4900 साल पुराना शिवलिंग…लखीमपुर के इस मंदिर का गज-ग्राह मोक्ष से है खास कनेक्शन

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4900 साल पुराना शिवलिंग…लखीमपुर के इस मंदिर का गज-ग्राह मोक्ष से है खास कनेक्शन


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Gajmochan Nath Temple Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक ऐसा प्राचीन शिव मंदिर है, जहां सावन के महीने में दूर-दूर से हजारों शिवभक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं. लखीमपुर के सेहरूआ गांव में स्थित गजमोचन नाथ मंदिर का संबंध भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु से जुड़ी पौराणिक गज-ग्राह मोक्ष कथा से भी बताया जाता है. मंदिर के पास मौजूद प्राचीन झील को लेकर भी कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. खास बात यह है कि यहां स्थापित शिवलिंग को करीब 4900 साल पुराना बताया जाता है और हर अमावस्या को यहां मेला भी लगता है. मंदिर से जुड़ी ऐसी कई मान्यताएं हैं, जिन्हें जानकर आप भी इस प्राचीन धार्मिक स्थल के बारे में और जानना चाहेंगे.

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लखीमपुर खीरी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल हैं, जिनसे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है. इन्हीं में से एक है लखीमपुर-मोहम्मदी रोड के किनारे सेहरूआ (कंधुआ) गांव के पास स्थित श्री गजमोचन नाथ मंदिर. यह मंदिर भगवान शिव और भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ माना जाता है. सावन के महीने में यहां हर दिन हजारों की संख्या में शिव भक्त पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. मंदिर की खास बात यह है कि इसे श्रीमद्भागवत महापुराण की प्रसिद्ध गज-ग्राह मोक्ष कथा से भी जोड़कर देखा जाता है.

गज-ग्राह की कथा से जुड़ा है मंदिर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी स्थान पर कभी गजराज यानी हाथी और ग्राह यानी मगरमच्छ के बीच भयंकर युद्ध हुआ था. बताया जाता है कि मगरमच्छ ने गजराज को पकड़ लिया था. काफी प्रयास के बाद भी जब गजराज खुद को नहीं बचा सके तो उन्होंने भगवान विष्णु से मदद की गुहार लगाई. गजराज की पुकार सुनकर भगवान विष्णु वहां पहुंचे और मगरमच्छ का वध कर गजराज को मुक्त कराया. इसी धार्मिक कथा के कारण इस स्थान को गजमोचन नाथ के नाम से जाना जाने लगा.

झील के रूप में मौजूद है आदि गंगा गोमती का अवशेष
स्थानीय मान्यता के मुताबिक, पुराने समय में इस स्थान से आदि गंगा गोमती नदी बहती थी. समय के साथ नदी की धारा यहां से खत्म हो गई, लेकिन आज भी इसके अवशेष झील के रूप में मौजूद हैं. इसी झील को गजमोचन झील कहा जाता है. मान्यता है कि इसी आदि गंगा गोमती में गजराज को मगरमच्छ ने पकड़ लिया था.

मंदिर में स्थापित है प्राचीन शिवलिंग
मंदिर के महंत रमेश गिरि बताते हैं कि यहां एक प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जिसे करीब 4900 वर्ष पुराना बताया जाता है. श्रद्धालुओं की इस शिवलिंग और भगवान भोलेनाथ में गहरी आस्था है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से भगवान शिव से अपनी मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा पूरी होती है. इसी आस्था के चलते दूर-दूर से लोग यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं. मंदिर में केवल पूजा और जलाभिषेक ही नहीं होता, बल्कि लोग अपने बच्चों का मुंडन और अन्नप्राशन संस्कार कराने के लिए भी यहां आते हैं. हर अमावस्या को मंदिर परिसर में मेला लगता है, जिसमें आसपास के गांवों और दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.

कभी हजारों कदंब के पेड़ों से घिरा था पूरा इलाका
महंत रमेश गिरि के मुताबिक, पुराने समय में इस पूरे क्षेत्र में कदंब के हजारों पेड़ हुआ करते थे. इसी वजह से इस इलाके को कजरी वन के नाम से भी जाना जाता था. समय के साथ यहां के ज्यादातर कदंब के पेड़ खत्म हो गए, लेकिन मंदिर के आसपास आज भी कुछ पुराने कदंब के पेड़ मौजूद हैं, जो इस इलाके के पुराने स्वरूप की याद दिलाते हैं.

सावन में रोज पहुंचते हैं हजारों शिव भक्त
सावन के महीने में गजमोचन नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ काफी बढ़ जाती है. महंत रमेश गिरि बताते हैं कि सावन में हर दिन बड़ी संख्या में शिव भक्त दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं और भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं. भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ गजमोचन झील के भी दर्शन करते हैं. प्राचीन शिवलिंग, गज-ग्राह की धार्मिक कथा और आदि गंगा गोमती से जुड़ी मान्यताओं के कारण यह मंदिर लखीमपुर खीरी में आस्था का एक खास केंद्र माना जाता है.

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Seema Nath

Seema Nath is a digital journalist and content creator with 6 years of experience in journalism, including ground reporting, regional news coverage and feature writing. She currently works as a Content Producer…

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