85 साल की सास बोलीं- वृंदावन जाना है, बहू सिर पर बिठाकर करा लाई 84 कोसी परिक्रमा

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85 साल की सास बोलीं- वृंदावन जाना है, बहू सिर पर बिठाकर करा लाई 84 कोसी परिक्रमा


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Mathura News : वृंदावन की 84 कोसी परिक्रमा में इस बार एक सास-बहू की जोड़ी दिल जीत रही है. बहू ने अपनी बुजुर्ग सास की सालों पुरानी मनोकामना को पूरा कराने के लिए अनोखा फैसला किया. प्रीति चौधरी अपनी 85 वर्षीय सास चंद्रो देवी को टब में बिठाकर 84 कोस परिक्रमा कराने निकलीं तो सब देखते रह गए. इसका वीडियो वायरल हो रहा है. लोग बहू के समर्पण और संस्कारों की जमकर तारीफ कर रहे हैं. बुजुर्गों की उपेक्षा करने वालों के लिए मिसाल बता रहे हैं.

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प्रीति चौधरी अपनी सास चंद्रो देवी को टब में बिठाकर 84 कोस परिक्रमा कराने निकलीं तो सब देखते रह गए.

मथुरा. वृंदावन की 84 कोसी परिक्रमा हमेशा से सुर्खियों में रही है. इस बार सास-बहू की एक अनूठी जोड़ी दिल जीत रही है. एक बहू ने अपनी बुजुर्ग सास की सालों पुरानी मनोकामना को पूरा करने के लिए अनोखा कदम उठाया. सास चलने-फिरने में सक्षम नहीं थी. ऐसे में बहू ने दिमाग लगाया और सास को टब में बैठाया फिर उन्हें सिर पर उठाकर ब्रज क्षेत्र की 84 कोसी परिक्रमा कराई. वृद्धावस्था और शारीरिक कमजोरी के कारण सास चल नहीं सकती थीं. पैदल चलकर 84 कोस की परिक्रमा करना उनके लिए संभव नहीं था. इसके बावजूद उनके मन में ब्रज परिक्रमा पूरी करने की गहरी इच्छा थी.

देखकर लोग भावुक
मथुरा जिले के कोसी कलां की रहने वाली की प्रीति चौधरी अपनी 85 वर्षीय सास चंद्रो देवी को टब में बिठाकर 84 कोस परिक्रमा कराने निकलीं तो सब देखते रह गए. ऐसे दौर में जब परिवारिक वैल्यू ढहते जा रहे हैं, प्रीति जैसी बहुएं उसे संभालने में जुटी हैं. प्रति ने सास की इच्छा को अपना संकल्प बनाया. उन्हें एक टब में बिठाया और सिर पर उठाकर परिक्रमा करानी शुरू कर दी. इस अनूठे पल को देखकर लोग भावुक हो गए. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. लोग बहू के समर्पण और संस्कारों की जमकर तारीफ कर रहे हैं.

इनके लिए जरूरी
कई किलोमीटर लंबी और कठिन मानी जाने वाली 84 कोस परिक्रमा को अकेले पूरा करना भी आसान नहीं है. प्रीति के लिए आसान नहीं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं खोई. इस परिक्रमा के लिए शारीरिक मेहनत, धैर्य और सबसे बढ़कर अटूट आस्था की जरूरत पड़ती है. इस बहू ने यह साबित कर दिया है कि अगर परिवार में प्रेम और संस्कार हों तो रिश्ते वाकई दिल से निभाए जाते हैं. बुजुर्गों की उपेक्षा करने वालों के लिए प्रीति मिसाल हैं.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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