’33 साल में लिखी एक किताब’, कागजों से लोकगीतों तक, जानिए कैसे जीवंत रहा शाहजहांपुर

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’33 साल में लिखी एक किताब’, कागजों से लोकगीतों तक, जानिए कैसे जीवंत रहा शाहजहांपुर


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World Book Day Shahjahanpur : वीरता और कलम के संगम शाहजहांपुर की ऐतिहासिक गाथा किताबों में जीवंत है. ‘तारीख-ए-शाहजहांपुरी’ से लेकर लोकगीतों के विशाल संग्रह तक, यहां के विद्वानों ने दशकों के शोध से समृद्ध विरासत को संजोया है. विश्व पुस्तक दिवस को लेकर लोकल 18 ने शाहजहांपुर के इतिहासकार डॉ. विकास खुराना से बात की. वे बताते हैं कि ‘तारीख-ए-मती’ जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों को लिखने में 33 वर्षों का लंबा समय लगा, जो यहां के लेखकों के धैर्य और समर्पण को दर्शाता है. शाहजहांपुर की यह साहित्यिक यात्रा निरंतर जारी है.

शाहजहांपुर. इतिहास की कई परतों को समेटे उत्तर प्रदेश का शाहजहांपुर जिला न केवल अपनी वीरता के लिए, बल्कि अपनी समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी प्रसिद्ध है. ‘तारीख-ए-शाहजहांपुरी’ और ‘तारीख-ए-मती’ जैसी रचनाओं के माध्यम से यहां के लेखकों ने 33 वर्षों के लंबे संघर्ष और शोध को पन्नों पर उतारा है. डॉ. एनसी मेहरोत्रा के सांस्कृतिक शोध हों या सुधीर विद्यार्थी की क्रांतिकारी लेखनी, इस शहर ने हर दौर में महान कलमकारों को जन्म दिया है. आज भी डॉ. संजय पांडे की ओर से संकलित एक हजार वर्षों के लोकगीतों का संग्रह और आर पांडे की पुरातात्विक पुस्तकें यहां के गौरवशाली अतीत को जीवंत बनाए हुए हैं. विश्व पुस्तक दिवस (23 अप्रैल) पर हमने प्रख्यात इतिहासकार डॉ. विकास खुराना से बात की.

डॉ. खुराना बताते हैं कि शाहजहांपुर का इतिहास किताबों में जीवंत है. ‘तारीख-ए-शाहजहांपुरी’ जैसी किताबें यहां के समाज और संस्कृति का सटीक दर्पण हैं. शाहजहांपुर पूरे उत्तर प्रदेश में अपने लेखकों और कवियों के लिए विख्यात रहा है. ‘तारीख-ए-मती’ जैसी ऐतिहासिक पुस्तकों को लिखने में 33 वर्षों का लंबा समय लगा, जो यहां के लेखकों के धैर्य और समर्पण को दर्शाता है. डॉ. खुराना स्थानीय साहित्य के संरक्षण पर जोर देते हैं और लोगों से अपील करते हैं कि वो अपनी विरासत को समझें और भविष्य की पीढ़ियों के लिए इसे संजोकर रखें.

हर पहलू पर कलम

शाहजहांपुर का साहित्यिक इतिहास अत्यंत प्राचीन और प्रभावशाली है. यहां के लेखकों ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय फलक पर भी अपनी पहचान बनाई है. ‘अखबार-ए-मोहब्बत’ और ‘भारत का इतिहास’ किताबें इस बात का प्रमाण हैं कि यहां के कलमकारों ने इतिहास के हर पहलू को बारीकी से दर्ज किया है. यह शहर ज्ञान की एक ऐसी अविरल धारा रहा है, जहां हर युग में नई सोच और रचनाशीलता को प्रोत्साहन मिला है.

अनूठी कृति

डॉ. खुराना कहते हैं कि डॉ. एनसी मेहरोत्रा जैसे विद्वानों ने शाहजहांपुर के सांस्कृतिक जीवन पर विस्तार से लिखा है. उनकी पुस्तकें यहां की परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामाजिक संरचना को समझने में मदद करती हैं. डॉ. संजय पांडे की ओर से संकलित ‘शाहजहांपुर के 1000 सालों के लोकगीत’ एक अनूठी कृति है. यह संकलन दर्शाता है कि यहां का लोक साहित्य कितना विविधतापूर्ण है और किस तरह से पीढ़ियों से मौखिक रूप से चला आ रहा ज्ञान अब लिपिबद्ध हो रहा है.

शहर के भीतर शहर

क्रांतिकारी साहित्य की बात करें तो सुधीर विद्यार्थी जैसे लेखकों का योगदान अतुलनीय है. उनकी पुस्तक ‘शहर के भीतर शहर’ शाहजहांपुर के उन अनछुए पहलुओं को उजागर करती है, जो अक्सर मुख्यधारा के इतिहास में छूट जाते हैं. साथ ही, आर. पांडे द्वारा पुरातत्व संबंधी शोध कार्यों ने शहर की प्राचीनता को वैज्ञानिक आधार प्रदान किया है. ये सभी रचनाएं मिलकर शाहजहांपुर को एक बौद्धिक केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं, जहां इतिहास और आधुनिकता का सुंदर समन्वय है. डॉ. खुराना और अन्य विद्वान शाहजहांपुर के युवाओं को स्थानीय लेखकों को पढ़ने और शोध करने के लिए प्रेरित करते हैं. उनका मानना है कि जब तक युवा अपनी जड़ों और अपने शहर के गौरवशाली इतिहास को नहीं जानेंगे, तब तक वे एक सशक्त भविष्य का निर्माण नहीं कर पाएंगे. शाहजहांपुर की यह साहित्यिक यात्रा निरंतर जारी है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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