अयोध्या के इस मंदिर में विराजमान हैं माता सीता की कुलदेवी, त्रेतायुग से जुड़ा है इतिहास

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अयोध्या के इस मंदिर में विराजमान हैं माता सीता की कुलदेवी, त्रेतायुग से जुड़ा है इतिहास


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Dharohar : अयोध्या का छोटी देवकाली मंदिर गहरी आस्था और प्राचीन परंपरा का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में माता सीता विवाह के बाद जनकपुर से अयोध्या आते समय अपनी कुलदेवी को भी साथ लाई थीं और राम मंदिर के ईशान कोण में उनकी स्थापना की गई. यहां माता पार्वती के गौरी स्वरूप में छोटी देवकाली विराजमान हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, इसलिए प्रतिदिन हजारों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

अयोध्या:-अयोध्या में प्राचीन मठ-मंदिरों और धार्मिक धरोहरों की समृद्ध परंपरा रही है. यहां का हर मंदिर अपनी अलग मान्यता, इतिहास और आध्यात्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है. इन्हीं में एक अत्यंत श्रद्धा और आस्था का केंद्र है छोटी देवकाली मंदिर, जिसे माता सीता की कुलदेवी का मंदिर माना जाता है. इस मंदिर की महिमा और इतिहास त्रेता युग से जुड़ा हुआ बताया जाता है. जिसके कारण यह अयोध्या के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. तो चलिए आज हम आपको इस रिपोर्ट में इस मंदिर का इतिहास और रहस्य के बारे में विस्तार से बताते हैं.

सीता के साथ अयोध्या आईं कुलदेवी, ईशान कोण में हुई स्थापना

मान्यता के अनुसार जब सीता का विवाह राम के साथ हुआ और वह जनकपुर से अयोध्या आईं, तब वह अपनी कुलदेवी को भी अपने साथ लेकर आई थीं. कहा जाता है कि माता जानकी ने अपनी कुलदेवी को अयोध्या में स्थापित कराया था. यह स्थान राम मंदिर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में माना जाता है, जहां माता छोटी देवकाली का मंदिर स्थापित किया गया है.

माता गौरी स्वरूप में विराजमान छोटी देवकाली, दर्शन से पूर्ण होती हैं मनोकामनाएं

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस मंदिर में माता पार्वती के गौरी स्वरूप में छोटी देवकाली विराजमान हैं. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से दर्शन-पूजन करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर माता के चरणों में पूजा-अर्चना करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं. छोटी देवकाली मंदिर के महंत अजय त्रिवेदी के अनुसार यह मंदिर अयोध्या में माता सीता की कुलदेवी का प्रमुख स्थान है. त्रेता युग से जुड़े इस मंदिर की परंपरा आज भी जीवित है और यहां दूर-दराज से आने वाले भक्त अपनी श्रद्धा के साथ माता के दर्शन करते हैं. अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां माता छोटी देवकाली की कृपा प्राप्त करने के लिए हर दिन हजारों लोग पहुंचते हैं.

माता सीता की कुलदेवी के रूप में होती है पूजा

छोटी देवकाली मंदिर के महंत अजय त्रिवेदी ने बताया कि अयोध्या में माता-पिता की कुलदेवी के रूप में माता छोटी देवकाली विराजमान है इस मंदिर में माता गौरी के स्वरूप में माता पार्वती के स्वरूप में माता छोटी देवकाली विराजमान है यह माता जानकी की कुलदेवी है त्रेता युग में जब माता सीता का विवाह प्रभु राम के साथ हुआ था और माता सीता जनकपुर से अयोध्या आई थी तो माता जानकी अपने साथ अपनी कुलदेवी को भी लेकर आई थी जिसे राम मंदिर के ईशान कोण पर स्थापित किया गया था. यह मंदिर कई सौ वर्ष पुराना मंदिर है त्रेता युग से इसका संबंध है. इस मंदिर में दर्शन पूजन करने से व्यक्ति के समस्त मनोकामना पूरी होती है प्रतिदिन यहां हजारों की संख्या में लोग दर्शन पूजन भी कर अपनी मनोकामना की सिद्धि को पूरी करते हैं.

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Lalit Bhatt

पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें



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