राजू पाल सिंह: वो विधायक, जिनका दिनदहाड़े हुआ मर्डर, 5KM तक दौड़ाकर मारी गोली
साल 2002 में राजू पाल ने पहली बार प्रयागराज पश्चिम विधानसभा सीट से अतीक अहमद के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. साल 2004 में अतीक लोकसभा के फूलपुर सीट से सांसद बने और विधानसभा सीट अपने भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ़ के लिए छोड़ दी. इस उपचुनाव में मुलायम सिंह यादव के करीबी अतीक के सामने मायावती ने अतीक के कट्टर विरोधी राजू पाल को टिकट दिया. नतीजा चौंकाने वाला रहा था. राजू पाल ने 4,818 वोटों के मामूली अंतर से खालिद अजीम को हरा दिया. यह हार अतीक परिवार के लिए बड़ी चोट थी, क्योंकि 1989 से इस सीट पर अतीक का दबदबा था.
25 जनवरी 2005: दिनदहाड़े गोलियों की बौछार
FIR में अतीक और अशरफ के नाम
हत्या के बाद राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने अतीक अहमद, उनके भाई मोहम्मद अशरफ़ और गिरोह के अन्य सदस्यों (फरहान, आबिद, रंजीत पाल, गुफ़रान समेत नौ लोग) के खिलाफ़ केस दर्ज कराया. यह मामला प्रयागराज की राजनीति का सबसे चर्चित और हाई-प्रोफ़ाइल केस बन गया.
सीट पर फिर अतीक परिवार की वापसी
गवाह उमेश पाल की हत्या
साल 2023 में एक और बड़ा कांड हुआ. राजू पाल हत्याकांड में नई कड़ी तब जुड़ी जब इस कांड के गवाह उमेश पाल की हत्या कर दी गई. दिलचस्प यह है कि 2005 से 2016 तक पूजा पाल और उमेश पाल के रिश्ते बेहद ठंडे थे. कभी अतीक अहमद के नज़दीकी माने जाने वाले उमेश ने एक समय अदालत में उनके पक्ष में बयान भी दिया था. साल 2016 में सुलह की कोशिश हुई, लेकिन पूजा का गुस्सा पूरी तरह ठंडा नहीं हुआ. यहां तक कि उमेश की पत्नी को उन्होंने उनके दोहरी नीति पर फटकार तक लगाई थी. उमेश की हत्या के बाद अंतिम संस्कार में भी पूजा और उमेश के परिवार के बीच तीखी नोकझोंक हुई.