23.86 करोड़ से बनेगा चंदौली का पहला स्टेडियम, खिलाड़ियों की होगी बल्ले-बल्ले, मिलेंगी कई आधुनिक सुविधाएं
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Good News: चंदौली जिले के लिए एक अच्छी खबर है. यहां के धरहरा गांव के रहने वाले खिलाड़ियों को जल्दी ही सरकार की तरफ से करोड़ों का तोहफा मिल सकता है. दरअसल, यहां बनने जा रहे स्टेडियम का काम बीच में ही रुक गया था. मगर, अब एक बार फिर लोगों में स्टेडियम बनने की उम्मीद जगी है.
चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक अच्छी खबर आ रही है. यहां के धरहरा गांव में साल 2019-20 से पहले स्टेडियम के निर्माण की कवायद चल रही है. यह स्टेडियम चंदौली के खिलाड़ियों के लिए एक बड़े सपने की तरह है, लेकिन कुछ तकनीकी कारणों के चलते इसका निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया था. हालांकि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक बड़ा और हर ब्लॉक में एक मिनी स्टेडियम बनाने की घोषणा के बाद धरहरा में स्टेडियम बनने की उम्मीद एक बार फिर मजबूत हुई है.
खिलाड़ी का घर होता है स्टेडियम
स्पोर्ट्स कोच नंद जी ने लोकल 18 से बातचीत कर अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं. उन्होंने कहा कि मीडिया ने स्टेडियम जैसे अहम मुद्दे को उठाया, जो खिलाड़ियों के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है. जैसे किसी इंसान के लिए रहने को छत जरूरी होती है, वैसे ही एक खिलाड़ी के लिए स्टेडियम उसका घर होता है. अगर खिलाड़ी के पास स्टेडियम न हो, तो वह भी बिन घर का ही होता है.
विधानसभा में उठाया गया था यह मुद्दा
नंद जी ने बताया कि उन्होंने और उनकी टीम ने विभिन्न खेल संस्थाओं के साथ मिलकर स्टेडियम के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया है. उन्होंने कहा कि यह संघर्ष भले ही कठिन रहा हो, लेकिन यह अब तक का सबसे भावनात्मक और यादगार अनुभव है. उन्होंने पिछले वर्ष की घटना का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने लगभग 4.5 किलोमीटर तक दंडवत लेटकर जीटी रोड से होते हुए वर्तमान विधायक रमेश जायसवाल को ज्ञापन सौंपा था. इसके बाद विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया गया और कुंडलिया में भूमि पूजन भी हुआ, जिसमें तत्कालीन जिलाधिकारी, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद थे.
एक दिन जरूर साकार होगा यह सपना
हालांकि, भूमि पूजन और घोषणाओं के बावजूद अब तक धरातल पर निर्माण कार्य शुरू न होने से खिलाड़ियों में निराशा है. नंद जी ने कहा कि स्थिति ऐसी है जैसे न इधर कुआं, न उधर खाई वाली कहावत है, फिर भी उन्होंने विश्वास और उम्मीद को ही जीवन का आधार बताया. उन्होंने कहा कि जैसे सूर्यास्त के बाद अगला दिन सूर्योदय लेकर आता है, वैसे ही उम्मीद है कि धरहरा में स्टेडियम का सपना भी एक दिन जरूर साकार होगा. खिलाड़ियों ने कई बार सुना है कि फंड आ गया है, काम शुरू होगा, लेकिन अब तक सिर्फ बातें ही हुई हैं, फिर भी चंदौली के खिलाड़ी उसी उम्मीद पर जी रहे हैं कि कभी न कभी उन्हें यह सौगात जरूर मिलेगी और वे अपने जिले का नाम रोशन कर सकेंगे.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें