6.5 की तीव्रता से ज्यादा का भूकंप आया तो खतरे में होंगे कानपुर, प्रयागराज, आईआईटी कानपुर की रिसर्च ने दी बड़ी चेतावनी

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6.5 की तीव्रता से ज्यादा का भूकंप आया तो खतरे में होंगे कानपुर, प्रयागराज, आईआईटी कानपुर की रिसर्च ने दी बड़ी चेतावनी


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आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा की अगुवाई में की गई रिसर्च में कहा गया है कि अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो इन शहरों में भारी नुकसान हो सकता है. खासकर गंगा किनारे और निचले इलाकों में खतरा ज्यादा बताया गया है. रिसर्च के मुताबिक यहां की जमीन कई जगहों पर ढीली और रेतीली है. ऐसी मिट्टी भूकंप के दौरान ज्यादा हिलती है और झटकों का असर बढ़ा देती है. यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है.

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कानपुर: कानपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों के लिए एक अहम चेतावनी सामने आई है. आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा की अगुवाई में की गई रिसर्च में कहा गया है कि अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो इन शहरों में भारी नुकसान हो सकता है. खासकर गंगा किनारे और निचले इलाकों में खतरा ज्यादा बताया गया है. रिसर्च के मुताबिक यहां की जमीन कई जगहों पर ढीली और रेतीली है. ऐसी मिट्टी भूकंप के दौरान ज्यादा हिलती है और झटकों का असर बढ़ा देती है. यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है.

17 साल पहले मिला प्रोजेक्ट

प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा को साल 2008 में इस विषय पर रिसर्च के लिए प्रोजेक्ट मिला था. इसके बाद उनकी टीम ने कई साल तक कानपुर और आसपास के इलाकों में सर्वे किया. मिट्टी के नमूने जुटाए गए और उनकी गहराई से जांच की गई. एक विस्तृत अध्ययन किया गया, जिसमें जमीन की अलग-अलग परतों और उनके व्यवहार को समझा गया. कंप्यूटर मॉडल की मदद से यह अनुमान लगाया गया कि अगर बड़ा भूकंप आता है तो किस इलाके में कितना असर पड़ सकता है. इस पूरी रिसर्च के बाद अब साफ संकेत मिल रहे हैं कि कुछ इलाके ज्यादा संवेदनशील हैं.

जमीन के नीचे छिपा है बड़ा खतरा

रिसर्च में सामने आया कि कई जगहों पर “लिक्विफैक्शन” का खतरा है. इसका मतलब यह है कि भूकंप के तेज झटकों के दौरान ठोस जमीन दलदल जैसी हो सकती है. ऐसी स्थिति में इमारतों की नींव कमजोर पड़ जाती है. बड़े-बड़े भवन झुक सकते हैं और पुराने मकान गिर भी सकते हैं. वैज्ञानिकों ने करीब 20 अलग-अलग जगहों से मिट्टी के सैंपल लिए. जांच में पाया गया कि गंगा किनारे के इलाके, पुराने मोहल्ले और ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र ज्यादा जोखिम में हैं. अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो सड़कें फट सकती हैं, जमीन में दरारें पड़ सकती हैं और कई इमारतों को गंभीर नुकसान हो सकता है.

नई इमारत बनाते समय रखें तकनीकि ख्याल

रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञों ने साफ कहा है कि अब लापरवाही की गुंजाइश नहीं है. नई इमारतें बनाते समय भूकंपरोधी डिजाइन का सख्ती से पालन किया जाए. पुराने भवनों की जांच कर उन्हें मजबूत बनाया जाए. स्कूल, अस्पताल और सरकारी दफ्तरों को प्राथमिकता पर सुरक्षित किया जाए.साथ ही आम लोगों को भी जागरूक होना होगा. भूकंप आने पर क्या करना है और क्या नहीं, इसकी जानकारी हर घर तक पहुंचनी चाहिए. प्रशासन को भी आपदा प्रबंधन की तैयारियां मजबूत करनी होंगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत और बचाव का काम शुरू हो सके. आईआईटी की यह रिसर्च एक गंभीर चेतावनी है यह साफ बता रही है कि अगर समय रहते तैयारी नहीं की गई, तो बड़ा भूकंप भारी नुकसान पहुंचा सकता है. अभी मौका है कि शहर संभल जाएं और भविष्य के खतरे को कम करने के लिए ठोस कदम उठाएं.



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