दवाओं का ‘कारखाना’ है यह पेड़, जड़ से लेकर छाल तक औषधि, पाइल्स समेत दर्जनभर रोगों में कारगर
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Benefits of Gular: कल्पना कीजिए, एक ऐसा फल जो न सिर्फ स्वादिष्ट हो, बल्कि आपके शरीर को अंदर से मजबूत भी बनाए. जी हां, हम बात कर रहे हैं गूलर की. गूलर, जिसे अंग्रेजी में Wild Fig कहा जाता है, एक प्राकृतिक औषधि है जो सदियों से आयुर्वेद में उपयोग की जा रही है. इसके औषधीय गुण और स्वास्थ्य लाभ इतने अधिक हैं कि यह किसी चमत्कारिक औषधि से कम नहीं है. यह सिर्फ एक पेड़ का फल नहीं है, बल्कि इसे अनेक रोगों के उपचार में भी प्रभावी माना जाता है. आज के समय में लोग जब स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए प्राकृतिक विकल्प ढूंढते हैं, तो गूलर को अपनाना बेहद फायदेमंद हो सकता है.

भारत में पाए जाने वाले गूलर का पेड़ आयुर्वेदिक चिकित्सा में विशेष महत्व रखता है. इस पेड़ का हर हिस्सा औषधीय गुणों से भरपूर होता है. गूलर के फल, पत्ते और छाल का उपयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज में किया जाता है. गूलर के फल में पोषक तत्वों की भरमार होती है. इसमें बहुत से विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते है. इसके पत्तों में भी औषधीय गुण मौजूद है. छाल का उपयोग आयुर्वेदिक दवाओं में किया जाता है. गूलर के नियमित इस्तेमाल से कई बड़ी बीमारियां गायब हो जाती है.

जिला अस्पताल बाराबंकी के चिकित्सक डॉक्टर अमित वर्मा (एमडी मेडिसिन ) ने लोकल 18 से बातचीत में बताया गूलर एक ऐसा पेड़ है. जिसके फल तना वह पत्तियां छाल में कई सारे गुण मौजूद होते हैं. जैसे पोटेशियम , फास्फोरस, मैग्नीशियम,आयरन और मैगनीज जैसे मिनरल पोषक तत्व पाएं जाते हैं जो हमें कई बीमारियों से बचाते हैं.

बवासीर की समस्या में गूलर के दूध की 10-20 बूंदों को जल में मिलाकर पिलाने से रक्तार्श (खूनी बवासीर) और रक्त विकारों में लाभ होता है. गूलर के दूध को मस्सों पर लेप करें. उपचार के दौरान घी का अधिक सेवन करें गूलर के दूध में रूई का फाहा भिगोकर भगन्दर के अंदर रखें. इसे रोज बदलते रहने से भगन्दर अच्छा हो जाता है.

लिकोरिया की समस्या में गूलर का 5-10 ग्राम रस को मिश्री के साथ मिलाकर सुबह शाम पिएं. इससे सफेद पानी या ल्यूकोरिया में लाभ होता है. इसमें मधु मिलाकर पीने से मासिक धर्म विकार ठीक होता है.

मुंह के छाले की समस्या में गूलर की छाल से बने 250 मिली काढ़ा में 3 ग्राम कत्था व 1 ग्राम फिटकरी मिला लें. इसका कुल्ला करने से मुंह के रोगों में लाभ होता है।गूलर के पत्तों के ऊपर के दानों को मिश्री के साथ पीस लें. इसका सेवन करने से गर्मी के कारण होने वाले मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं.

डायबिटीज की समस्या में गूलर के फलों के सूखे छिल्कों को बीज रहित महीन पीस लें. इसमें बराबर भाग में मिश्री मिला लें. इसे 6-6 ग्राम सुबह-शाम गाय के दूध के साथ सेवन करने से डायबिटीज में लाभ होता है.

बुखार की समस्या में गूलर की ताजी जड़ के 5-10 मिली रस में, या जड़ की छाल के 20-30 मिली रस को 10 गुना पानी में भिगो लें. इसे तीन घंटे बाद छानकर चीनी में मिला लें. इसे सुबह और शाम पीने से बुखार में लगने वाली प्यास की परेशानी में लाभ होता है. 1 ग्राम गूलर की गोंद तथा 3 ग्राम चीनी को मिलाकर सेवन करने से पित्त दोष के कारण होने वाला बुखार और जलन ठीक होती है.