7,000 किलोमीटर की पदयात्रा कर गौ-सेवा का संदेश दिये बरेली के अमित कुमार, जाने आगे का प्लान

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7,000 किलोमीटर की पदयात्रा कर गौ-सेवा का संदेश दिये बरेली के अमित कुमार, जाने आगे का प्लान


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अमित कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए. बरेली के अमित कुमार ने अपनी यात्रा की शुरुआत किसी प्रसिद्धि या सोशल मीडिया पहचान के लिए नहीं, बल्कि गौ-सेवा के संकल्प के साथ की. इससे पहले वे केदारनाथ और बद्रीनाथ की साइकिल यात्रा भी कर चुके हैं. उसी दौरान उनके मन में विचार आया कि देशभर में घूमकर गौ-माता के संरक्षण और सेवा के लिए लोगों को जागरूक किया जाए.

बरेली: बरेली के रहने वाले अमित कुमार इन दिनों सोशल मीडिया और धार्मिक यात्राओं के कारण चर्चा में हैं. गौ-सेवा और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से उन्होंने करीब 7,000 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा पूरी की है. इस दौरान उन्होंने देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों, ज्योतिर्लिंगों, धामों और गोशालाओं का भ्रमण किया है. उनकी यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने रास्ते में लोगों को गौ-संरक्षण और सेवा का संदेश भी दिया.

गौ माता संरक्षण के लिए किए यात्रा

अमित कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया अपनी यात्रा के अनुभव साझा किए. बरेली के अमित कुमार ने अपनी यात्रा की शुरुआत किसी प्रसिद्धि या सोशल मीडिया पहचान के लिए नहीं, बल्कि गौ-सेवा के संकल्प के साथ की. इससे पहले वे केदारनाथ और बद्रीनाथ की साइकिल यात्रा भी कर चुके हैं. उसी दौरान उनके मन में विचार आया कि देशभर में घूमकर गौ-माता के संरक्षण और सेवा के लिए लोगों को जागरूक किया जाए.

7000 किमी कर चुके हैं यात्रा

अमित कुमार जी बताते हैं हम अचानक घर से निकल पड़े.परिवार ने पूरा सहयोग दिया. इसी वजह से यात्रा में कभी किसी प्रकार की परेशानी महसूस नहीं हुई.करीब 7,000 किलोमीटर की इस यात्रा के दौरान अमित कुमार विभिन्न राज्यों की गोशालाओं में पहुंचे.वहां उन्होंने व्यवस्थाओं को देखा, लोगों से बातचीत की और जहां भी कोई समस्या दिखाई दी, उसके समाधान के लिए प्रयास किए.अमित कुमार: “हर गोशाला में जाकर लोगों से मिले हर जगह कुछ नया सीखने को मिला, जहां भी कोई समस्या दिखी, वहां प्रबंधन से बात कर समाधान निकालने की कोशिश. यात्रा आसान नहीं थी. अमित रोजाना 40 से 45 किलोमीटर तक पैदल चलते थे. कई बार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी सामने आईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. कभी तबीयत खराब होने पर 10 किलोमीटर ही चल पाता थे लेकिन भगवान और गौ-माता की कृपा से यात्रा लगातार जारी रही.

युवाओं को संदेश देते हुए अमित कुमार कहते हैं कि यात्रा का उद्देश्य दिखावा नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति से जुड़ना होना चाहिए. उनका मानना है.कि युवाओं को सनातन मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाना चाहिए.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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