खरबूजा की खेती का कमाल! कम लागत और देसी तरीके से किसान कमा रहा तगड़ा मुनाफा
Last Updated:
Muskmelon Farming Profit: रामपुर के प्रगतिशील किसान नारायण सिंह ने मधु खरबूजा की खेती से मुनाफे की नई राह दिखाई है. महज 5400 रुपये के बीज से शुरू हुई यह खेती आज लाखों का मुनाफा दे रही है. खास बात यह है कि नारायण सिंह ने पूरी तरह देसी और जैविक तरीके अपनाकर न केवल लागत कम की, बल्कि फलों की मिठास और गुणवत्ता भी बढ़ा दी है. 70 से 80 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल किसानों के लिए कम समय में अमीर बनने का एक शानदार जरिया साबित हो रही है.
रामपुर: खेती-किसानी में जब सही तकनीक और देसी तरीके मिल जाते हैं, तो मिट्टी भी सोना उगलने लगती है. रामपुर के किसान नारायण सिंह ने इसे सच कर दिखाया है. उन्होंने अपनी एक एकड़ जमीन पर मधु खरबूजा की फसल लगाई है और कम लागत में शानदार मुनाफा कमाकर इलाके के दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं. नारायण सिंह पूरी तरह देसी और जैविक तरीके से खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी फसल बाजार में अपनी मिठास और शुद्धता के लिए अलग ही पहचान बना रही है.
कम लागत और बंपर कमाई का पूरा हिसाब
नारायण सिंह बताते हैं कि उन्होंने एक एकड़ खेत के लिए करीब 5400 रुपये के बीजों का इस्तेमाल किया. अगर पूरी लागत की बात करें, तो प्रति बीघा करीब 15 हजार रुपये का खर्च आता है. लेकिन इसके मुकाबले मुनाफा काफी शानदार है. लागत निकालने के बाद एक बीघे से करीब 20 हजार रुपये की शुद्ध बचत हो रही है. इस हिसाब से पूरे एक एकड़ की फसल किसान की झोली खुशियों से भर रही है. बाजार में अभी उन्हें 25 से 30 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जो एक किसान के लिए बहुत अच्छा रेट माना जाता है.
स्वाद में बेमिसाल और बाजार में भारी मांग
मधु खरबूजा की सबसे बड़ी खासियत इसका लाजवाब स्वाद और सही आकार है. एक फल का वजन आधा किलो से लेकर डेढ़ किलो तक होता है, जो ग्राहकों को काफी पसंद आता है. इसके अंदर का गूदा हल्का नारंगी और बेहद मीठा होता है, जिसकी वजह से बाजार में इसकी डिमांड कभी कम नहीं होती. फल थोड़े सख्त होते हैं, इसलिए इन्हें दूर-दराज की मंडियों तक भेजने में टूट-फूट का डर नहीं रहता और किसान को पूरा दाम मिल जाता है.
80 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
नारायण सिंह के अनुसार, यह फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है. बीज बोने के लगभग 25 से 30 दिन बाद बेलें फैलने लगती हैं और उन पर फूल आने शुरू हो जाते हैं. इसके बाद 45 से 50 दिन में छोटे-छोटे फल दिखने लगते हैं और करीब 70 से 80 दिन बीतते-बीतते खरबूजा पूरी तरह पककर तैयार हो जाता है. कम समय में तैयार होने की वजह से यह उन किसानों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो जल्दी मुनाफा कमाना चाहते हैं.
देसी खाद और जैविक तरीके से मिट्टी की सेहत भी बरकरार
नारायण सिंह बताते हैं कि उन्होंने अपनी फसल में रासायनिक खाद के बजाय गोबर की खाद और जैविक तरीकों को प्राथमिकता दी है. देसी तरीके से खेती करने का बड़ा फायदा यह है कि इसमें बीमारियां कम लगती हैं और केमिकल का इस्तेमाल न के बराबर होता है. इससे न केवल खरबूजे का प्राकृतिक स्वाद बना रहता है, बल्कि खेत की मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी सुरक्षित रहती है. सही देखभाल और समय पर सिंचाई की जाए, तो एक एकड़ से 80-90 क्विंटल तक उत्पादन आसानी से लिया जा सकता है.
About the Author
सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें