6.5 की तीव्रता से ज्यादा का भूकंप आया तो खतरे में होंगे कानपुर, प्रयागराज, आईआईटी कानपुर की रिसर्च ने दी बड़ी चेतावनी
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आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा की अगुवाई में की गई रिसर्च में कहा गया है कि अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो इन शहरों में भारी नुकसान हो सकता है. खासकर गंगा किनारे और निचले इलाकों में खतरा ज्यादा बताया गया है. रिसर्च के मुताबिक यहां की जमीन कई जगहों पर ढीली और रेतीली है. ऐसी मिट्टी भूकंप के दौरान ज्यादा हिलती है और झटकों का असर बढ़ा देती है. यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है.
कानपुर: कानपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों के लिए एक अहम चेतावनी सामने आई है. आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर निहार रंजन पात्रा की अगुवाई में की गई रिसर्च में कहा गया है कि अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो इन शहरों में भारी नुकसान हो सकता है. खासकर गंगा किनारे और निचले इलाकों में खतरा ज्यादा बताया गया है. रिसर्च के मुताबिक यहां की जमीन कई जगहों पर ढीली और रेतीली है. ऐसी मिट्टी भूकंप के दौरान ज्यादा हिलती है और झटकों का असर बढ़ा देती है. यही वजह है कि वैज्ञानिकों ने पहले से तैयारी करने पर जोर दिया है.
17 साल पहले मिला प्रोजेक्ट
जमीन के नीचे छिपा है बड़ा खतरा
रिसर्च में सामने आया कि कई जगहों पर “लिक्विफैक्शन” का खतरा है. इसका मतलब यह है कि भूकंप के तेज झटकों के दौरान ठोस जमीन दलदल जैसी हो सकती है. ऐसी स्थिति में इमारतों की नींव कमजोर पड़ जाती है. बड़े-बड़े भवन झुक सकते हैं और पुराने मकान गिर भी सकते हैं. वैज्ञानिकों ने करीब 20 अलग-अलग जगहों से मिट्टी के सैंपल लिए. जांच में पाया गया कि गंगा किनारे के इलाके, पुराने मोहल्ले और ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र ज्यादा जोखिम में हैं. अगर 6.5 या उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आता है, तो सड़कें फट सकती हैं, जमीन में दरारें पड़ सकती हैं और कई इमारतों को गंभीर नुकसान हो सकता है.
नई इमारत बनाते समय रखें तकनीकि ख्याल