4 की जगह केवल 1 कर्मचारी, 49 दिनों में 30 की मौत, UP में बिजली से मौत का तांडव
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उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) के खिलाफ संविदा संघ ने बड़ा मोर्चा खोल दिया है. प्रदेश महामंत्री देवेंद्र पांडे के मुताबिक, पिछले 49 दिनों में राज्य में 56 भयानक बिजली हादसे हुए हैं, जिनमें 30 आउटसोर्सिंग कर्मियों की दर्दनाक मौत हो गई और 26 गंभीर रूप से घायल होकर दिव्यांग हो गए हैं. हैरान करने वाली बात यह है कि यूपी में डेढ़ करोड़ नए बिजली उपभोक्ता बढ़ने के बावजूद 20 हजार अनुभवी संविदाकर्मियों को हटा दिया गया है. 4 की जगह सिर्फ 1 कर्मचारी से काम कराया जा रहा है और अकुशल लोगों को लाइन पर चढ़ाया जा रहा है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है.
बिजली विभाग की नाकामी 49 दिन में 30 कर्मचारियों की मौत
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग (UPPCL) के संविदा और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए फील्ड पर काम करना किसी मौत से पंगा लेने से कम नहीं है. पिछले 49 दिनों में राज्य के भीतर बिजली विभाग में एक ऐसा खौफनाक ‘मौत का तांडव’ देखने को मिला है, जिसने विभाग के खोखले सुरक्षा दावों की पूरी कलई खोलकर रख दी है. यूपी में बीते 49 दिनों के भीतर कुल 56 भयंकर बिजली दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 30 आउटसोर्सिंग बिजली कर्मचारियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 26 कर्मचारी गंभीर रूप से झुलसकर जीवन भर के लिए अपंग हो चुके हैं. इस भयावह स्थिति को देखते हुए UPPCL निविदा/संविदा कर्मचारी संघ ने प्रबंधन की तानाशाही के खिलाफ सीधे तौर पर आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है.
49 दिन, 56 हादसे और 30 मौतें
संविदा संघ के प्रदेश महामंत्री देवेंद्र पांडे ने लखनऊ में एक बेहद तीखा और विस्फोटक बयान जारी करते हुए UPPCL प्रबंधन को इन मौतों का सीधा जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सरकारी आंकड़ों और मैदानी हकीकत का हवाला देते हुए बताया कि विभाग संविदाकर्मियों की जान से खिलवाड़ कर रहा है:
- दर्दनाक मौतें: महज 49 दिनों के भीतर 56 बड़े हादसों में 30 आउटसोर्सिंग लाइनमैन और बिजली कर्मियों को करंट लगने के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी.
- गंभीर रूप से घायल: 26 से अधिक कर्मचारी इस अवधि में गंभीर रूप से झुलस गए हैं. करंट का झटका इतना भयंकर था कि कई कर्मचारियों के हाथ-पैर काटने पड़े हैं और वे हमेशा के लिए विकलांग हो चुके हैं.
- सुरक्षा का अभाव: UPPCL प्रबंधन ने संविदाकर्मियों की फील्ड पर सुरक्षा के लिए, जैसे- ग्लव्स, सेफ्टी बेल्ट या आधुनिक टूलकिट, का कोई भी प्रभावी या तकनीकी इंतजाम नहीं किया है.
डेढ़ करोड़ उपभोक्ता बढ़े, हटे 20 हजार कर्मचारी
इस पूरे विवाद के पीछे सबसे चौंकाने वाला प्रशासनिक घालमेल सामने आया है. एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ समय में रिकॉर्ड डेढ़ करोड़ (1.5 करोड़) नए बिजली उपभोक्ता बढ़े हैं, वहीं दूसरी तरफ UPPCL ने करीब 20 हजार पुराने और बेहद अनुभवी संविदाकर्मियों को अचानक नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया.
अनुभवी कर्मचारियों को हटाए जाने के कारण जो कर्मचारी बचे हैं, उन पर काम का मानसिक और शारीरिक दबाव अत्यधिक बढ़ गया है. नियमानुसार जहां फॉल्ट ठीक करने वाली एक ‘गैंग’ (टीम) में कम से कम 4 कुशल कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए, वहां बजट बचाने के चक्कर में सिर्फ 1 कर्मचारी को अकेले खंभे पर भेज दिया जाता है. यही कारण है कि सूबे की जनता को भयंकर बिजली संकट और अघोषित कटौती का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि अकेला कर्मचारी कितना काम संभालेगा?
अयोग्य और अकुशल श्रमिकों से कराया जा रहा जानलेवा काम
महामंत्री देवेंद्र पांडे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अनुभवी स्टाफ को निकालने के बाद, मैनेजमेंट पूरी तरह अयोग्य और अकुशल श्रमिकों से खतरनाक हाई-वोल्टेज लाइनों (लाइनमैन) का काम करा रहा है. जिन लोगों को शटडाउन लेने, अर्थिंग चेक करने या ग्रिड की बारीकियों का कोई अनुभव नहीं है, उन्हें सीधे मौत के कुएं में धकेला जा रहा है. इसी घोर लापरवाही के कारण मौतों का यह डरावना आंकड़ा रोजाना बढ़ रहा है. संघ ने इसे पूरी तरह मैनेजमेंट की ‘तानाशाही’ और ‘मजदूर विरोधी नीति’ करार दिया है.
संघ का कड़ा अल्टीमेटम, ‘अगर UPPCL प्रबंधन ने तुरंत अपनी तानाशाही नीतियां बंद नहीं की, और बेतहाशा बढ़े उपभोक्ताओं के अनुपात में तुरंत योग्य और प्रशिक्षित संविदाकर्मियों की नई भर्ती नहीं की, तो पूरे उत्तर प्रदेश के संविदाकर्मी काम बंद कर देंगे. बहुत जल्द लखनऊ स्थित ‘शक्ति भवन’ का घेराव कर बिजली विभाग के खिलाफ एक ऐतिहासिक और आर-पार का महा-आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मैनेजमेंट की होगी.’
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Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें