39 दिन में 70 बार चोरी, सीधे बैंकों में जाता था पैसा, SIT की पहली रिपोर्ट में खुलासा
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Ram Mandir SIT Report: अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में एसआईटी (SIT) की पहली रिपोर्ट आ गई है. इस जांच में खुलासा हुआ है कि 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच मात्र 40 दिनों में 70 बार दानपात्रों से चोरी की गई. सीसीटीवी फुटेज में कर्मचारी कपड़ों और जूतों में नोट छिपाते दिखे. रिपोर्ट के आधार पर 6 मुख्य आरोपियों सहित 8 लोगों पर एफआईआर की सिफारिश की गई है. सुरक्षा में भारी लापरवाही उजागर होने के बाद ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. जानिए रिपोर्ट की पूरी इनसाइड स्टोरी.
राम मंदिर दान चोरी मामले में एशआईटी की पहली रिपोर्ट आ चुकी है.
Ram Mandir Chori SIT Report: राम मंदिर दान चोरी की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की पहली रिपोर्ट आई है. इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 के बीच 70 बार चोरी हुई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीसीटीवी में दान की गणना करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए साफ दिखे. बताते चलें कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान (हुंडियों) से प्राप्त होने वाले चढ़ावे और नकदी की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की जांच कर रही एसआईटी की ये पहली रिपोर्ट है.
उत्तर प्रदेश शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी के अध्यक्ष आयुक्त विजय विश्वास पंत द्वारा 23 जून को सौंपी गई इस गोपनीय रिपोर्ट की कुछ महत्वपूर्ण बातें इस प्रकार हैं-
1. मुख्य निष्कर्ष और चोरी के प्रमाण
• चोरी की पुष्टि: प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि मंदिर के काउंटिंग रूम में चढ़ावे की राशि की चोरी और गबन हुआ है.
• सीसीटीवी फुटेज: 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 तक के उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की जांच में 70 बार चोरी की घटनाएं सामने आईं. गणना कर्मी नोटों की गड्डियां और खुले नोट अपने कपड़ों, जेबों और जूतों में छिपाते हुए साफ दिखे.
• आय से अधिक संपत्ति: गबन में शामिल कर्मचारियों की मासिक वेतन (करीब ₹15,000-20,000) की तुलना में उनके और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में भारी नकद राशि और एफडी (एफडी) जमा पाई गई है. एसआईटी गठन से पहले ट्रस्ट ने इनसे ₹78.94 लाख की बरामदगी कर ली थी.
• सोशल मीडिया की खबरों का खंडन: श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई मूल्यवान वस्तुओं (जैसे सिंधी समाज द्वारा 200 किलो चांदी और अन्य चांदी की ईंटें) के गबन की अफवाहें गलत पाई गईं; वे सभी वस्तुएं ट्रस्ट की देखरेख में सुरक्षित पाई गईं या उन्हें भारत सरकार की टकसाल (Mint) में गलाकर सुरक्षित रखा गया है.
2. सीधे तौर पर संलिप्त पाए गए 6 मुख्य आरोपी
सीसीटीवी और फाइनेंशियल सबूतों के आधार पर सीधे तौर पर चोरी करने और उसमें मदद करने वाले इन 6 संविदा कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने की सिफारिश की गई है:
- अविनाश शुक्ला
- अनुकल्प मिश्रा
- लवकुश मिश्रा
- मनीष कुमार यादव
- करुणेश पाण्डेय
- रामाशंकर मिश्रा
3. सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर कमियां और लापरवाही
यह घोटाला पूरी तरह से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण संभव हो सका-
- कर्मियों के आने-जाने पर सघन तलाशी (Frisking) नहीं की जा रही थी.
- जेब-रहित (बिना जेब वाली) निर्धारित वेशभूषा का नियम लागू नहीं किया गया.
- कर्मियों को गणना कक्ष में मोबाइल फोन और निजी वस्तुएं ले जाने की छूट थी.
- अलग-अलग हुंडियों के पैसे को बिना लेखा-जोखा रखे आपस में मिला दिया जाता था.
- ऑडिट रिपोर्ट की इस अनुशंसा को नजरअंदाज किया गया कि संवेदनशील कार्य होने के कारण कम से कम 180 दिनों का सीसीटीवी बैकअप रखा जाए (ट्रस्ट के पास केवल 45 दिनों का बैकअप था, जिससे पहले की चोरियों का सटीक आकलन नहीं हो सका).
4. अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की भूमिका (लापरवाही व साजिश)
- डॉ. अनिल मिश्रा (ट्रस्ट सदस्य): वे वित्तीय मामलों और संकलन प्रबंधन के वरिष्ठ पर्यवेक्षक थे. तलाशी न होने की जानकारी मिलने के बावजूद उन्होंने इसे लागू करने के प्रभावी निर्देश नहीं दिए, बल्कि पूर्व निर्धारित सख्त तलाशी नियमों को शिथिल करने के लिए जिम्मेदार पाए गए.
- सुभाष श्रीवास्तव (गणना कक्ष प्रभारी): डॉ. अनिल मिश्रा की सिफारिश पर नियुक्त श्रीवास्तव ने गणना कक्ष के प्रभारी होने के नाते घोर प्रशासनिक लापरवाही बरती और तलाशी व्यवस्था लागू नहीं कराई.
- रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू: बिना किसी औपचारिक आदेश या प्राधिकार के मंदिर की हुंडियों (दानपात्रों) की चाबियां अपने पास रखते थे. उन्होंने अपने रिश्तेदार मनीष कुमार यादव की सिफारिश कर उसे गणना कार्य में लगवाया, जो बाद में चोरी में संलिप्त पाया गया.
5. एसआईटी की कार्रवाई और कानूनी सिफारिशें
- एसआईटी ने मुख्य 6 आरोपियों के साथ-साथ सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के खिलाफ भी कर्तव्य की घोर उपेक्षा, साजिश (षड्यंत्र) और अपराध को सुगम बनाने की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना करने को कहा है.
- इस्तीफे और बदलाव: इस रिपोर्ट के आने के बाद ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया है. श्री कृष्ण मोहन को अंतरिम रूप से महामंत्री का कार्यभार सौंपा गया है.
- नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है.
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