Chuna Dari Waterfall : जन्नत जैसा खूबसूरत… लोग कहते हैं ‘मौत का कुंड’! जानें चुना दरी में क्यों पसरा खौफ?

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Chuna Dari Waterfall : जन्नत जैसा खूबसूरत… लोग कहते हैं ‘मौत का कुंड’! जानें चुना दरी में क्यों पसरा खौफ?


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Chuna Dari Waterfall News: मिर्जापुर का चुना दरी वाटरफॉल अपनी जन्नत जैसी खूबसूरती के लिए मशहूर है, लेकिन इसके पीछे छुपा है एक डरावना सच. स्थानीय लोग इसे ‘मौत का कुंड’ कहते हैं.आखिर चुना दरी में इन दिनों खौफ क्य…और पढ़ें

मिर्जापुर : उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में एक ऐसी भी दरी (वाटरफॉल) है, जिसे ‘मौत की दरी’ कहा जाता है. आंकड़ों के मुताबिक पिछले 4 सालों में 5 या 10 नहीं बल्कि दरी में अबतक 15 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. एहतियात के तौर पर प्रशासन ने दरी में पर्यटकों के जाने पर रोक लगा दिया है. मिर्जापुर जिले के अहरौरा में स्थित चुना दरी को ‘मौत का कुंड’ कहा जाता है. इसके आगोश में आने पर इंसान सिर्फ लाश बनकर बाहर आता है. इस साल मानसून सीजन में अबतक तीन लोगों की जान जा चुकी है. प्रशासन ने दरी में जाने पर पूरी तरह से रोक लगा दिया है. वहीं, सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है.

मिर्जापुर जिला पर्यटन का बड़ा केंद्र है. यहां पर कई ऐसे दरी और वाटरफॉल है जिनके अनकहीं और अनसुने किस्से हैं. मिर्जापुर जिले के अहरौरा में लखनिया दरी है. जिसमें अंदर चुना दरी है. चुना दरी से पानी बहकर लखनिया दरी में आता है. करीब 50 फीट से ज्यादा ऊपर से चुना दरी में पानी गिरता है. इस दृश्य को देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. हालांकि, कई बार लापरवाही में लोगों की जान चली गई है. पिछले चार सालों में इस दरी में 15 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. स्नान करते वक्त डूबने से सभी की जान चली गई है.

सुरक्षा को लेकर हो इंतजाम
नगर पालिका अहरौरा के अध्यक्ष ओम प्रकाश केसरी ने बताया कि लखनिया दरी प्राचीन जलप्रपात है. यहां हर साल स्नान करते वक्त कई लोगों की जान चली जाती है. घटना घटने की वजह से दिक्कतें होती है. प्रशासन की ओर से निश्चित स्थान तय कर दें. वहां पर कैंटीन की व्यवस्था होनी चाहिए. सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम करना चाहिए. आम लोगों को भी इसपर ध्यान देना चाहिए. अपने विवेक का इस्तेमाल करें और तय स्थान से आगे नहीं जाएं.

बैरिकेडिंग है और न ही सुरक्षा के इंतजाम
प्रमोद केसरी ने कहा कि लखनिया दरी से दो किलोमीटर दूर चुना दरी है. यह प्रांतीय स्तर का जलप्रपात है. यहां पर पार्किंग के नाम पर वसूली होती है, लेकिन सुरक्षा के नाम पर कोई इंतजाम नहीं रहता है. न बैरिकेडिंग है और न ही अन्य सुरक्षा के लिए काम हुआ है. इसपर न विधायक ध्यान देते हैं और न ही सांसद ध्यान देते हैं. जिसकी असामयिक मौत होती है. उसके परिवार के लोगों को सबसे ज्यादा दर्द होता है. वहीं महेंद्र अग्रहरि ने बताया कि लखनिया दरी में सुरक्षा के लिए प्रशासन स्तर पर इंतज़ाम होना चाहिए. क्योकि, जिनकी मौत होती है. उनके ही परिजनों को दर्द होता है.

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