सम्राट अकबर का वो ‘शाही दरवाजा’ जिसके सीने में दफन हैं इतिहास के ये 8 अनसुने किस्से

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सम्राट अकबर का वो ‘शाही दरवाजा’ जिसके सीने में दफन हैं इतिहास के ये 8 अनसुने किस्से


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Agra Delhi Gate History: ताजनगरी आगरा सिर्फ ताजमहल के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सीने में मुग़ल सल्तनत और आज़ादी की जंग के कई अनसुने पन्नों को समेटे हुए है. ऐसा ही एक ऐतिहासिक पन्ना है हरिपर्वत चौराहे के पास स्थित ‘दिल्ली गेट’. लाल बलुआ पत्थरों से तराशा गया यह भव्य दरवाज़ा कभी मुग़ल बादशाहों और शाही काफिलों का मुख्य प्रवेश द्वार हुआ करता था, जो आज भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक अभेद्य धरोहर के रूप में खड़ा है. आइए जानते हैं इस शाही दरवाज़े का वो गौरवशाली इतिहास, जिससे आज भी आम लोग अनभिज्ञ हैं.

आगरा के हरिपर्वत चौराहे के पास स्थित दिल्ली गेट का इतिहास मुग़लकाल से जुड़ा हुआ है. आज वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन यह इमारत लाल बलुआ पत्थरों से बनी एक खूबसूरत इमारत है. इतिहासकार बताते हैं कि मुग़लकाल में इस गेट का इस्तेमाल मुग़ल बादशाह के प्रवेश और उनके काफ़िले के लिए किया जाता था. इसके अतिरिक्त दिल्ली गेट से आगरा किले में आने वाले शाही लोगों को भी प्रवेश दिया जाता था.

आगरा में बने दिल्ली गेट का निर्माण मुग़ल बादशाह सम्राट अकबर ने कराया था. इतिहासकार बताते हैं कि इसका निर्माण सन 1565 में किया गया था, जो 1566 में बनकर तैयार हुआ था. इस शाही गेट से बादशाह और उनके शाही मेहमान प्रवेश करते थे.

आगरा में बने दिल्ली गेट की वास्तुकला अद्भुत है. बताया जाता है कि दिल्ली गेट के अंदर हाथी पोल बना हुआ है, जिसे हाथी द्वार भी कहा जाता है. इस इमारत के दोनों ओर हाथियों की विशाल मूर्तियां थीं.

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आगरा में बने दिल्ली गेट का इतिहास मुग़लकाल से जुड़ा हुआ है. इसमें उस दौर की नक्काशी अद्भुत तरीके से उकेरी गई है. इतिहासकार ने बताया कि इस गेट को नक्काशी, ज्यामितीय फूलों के डिज़ाइनों और नीले, हरे व पीले रंग की चमकती टाइलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था.

आगरा के दिल्ली गेट का निर्माण बेहद तकनीकी रूप से किया गया था. इतिहासकार ने बताया कि इसे आक्रमणकारियों से बचाने के लिए टेढ़े-मेढ़े रास्तों और जाली वाले झरोखों के साथ एक अभेद्य सैन्य किलेबंदी के रूप में डिज़ाइन किया गया था.

आगरा में बने दिल्ली गेट को आम आदमी के लिए बंद किया गया है. आज इस ऐतिहासिक और संरक्षित गेट से आम जनता या पर्यटकों को गुज़रने की अनुमति नहीं है. यह पूरी तरह से सुरक्षित है.

आगरा में बने दिल्ली गेट को खास दरवाज़े के तौर पर माना जाता था. इतिहासकार के अनुसार, अफ़गान शासक शेरशाह सूरी के पुत्र सलीम शाह सूरी द्वारा शहर के चारों ओर बनवाई गई मजबूत चारदीवारी (11 दरवाज़ों) का यह सबसे प्रमुख द्वार माना जाता था.

आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने बताया कि दिल्ली गेट सन 1857 के स्वतंत्रता संग्राम की भयंकर लड़ाइयों का भी मूक गवाह रहा है. उस दौर में इस दरवाज़े ने स्वयं इस ग़दर को देखा था.

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