‘डर लगता है’, 12 मौतों के बाद कितनी सुरक्षित हुई मिर्जापुर की ड्रमंडगंज घाटी?
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Mirzapur News : पिछले महीने मिर्जापुर की ड्रमंडगंज घाटी पर हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों ने जान गंवाई थी. घटना के बाद यातायात सुरक्षा को लेकर प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी, लेकिन अभी भी घाटी की स्थिति जस की तस बनी हुई है. लोकल 18 जब वहां पहुंचा तो सचेतक और सूचना बोर्ड टूटे मिले. न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं. न ही ट्रक ड्राइवर की सूचना के लिए कोई डिस्प्ले बोर्ड है.
मिर्जापुर. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित ड्रमंडगंज घाटी पर पिछले दिनों हुए दर्दनाक सड़क हादसे में 12 लोगों की मौत हो गई थी. हादसे में एक ही परिवार के 9 सदस्यों की जान चली गई थी. घटना के बाद घाटी पर यातायात सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे, जहां प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाने को लेकर बात कही गई थी. हालांकि, हादसे को होने के बाद महीने भर का वक्त बीत चुका है. अभी भी घाटी की स्थिति जस की तस्वीर बनी हुई है. व्यवस्था के नाम पर सिर्फ स्लोगन लगा दिए गए हैं. कहीं-कहीं स्लोगन भी गिरे हुए हैं. सचेतक और सूचना बोर्ड भी टूटे हुए हैं. सवाल अभी भी वही हैं कि क्या किसी नए हादसे का इंतजार किया जा रहा है या वाकई में घाटी की सुरक्षा को लेकर प्रशासन सजग है.
ड्रमंडगंज घाटी पर 50 दिन पहले ढलान पर उतरते वक्त तक का ब्रेक फेल हो गया था, जिसके बाद ट्रक ने आगे चल रही बोलेरो को धक्का मार दिया था. बोलेरो आगे चले ट्रक में घुस गई थी. इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के नौ लोगों की मौत हुई थी. कुल 14 लोगों की जान चली गई थी. हादसे के बाद अभी भी सुधार के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. सड़क सुरक्षा के लिए स्लोगन से लगाए गए हैं. वह अच्छे से नहीं दिखाई दे रहे हैं न ही रिफ्लेक्टर लगाए गए हैं. न ही ट्रक ड्राइवर की सूचना के लिए कोई डिस्प्ले बोर्ड भी लगाया गया है, जो पहले ही घाटों के बारे में जानकारी दें.
‘सहम जाता है दिल’
घाटी पर जा रहे ऋषभ कुमार ने बताया कि नीचे उतरते वक्त या ऊपर जाते वक्त बहुत डर लगता है. कई बार हादसे हो चुके हैं और वाहनों की रफ्तार देखने के बाद दिल सहम सा जाता है. यहां पर इससे पहले भी कई हादसे हुए थे. हादसे के बाद कोई परिवर्तन नहीं हुआ है. आज भी स्थिति जस की तस है. प्रशासन को घाटी पर राहगीरों की सुरक्षा को लेकर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए ताकि यहां पर होने वाले हादसों को रोका जा सके.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें