जौनपुर का वह ऐतिहासिक घर, जहां दिग्गज नेताओं का लगता था जमावड़ा

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जौनपुर का वह ऐतिहासिक घर, जहां दिग्गज नेताओं का लगता था जमावड़ा


जौनपुर: शहर के रासमंडल मोहल्ले में स्थित स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय रामेश्वर प्रसाद सिंह का आवास आज भी देश के स्वतंत्रता संग्राम की गौरवशाली यादों का साक्षी बना हुआ है. यह वही ऐतिहासिक भवन है, जहां आजादी की लड़ाई के दौरान देश के कई बड़े नेता ठहरते थे और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते थे. महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरोजिनी नायडू, पंडित मदन मोहन मालवीय और जयप्रकाश नारायण जैसे दिग्गज नेताओं का इस घर में आगमन हो चुका है.

राष्ट्रीय आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र

स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह की बहू डॉ. विमला सिंह ने बताया कि यह घर उस समय राष्ट्रीय आंदोलन का एक महत्वपूर्ण केंद्र हुआ करता था. देश के प्रमुख नेता जब जौनपुर आते थे तो अक्सर इसी आवास पर रुकते थे. यहां स्वतंत्रता आंदोलन की रणनीतियों से लेकर सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श होता था.

आ चुकी हैं कई मशहूर हस्तियां

डॉ. विमला सिंह ने बताया कि वर्ष 1927 में सरोजिनी नायडू इस घर में आई थीं. इसके बाद वर्ष 1928 में पंडित मोतीलाल नेहरू ने यहां आतिथ्य ग्रहण किया. देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1922 और 1937 में इस आवास पर पहुंचे थे. वर्ष 1937 में शिक्षाविद और स्वतंत्रता सेनानी पंडित मदन मोहन मालवीय तथा वर्ष 1938 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण का भी इस घर में आगमन हुआ था.

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1929 को प्रातः 8 बजे इस ऐतिहासिक प्रांगण में पधारे थे. गांधी जी के आगमन को लेकर परिवार आज भी गौरव महसूस करता है. उस समय उनके स्वागत के लिए बड़ी संख्या में लोग यहां एकत्र हुए थे.

डॉ. विमला सिंह ने बताया कि इस घर में श्रीप्रकाश, डॉ. सम्पूर्णानंद, आचार्य नरेंद्र देव, राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन, आचार्य जे.बी. कृपलानी, यूसुफ मेहर अली, सेठ गोविंद दास, फिरोज गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, कमलापति त्रिपाठी, चौधरी चरण सिंह, सी.बी. गुप्त, टी.एन. सिंह, डॉ. राममनोहर लोहिया, डॉ. सैयद महमूद, सैयद अली जहीर, कृष्णदत्त पालीवाल, केशवदेव मालवीय, मोहनलाल गौतम, निसार अहमद शेरवानी, हाफिज मुहम्मद इब्राहिम और चंद्रभाल जैसे अनेक राष्ट्रीय नेताओं का भी आगमन हुआ था.

भवन से जुड़ा है जौनपुर का गौरवशाली इतिहास

उन्होंने कहा कि यह भवन केवल एक परिवार की विरासत नहीं, बल्कि जौनपुर के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यहां देश के बड़े नेताओं का जमावड़ा लगता था और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होती थी.

गौरव, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत

आज भी यह ऐतिहासिक घर उस दौर की यादों को संजोए हुए है. डॉ. विमला सिंह का कहना है कि इस धरोहर का संरक्षण होना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां जान सकें कि जौनपुर की धरती ने देश के स्वतंत्रता आंदोलन में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. यह घर आज भी जौनपुर के गौरव, इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम की अमूल्य विरासत का प्रतीक बना हुआ है.



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