3 महीने की खेती कर किसान छाप रहे नोटों के बंडल, डॉक्टरों का फेवरेट, मरीजों की जान, बारिश में उगाना आसान
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Karela farming tips : इसकी खेती में लागत कम है और मुनाफा बंपर. किसान इसे आंख मूंदकर उगा सकते हैं. डिमांड कभी कम नहीं होती. लोग खोज-खोजकर खरीदते हैं. कौशांबी के किसान इसे कई साल से उगा रहे हैं.
कौशांबी. सब्जियों की खेती हमेशा से मुनाफे का सौदा रही है. इसकी डिमांड मार्केट में खूब रहती है. यही कारण है कि यूपी के कौशांबी में किसान परंपरागत खेती को छोड़कर सब्जियां उगाने लगे हैं. किसान महज 3 महीने में इसे पैदा करके लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं. ऐसा ही एक किसान कौशांबी जिले के गंगा कच्छार के किनारे सैकड़ों बीघे में करेला की खेती कर रहा है. हालांकि बरसात के मौसम में गंगा कच्छार पर खेती करना कठिन हो जाता है. बरसात में बाढ़ के कारण किसानों की फसल बर्बाद होने का खतरा मंडराता रहता है. लेकिन किसान हार नहीं मानते. विपरीत मौसम में भी खेती का दामन नहीं छोड़ते. बारिश में किसान की खेती खूब होती है, लेकिन गंगा के कच्छार पर करेला उगाना चुनौतीपूर्ण है. इसके लिए किसान कई उपाय करते हैं.
एक बीघे में कितनी लागत
एक बीघे में करेले की बुवाई की लागत 15-20 हजार रुपये आती है. इसकी खेती मात्र 3 महीने होती है. कौशांबी जिले के किसान गंगा कच्छार के किनारे इन दिनों जाल बनाकर करेला उगा रहे हैं. करेले की बुवाई के कुछ दिन बाद जब पौधा निकलना शुरू होता है तब किसान जाल बनाना शुरू कर देते हैं. जाल बनाने के लिए किसान बांस और तार की व्यवस्था करके उसे करेले के पौधों के पास गाड़ देते हैं. पौधे बढ़ने पर बांस की मदद से जाल पर चढ़ जाते हैं. इससे बारिश में बाढ़ के पानी से फसल बर्बाद होने से बच जाती है.
कैसे करें बुआई
कौशांबी जिले के हब्बूनगर गांव के रहने वाले किसान भूपेंद्र सिंह कई साल से करेले की खेती करते आ रहे हैं. वे बताते हैं कि गंगा के कच्छार में किसान सैकड़ों बीघे में करेले की खेती करते हैं. इसकी खेती करने के लिए पहले बीज की बुवाई करनी पड़ती है. उसके बाद जब पौधा थोड़ा बढ़ने लगता है तो उसे मिट्टी की मेड बनाकर चढ़ाया जाता है. एक बीघे में लागत 15-20 हजार आती है और मुनाफा 70-80 हजार तक हो जाता है.