क्या है बरेली में ‘भीम की गदा’ का रहस्य, जानिए अहिच्छत्र किले का टीला बना आस्था और इतिहास!

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क्या है बरेली में ‘भीम की गदा’ का रहस्य, जानिए अहिच्छत्र किले का टीला बना आस्था और इतिहास!


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बरेली जिले के रामनगर स्थित अहिच्छत्र किले के खंडहरों में मौजूद एक विशाल टीले को स्थानीय लोग “भीम की गदा” से जोड़ते हैं. मान्यता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान महाबली भीम ने यहां विश्राम किया था. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन इस क्षेत्र में खुदाई के दौरान प्राचीन अवशेष मिलते रहे हैं, जिससे इसकी ऐतिहासिक महत्ता बढ़ जाती है. पंचाल राज्य, द्रौपदी और प्राचीन शिव मंदिरों से जुड़े दावों के कारण यह स्थान आस्था और इतिहास दोनों का केंद्र बना हुआ है.

बरेली. अहिच्छत्र किले के बीचों-बीच एक ऊंचा, पहाड़ीनुमा टीला है जिसे स्थानीय लोग ‘भीम गदा’ या ‘भीम शिला खंड’ कहते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडवों के अज्ञातवास के दौरान महाबली भीम ने इसी स्थान पर विश्राम किया था और अपनी गदा यहीं छोड़ दी थी. प्रशासन वर्तमान में यह पूरा क्षेत्र भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में है और यहां खुदाई के दौरान कई प्राचीन मूर्तियां व अवशेष मिलते रहते हैं. बरेली में ‘भीम की गदा’ के नाम से प्रसिद्ध स्थान अहिच्छत्र किले के खंडहरों में स्थित एक विशाल टीला है. यह ऐतिहासिक स्थल बरेली जिले की आंवला तहसील के रामनगर गांव के पास स्थित है. उत्तर प्रदेश का शहर बरेली एक बार फिर अपने प्राचीन इतिहास और महाभारतकालीन संदर्भों को लेकर चर्चा में है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह क्षेत्र प्राचीन पंचाल राज्य का हिस्सा माना जाता है. जहां राजा द्रुपद का शासन था, उनकी पुत्री द्रौपदी, जिन्हें “पांचाली” भी कहा जाता है, उनका संबंध भी इसी क्षेत्र से जोड़ा जाता है.

स्थानीय लोग इसे मानते हैं भीम से जुड़ा स्थान 

बरेली से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित रामनगर को लेकर भी कई रोचक दावे सामने आते हैं. यहां आज भी ‘भीम का गदा रखा हुआ है’ ऐसी मान्यता प्रचलित है, और स्थानीय लोग इसे भीम से जुड़ा स्थान मानते हैं. क्षेत्र में प्राचीन टीले और संरचनाओं के अवशेष भी देखे जाते हैं, जो इसे ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं. बरेली के वरिष्ठ इतिहासकार राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, रामनगर क्षेत्र में कई ऐसे स्थल हैं, जहां से समय-समय पर प्राचीन अवशेष मिलने की बातें सामने आती रही हैं, जिससे इस क्षेत्र की ऐतिहासिकता को लेकर उत्सुकता बनी रहती है. इतिहासकारों का यह भी मानना है कि प्राचीन काल में इस क्षेत्र में जैन धर्म के अनुयायियों की अच्छी-खासी उपस्थिति रही, जिसके कारण यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्रौपदी भगवान शिव की उपासक थी. बरेली क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिव मंदिरों से भी उनका संबंध बताया जाता है. इनमें प्रमुख है बनखंडी नाथ मंदिर, जिसे अत्यंत प्राचीन और आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें



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