बैंगन की पैदावार रह जाएगी आधी, ये कीट सड़ा देगा फल…कहीं आप भी तो नहीं कर रहे गलती?

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बैंगन की पैदावार रह जाएगी आधी, ये कीट सड़ा देगा फल…कहीं आप भी तो नहीं कर रहे गलती?


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बैंगन की पैदावार रह जाएगी आधी, ये कीट सड़ा देगा फल…आप भी तो नहीं कर रहे गलती

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Brinjal Farming Tips : बैंगन की खेती करने वाले किसानों के लिए तना और फल छेदक कीट हमेशा से आफत रहे हैं. यह कीट बैंगन के कोमल तनों और फलों को अंदर ही अंदर खा लेता है. इससे उपज आधी रह जाती है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि अगर किसान शुरू में ही लाइट ट्रैप या फिरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें, तो इस प्रकोप से बचा जा सकता है. अगर फसल में तना और फल दोनों गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, तो रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करें. किसान भाई इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़क दें. थायमेथॉक्सम + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन के कॉम्बिनेशन का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से भी कीट नष्ट हो जाते हैं.

शाहजहांपुर. बैंगन की खेती करने वाले किसानों के लिए ‘तना और फल छेदक कीट’ (Fruit and Shoot Borer) बड़ी चुनौती बनकर समाने आता है. यह कीट बैंगन के कोमल तनों और फलों को अंदर ही अंदर खाकर नष्ट कर देता है, जिससे फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है और किसानों की उपज आधी रह जाती है. शुरुआत में जानकारी के अभाव में किसान जैविक या प्राथमिक रोकथाम जैसे लाइट ट्रैप का इस्तेमाल नहीं कर पाते, जिससे कीट का प्रकोप तेजी से फैल जाता है. शाहजहांपुर के कृषि वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान लोकल 18 से बताते हैं कि बैंगन में फ्रूट एंड शूट बोरर बहुत अधिक मात्रा में आता है, जिससे फसल को भारी नुकसान पहुंचता है. अगर किसान शुरुआत से ही जागरूक रहें और खेत में लाइट ट्रैप या फिरोमोन ट्रैप का इस्तेमाल करें, तो इस प्रकोप से बचा जा सकता है. लेकिन जानकारी के अभाव में जब कीट का प्रकोप बढ़ जाता है और तना व फल दोनों क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तब 1 ग्राम प्रति लीटर इमामेक्टिन बेंजोएट या 1 ml प्रति लीटर पानी में थायमेथॉक्सम + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन मिलाकर छिड़काव करना चाहिए. इससे कीट से निजात मिलेगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसान खुशहाल होंगे.

तेजी से बढ़ती आबादी 

डॉ. हादी कहते हैं कि बैंगन की फसल में फ्रूट एंड शूट बोरर यानी तना और फल छेदक कीट सबसे खतरनाक कीटों में से एक माना जाता है. यह कीट पौधे की शुरुआती अवस्था में उसकी नई कोपलों व तनों के अंदर घुसकर उन्हें सुखा देता है. इसके बाद जब पौधे में फल लगने शुरू होते हैं, तो यह कीट फलों के अंदर छेद करके उन्हें सड़ा देता है. इससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होती हैं. अगर किसान फसल की शुरुआत से ही सतर्क रहें, तो रासायनिक कीटनाशकों के बिना भी इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके लिए खेतों में लाइट ट्रैप या फ़िरोमोन ट्रैप का प्रयोग करना बहुत प्रभावशाली होगा. हालांकि, बड़े क्षेत्रफल और जानकारी की कमी के कारण अक्सर किसान शुरुआती चरण में इन जैविक तरीकों का इस्तेमाल नहीं कर पाते, जिससे कीट की आबादी तेजी से बढ़ जाती है.

रासायनिक नियंत्रण की सही मात्रा

यदि बैंगन की फसल में तना और फल दोनों गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, तो रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव आवश्यक हो जाता है. इसके लिए किसानों को इमामेक्टिन बेंजोएट 5% एसजी की 1 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़क दें. इसके अलावा, थायमेथॉक्सम + लैम्ब्डा-साइहेलोथ्रिन के कॉम्बिनेशन का 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर स्प्रे करने से भी कीट नष्ट हो जाते हैं. डॉ. हादी के मुताबिक, समय पर और सही मात्रा में कीटनाशकों का प्रयोग करने से फसल को तना और फल छेदक कीट के प्रकोप से पूरी तरह बचाया जा सकता है. जब बैंगन के फल स्वस्थ और कीट-मुक्त रहेंगे, तो बाजार में उनका बेहतर मूल्य मिलेगा और कुल उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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