीब 10 से 12 गांवों को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क है. लगभग 2 किलोमीटर का यह हिस्सा पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग के अंतर्गत आता है, जो पिछले 10 सालों से बेहद जर्जर स्थिति में है. करीब 12 साल पहले इस सड़क का निर्माण मंडी विभाग द्वारा कराया गया था, लेकिन दो साल के भीतर ही यह सड़क उखड़ने लगी. आज आलम यह है कि सड़क का नामोनिशान मिट चुका है और सिर्फ बड़े-बड़े गड्ढे बचे हैं.
स्थानीय निवासी अशफाक अहमद और भोला प्रसाद ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि सड़क की हालत सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाओं के लिए जानलेवा साबित हो रही है. जब महिलाओं को एम्बुलेंस या निजी वाहन से अस्पताल ले जाया जाता है, तो इन गड्ढों के कारण उनका दर्द असहनीय हो जाता है. कई बार महिलाएं दर्द से तड़प उठती हैं. वहीं, स्कूली छात्राएं भी आए दिन इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्रीय विधायक से कई बार गुहार लगाई गई, पर हर बार सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला.
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गड्ढा मुक्त नहीं, यह तो गड्ढा युक्त प्रदेश है…
कांग्रेस नेता महेंद्र सोनकर ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हकीकत में यह ‘गड्ढा युक्त’ प्रदेश बन गया है. अतरारी से खैराबाद और चलीसवा जैसे दर्जन भर गांवों को जोड़ने वाली इस सड़क पर चलना किसी जोखिम से कम नहीं है. शासन-प्रशासन को कई बार लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन फाइलें दफ्तरों में ही दबी रह गईं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता अपनी सेहत और जान जोखिम में डालकर भुगत रही है.
बड़े आंदोलन की तैयारी में ग्रामीण
ग्रामीण मकसूद अहमद ने कहा कि क्षेत्रवासी पिछले एक दशक से इस समस्या को झेल रहे हैं. मात्र 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में आधा घंटा लग जाता है. सड़क की हालत से तंग आकर अब ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है. उनका कहना है कि अगर जल्द ही मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे एक बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे. फिलहाल, यहां के राहगीर हर दिन भगवान भरोसे ही इस खतरनाक रास्ते को पार कर रहे हैं.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें