मुरादाबाद में तैयार हो रही राधा-कृष्ण की अनोखी मूर्ति, गजब की है नक्काशी, देशभर से मिल रहे

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मुरादाबाद में तैयार हो रही राधा-कृष्ण की अनोखी मूर्ति, गजब की है नक्काशी, देशभर से मिल रहे


उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद अपनी पीतल कला के लिए पूरी दुनिया में पीतल नगरी के नाम से मशहूर है. यहां के कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पाद देश-विदेश तक एक्सपोर्ट होते हैं. इन दिनों मुरादाबाद के बाजारों में एक खास तरह की पीतल की राधा-कृष्ण मूर्ति चर्चा का केंद्र बनी हुई है, जिसमें राधा-कृष्ण उरली (पारंपरिक पात्र) पर झूला झूलते हुए नजर आते हैं. यह अनोखी डिजाइन लोगों को बेहद आकर्षित कर रही है और इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है.

कारीगरी का अद्भुत नमूना

पीतल कारोबारी नितिन खन्ना बताते हैं कि मुरादाबाद में हमेशा से ही धार्मिक मूर्तियों का निर्माण होता रहा है, लेकिन इस बार तैयार की जा रही राधा-कृष्ण उरली कुछ अलग और खास है. इसमें बारीक नक्काशी के जरिए राधा-कृष्ण को उरली में झूला झूलते हुए दिखाया गया है. यह डिजाइन पारंपरिक और आधुनिक कला का सुंदर संगम है, जो ग्राहकों को खूब पसंद आ रहा है.

हर साइज में उपलब्ध मूर्तियां

इस खास मूर्ति को छोटे से लेकर बड़े आकार में तैयार किया जा रहा है. करीब 4 इंच से लेकर कई किलो वजन तक की मूर्तियां बाजार में उपलब्ध हैं. ग्राहक अपनी जरूरत और बजट के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं. साथ ही ऑर्डर पर भी विशेष डिजाइन की मूर्तियां तैयार कराई जा रही हैं, जिससे ग्राहकों को कस्टमाइजेशन की सुविधा मिल रही है.

गिफ्ट आइटम के रूप में बढ़ी लोकप्रियता

राधा-कृष्ण उरली की यह मूर्ति सिर्फ पूजा के लिए ही नहीं, बल्कि गिफ्ट आइटम के रूप में भी काफी लोकप्रिय हो रही है. खासकर त्योहारों, शादियों और खास मौकों पर लोग इसे उपहार के रूप में देना पसंद कर रहे हैं. इसकी सुंदरता और धार्मिक महत्व इसे एक परफेक्ट गिफ्ट बनाता है.

देशभर से मिल रहे ऑर्डर

मुरादाबाद की इस खास मूर्ति की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. नासिक, मुंबई, पुणे और दक्षिण भारत के कई हिस्सों से इसकी बड़ी संख्या में डिमांड आ रही है. कारोबारी बताते हैं कि सालभर इस मूर्ति की मांग बनी रहती है और हर सीजन में इसकी बिक्री अच्छी होती है.

कीमत भी हर बजट में

कीमत की बात करें तो राधा-कृष्ण उरली की मूर्ति करीब 1000 रुपये से शुरू होकर हजारों रुपये तक उपलब्ध है. इसकी कीमत आकार, डिजाइन और नक्काशी के अनुसार तय होती है. कुल मिलाकर, मुरादाबाद की यह अनोखी कारीगरी न सिर्फ स्थानीय कारीगरों की पहचान को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें बेहतर आमदनी का भी जरिया बना रही है.



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