एसटी हसन का बड़ा बयान, धर्म नहीं, इंसानियत के आधार पर मिले शरण, CAA पर उठाए सवाल

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एसटी हसन का बड़ा बयान, धर्म नहीं, इंसानियत के आधार पर मिले शरण, CAA पर उठाए सवाल


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Moradabad News: मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने शरणार्थियों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को पड़ोसी देशों से प्रताड़ित होकर आने वाले लोगों को धर्म के आधार पर नहीं, …और पढ़ें

एसटी हसन का बड़ा बयान, धर्म नहीं, इंसानियत के आधार पर मिले शरणएसटी हसन.
मुरादाबाद: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और मुरादाबाद से पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन ने शरणार्थियों और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत को अपने पड़ोसी देशों से प्रताड़ित होकर आने वाले लोगों को शरण देनी चाहिए, चाहे वे किसी भी धर्म के क्यों न हों. उनका मानना है कि भारत हमेशा से मानवता की मिसाल रहा है और उसे यह भूमिका आज भी निभानी चाहिए.

मीडिया से बातचीत के दौरान डॉ. हसन ने कहा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार (वर्मा) और श्रीलंका जैसे देशों से यदि कोई व्यक्ति जान का खतरा महसूस करते हुए भारत आता है, तो उसे शरण मिलनी ही चाहिए. उन्होंने कहा, ‘जो लोग वाकई प्रताड़ित हैं, जिनकी जान को खतरा है, उनके बच्चों की सुरक्षा दांव पर है, अगर वे भारत में शरण लेते हैं, तो उन्हें इनसानियत के नाते ठिकाना दिया जाना चाहिए. जब उनके देश में हालात सामान्य हो जाएं, तब उन्हें सम्मानपूर्वक वापस भेजा जा सकता है.’

पूर्व सांसद ने नागरिकता संशोधन कानून पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि CAA में धर्म के आधार पर भेदभाव किया गया है, जो संविधान की भावना के विरुद्ध है. उन्होंने कहा कि इस कानून में हिंदू, सिख, बौद्ध, ईसाई, पारसी और जैन धर्म के लोगों को तो नागरिकता देने की बात है, लेकिन मुसलमानों को इससे बाहर रखा गया है. हमने गृह मंत्री से यही कहा था कि अगर कोई मुसलमान भी किसी देश में प्रताड़ित हो रहा है तो उसे भी शामिल किया जाए। क्या मुसलमान प्रताड़ित नहीं हो सकता?

डॉ. हसन ने स्पष्ट किया कि उनका आशय यह नहीं है कि लाखों लोगों को एक साथ देश में प्रवेश करने की अनुमति दे दी जाए. उन्होंने कहा कि केवल वही लोग जो जान बचाने के लिए भारत में शरण ले रहे हैं, उन्हें ही अनुमति दी जाए, और यह काम मानवीय दृष्टिकोण से किया जाए. उन्होंने आगे कहा कि आज की राजनीति को जानबूझकर हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखा जा रहा है, जो न केवल खतरनाक है, बल्कि लोकतंत्र के लिए भी घातक है. ‘हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देना सही नहीं है. हमें धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता देनी चाहिए.’

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 में लागू किया गया था, जिसके तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान किया गया था. इस कानून को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए थे और विपक्षी दलों ने इसे धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ बताया था. डॉ. हसन के इस बयान से एक बार फिर CAA और शरणार्थियों को लेकर बहस तेज हो सकती है. उनका यह रुख समाजवादी पार्टी की धर्मनिरपेक्ष सोच को दर्शाता है, जो हर मजहब के लोगों को बराबरी का दर्जा देने की बात करती रही है.

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Abhijeet Chauhan

न्‍यूज18 हिंदी डिजिटल में कार्यरत. वेब स्‍टोरी और AI आधारित कंटेंट में रूचि. राजनीति, क्राइम, मनोरंजन से जुड़ी खबरों को लिखने में रूचि.

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