भीख नहीं, सम्मान चाहिए, पैंट-बैग की चेन लगाकर चलाता है घर…, नेत्रहीन रामू की कहानी सुनकर आंखें हो जाएंगी नम
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Kaushambi News: उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के नेत्रहीन रामू की कहानी हिम्मत, आत्मनिर्भरता और मेहनत की मिसाल है. जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद रामू ने भीख मांगने के बजाय अपने हाथों से हुनर सीखा और गांव-गांव घूमकर बैग, पैंट और जैकेट में चेन लगाने का काम शुरू किया. रोज़ करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर वह अपनी रोज़ी कमाते हैं और अपने वृद्ध माता-पिता का भी पालन-पोषण करते हैं.
कौशांबी की सिराथू तहसील के जहांगीराबाद गांव निवासी 30 वर्षीय रामू जन्म से ही नेत्रहीन हैं. उनका छोटा भाई और उसकी पत्नी पहले ही वृद्ध माता-पिता का साथ छोड़ चुके हैं. अब माता-पिता का एकमात्र सहारा हैं रामू, जिन्होंने कभी भी अपनी मजबूरी को कमजोरी नहीं बनने दिया. रामू रोजाना एक छड़ी के सहारे करीब 20 किलोमीटर पैदल चलते और गांव-गांव जाकर बैग, पैंट और जैकेट की चेन लगाने का काम करते हैं.
कैसे सीखा चेन लगाने का हुनर?
रामू पहले अपने माता-पिता के साथ बर्तन बनाने का काम करते थे, लेकिन उसमें मन नहीं लगने पर उन्होंने खुद से कुछ नया सीखने का निश्चय किया. उन्होंने घर में रखे पुराने कपड़ों से चेन लगाने की कोशिश शुरू की. छू-छूकर, अनुभव से, बिना किसी शिक्षक के, उन्होंने बिना देखे चेन लगाना सीख लिया. धीरे-धीरे गांव के लोग भी उनके काम से खुश होकर अपने पुराने बैग, पैंट और जैकेट की चेन लगवाने उनके पास आने लगे. आज वह लगभग 7 सालों से यह काम कर रहे हैं.
रोज कितनी कमाई?
रामू बताते हैं कि रोजाना की कमाई 100 से 250 तक हो जाती है. इसी से घर का राशन और जरूरी खर्च निकलता है. रामू जब किसी गांव में प्रवेश करते हैं, तो गानों की धुन पर चेन लगाने की आवाज लगाते हैं, जिससे लोग जान जाते हैं कि रामू आ गया है. लोगों के तानों के बावजूद रामू कभी पीछे नहीं हटे. उनका कहना है, ‘भगवान ने आंखें नहीं दीं, पर हाथ दिए हैं और दिमाग भी-तो क्यों न मेहनत से जिया जाए?’
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा…और पढ़ें
राहुल गोयल सीनियर पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया 16 साल से ज्यादा का अनुभव है. साल 2011 में पत्रकारिता का सफर शुरू किया. नवभारत टाइम्स, वॉयस ऑफ लखनऊ, दैनिक भास्कर, पत्रिका जैसे संस्थानों में काम करने का अनुभव. सा… और पढ़ें