बलिया के प्रमोद का अनोखा प्रकृति प्रेम,बनाया पशु-पक्षियों का स्वर्ग,125 लोगों को रोजगार भी
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Ballia News: डीपी ज्वेलर्स के मालिक प्रमोद सर्राफ बताते है कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है. इसलिए उनके पास पर्याप्त समय रहता है. उन्होंने अपने गौशाला में कई नस्लों की गायें पाल रखी हैं. इनमें मुख्य रूप से गिर नस्ल की गाय शामिल है. इसके अलावा श्याम नस्ल की गाय भी है. जिसका नाम शायद ही आपने सुना हो. यह बेहद दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है.
बलिया: आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति से रूबरू करा रहे है जो अपने जन्मदिन को सचमुच जीते हुए दिखते है. उनकी पहचान न केवल एक सफल व्यवसायी के रूप में है, बल्कि प्रकृति और पशु-पक्षियों के सच्चे प्रेमी के रूप में भी हो चुकी है. सैकड़ों लोगों को रोजगार देने वाले इस शख्स ने अपने परिसर को हरियाली और जीव-जंतुओं का सुरक्षित ठिकाना बना दिया है. यहां अनेक प्रकार के दुर्लभ पशु-पक्षी और पेड़-पौधे देखने को मिलते हैं. दो अंधी गायों और बेसहारा बछड़ों की भी यहां सेवा की जा रही है. श्रीकृष्ण की प्रिय मानी जाने वाली गाय की नस्ल भी यहां मौजूद है.
डीपी ज्वेलर्स के मालिक प्रमोद सर्राफ बताते है कि उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) के तहत स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली है. इसलिए उनके पास पर्याप्त समय रहता है. उन्होंने अपने गौशाला में कई नस्लों की गायें पाल रखी हैं. इनमें मुख्य रूप से गिर नस्ल की गाय शामिल है. इसके अलावा श्याम नस्ल की गाय भी है. जिसका नाम शायद ही आपने सुना हो. यह बेहद दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है. मान्यता है कि भगवान कृष्ण के पिता नंद जी के पास लाखों गायें थीं, लेकिन जब भी श्रीकृष्ण बीमार पड़ते थे तो इसी नस्ल की गाय की पूंछ से स्पर्श करने पर बुखार या अन्य बीमारी ठीक हो जाती थी. उसी प्रजाति की गाय आज इनके पास है, जिसे विशेष रूप से पूजा-पाठ के लिए रखा गया है.
गौशाला में बछड़े भी सुरक्षित रखे गए है. प्रमोद सर्राफ अपनी गाय या बैल को किसी को बेचते नहीं हैं. वह दो अंधी गायों की भी सेवा कर रहे है. यहां पशुओं के साथ-साथ कई तरह के पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी है. उन्होंने हंस, लव बर्ड्स, घोड़ा-घोड़ी, काकातुआ और खरगोश जैसे कई जीव-जंतुओं को भी पाल रखा है. भले ही इससे कोई विशेष आर्थिक लाभ नहीं होता, लेकिन पशु प्रेमी होने के नाते इनके साथ रहना उन्हें सुखद लगता है. पशु-पक्षियों और वनौषधियों की देखभाल के लिए उन्होंने स्थायी रूप से कई लोगों को रोजगार दिया है. जो भी लोग यहां आते हैं, वे इन पशु-पक्षियों और हरियाली को देखकर सुकून महसूस करते है.
इनके घर के आसपास बने गार्डन में अनेक औषधीय पौधे भी लगे हुए है. जैसे- सिंदूर का पेड़, सीताफल, लाल चंदन, सेब का पेड़, सुदर्शन और अंगूर आदि. प्रमोद का कहना है कि अगर कोई शोधकर्ता यहां आए, तो इस जगह पर पूरी किताब लिख सकता है. उनका दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा जिस सिंदूर के पेड़ का जिक्र किया गया था वह पेड़ भी उनके गार्डन में मौजूद है.
इस गौशाला में 3 लोग 365 दिन और 24 घंटे रहकर देखभाल करते हैं. कुल मिलाकर 125 लोगों को उन्होंने रोजगार दिया है और आज यह सैकड़ों परिवारों की आजीविका का आधार बने हुए है. उन्हें गाय, वृक्ष, पशु-पक्षियों के बीच रहना बेहद अच्छा लगता है. उनका जन्म 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस के दिन हुआ था. गौशाला की किसी भी गाय का दूध वे बेचते नहीं है. जब दूध परिवार की आवश्यकता से अधिक हो जाता है तो स्टाफ इसे पीता है. पूजा के लिए वे दूध निःशुल्क उपलब्ध कराते है.
इस शानदार स्थान पर पहली बार पहुंचे प्रख्यात इतिहासकार डॉ. शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि बलिया जनपद में पशु-पक्षियों और पर्यावरण के प्रति अद्भुत प्रेम रखने वाला व्यक्ति है. पहली बार यहां आकर वे गौशाला को देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि कितनी अलग-अलग नस्लों की गायें यहां पाली जा रही है. उन्होंने कहा कि यहां का वातावरण वास्तव में अत्यंत सात्विक और शांतिमय है. ऐसे माहौल में रहने वाले व्यक्ति को स्वतः ही सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें